Worksheetsपुरस्कार
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कोशल राज्य के प्रसिद्ध उत्सव की मुख्य विशेषता क्या थी?
राजकुमारों के बीच घुड़दौड़ की प्रतियोगिता होना।
महाराज द्वारा एक दिन के लिए किसान बनकर इंद्रदेव की पूजा हेतु हल जोतना।
मधूलिका द्वारा पूरे नगर में स्वर्ण मुद्राओं का दान करना।
पड़ोसी राज्यों के साथ युद्ध की घोषणा करना।
मधूलिका ने महाराज द्वारा पुरस्कार में दी गई स्वर्ण मुद्राओं को क्यों बिखेर दिया?
क्योंकि वह स्वर्ण मुद्राओं की संख्या से संतुष्ट नहीं थी।
क्योंकि वह अपनी पूर्वजों (पितामहों) की भूमि बेचना अपराध मानती थी।
क्योंकि वह मगध के राजकुमार अरुण का अपमान करना चाहती थी।
क्योंकि उसे स्वर्ण मुद्राओं की आवश्यकता नहीं थी।
वृद्ध मंत्री ने महाराज को मधूलिका के विषय में क्या महत्वपूर्ण जानकारी दी?
वह कोशल राज्य की सबसे धनी बालिका है।
वह वाराणसी युद्ध के वीर सिंहमित्र की एकमात्र कन्या है।
वह मगध राज्य की गुप्तचर है।
वह उत्सव की व्यवस्थापक (organiser ) थी ।
राजकीय नियम के अनुसार मधूलिका को उसकी भूमि का कितना मूल्य दिया जा रहा था?
भूमि के मूल्य का दोगुना।
भूमि के मूल्य का तीन गुना।
भूमि के मूल्य का चौगुना।
भूमि के बदले मगध में दूसरी जमीन।
महाराज मधूलिका के पिता सिंहमित्र का नाम सुनकर क्यों चौंक उठे?
क्योंकि सिंहमित्र उनका शत्रु था।
क्योंकि सिंहमित्र ने ही मगध के सामने कोशल की लाज रखी थी।
क्योंकि वह सिंहमित्र को बहुत समय पहले भूल चुके थे।
क्योंकि सिंहमित्र मगध का राजकुमार था।
राजकुमार अरुण ने उत्सव के दौरान क्या देखा और उसकी ओर आकर्षित हुआ?
कोशल की अन्य कुमारियों को।
महाराज की सवारी और हाथियों को।
मधूलिका के भोले सौंदर्य को।
उत्सव में बजने वाले बाजों को।
जब राजकुमार अरुण ने मधूलिका को उसकी भूमि वापस दिलाने का प्रस्ताव दिया, तो उसने क्या उत्तर दिया?
वह तुरंत तैयार हो गई।
उसने कहा कि वह राष्ट्र-नियम नहीं बदलना चाहती।
उसने और अधिक स्वर्ण मुद्राओं की मांग की।
उसने अरुण को बंदी बनाने के लिए कहा।
पुरस्कार ठुकराने के बाद मधूलिका अपना जीवन-यापन कैसे करती थी?
वह राजभवन में सेविका बन गई।
वह दूसरे के खेतों में कठिन परिश्रम करके सूखा अन्न खाती थी।
वह पड़ोस के राज्य में जाकर रहने लगी।
उसने खेती करना पूरी तरह छोड़ दिया था।
भीषण वर्षा वाली रात में मधूलिका के द्वार पर आए पथिक ने स्वयं का क्या परिचय दिया?
कोशल नरेश का एक दूत।
वाराणसी का एक साधारण व्यापारी।
मगध का विद्रोही और निष्कासित राजकुमार।
एक भूखा और प्यासा किसान।
अरुण ने अपनी शक्ति बढ़ाने और सैनिकों को साथ रखने का क्या उद्देश्य बताया?
वह मगध पर आक्रमण करना चाहता था।
वह अपने बाहुबल से एक नया राज्य बनाना चाहता था।
वह कोशल के महाराज की रक्षा करना चाहता था।
वह केवल मधूलिका की सहायता करना चाहता था।
मधूलिका ने अरुण के स्वागत को 'विडंबना (irony)’ क्यों कहा?
क्योंकि वह अरुण को पसंद नहीं करती थी।
क्योंकि एक अनाथ कृषक बालिका द्वारा मगध के विद्रोही राजकुमार का स्वागत करना उसे विचित्र लगा।
क्योंकि उसकी झोंपड़ी टूटी-फूटी थी।
क्योंकि बाहर बहुत तेज वर्षा और गड़गड़ाहट हो रही थी।
इस कहानी के आधार पर मधूलिका का चरित्र कैसा प्रतीत होता है?
लोभी और धन की लालची।
स्वाभिमानी और राष्ट्र के नियमों का सम्मान करने वाली।
कमजोर और जल्दी हार मान लेने वाली।
विद्रोही और राज्य के विरुद्ध षड्यंत्र रचने वाली।
