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Total questions: 6
Worksheet time: 33mins
कुछ साथ में चलते रहे
कुछ बीच ही से फिर गए।
पर गति न जीवन की रुकी
जो गिर गए सो गिर गए
चलता रहे हरदम, उसी की सफलता अभिराम हैं।
चलना हमारा काम है।
(क) “कुछ साथ में चलते रहे, कुछ बीच से ही फिर गए”-पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर - उपरोक्त पंक्तियों द्वारा कवि कहना चाहता है कि इस जीवन पथ पर कुछ लोगों ने तो उनका साथ दिया, कुछ लोग उनके साथ चले, लेकिन कुछ लोगों ने रास्ते में ही उनका साथ छोड़ दिया। अर्थात जीवन में किसी का साथ छोड़ देने से जीवन की गति रुक नहीं जाती। जीवन पथ पर चलते हुए अगर कोई गिर कर रुक गया तो वह जीवन की सफलता का सुख प्राप्त नहीं कर सकता। ऐसी स्थिति में निराश नहीं होना चाहिए। सफलता का सुख उसे ही प्राप्त होता है जो जीवन पथ पर सदा चलता रहे, अर्थात कर्म करता रहे।
(ख) “चलना हमारा काम है”- कविता में भाग्यवाद पर किस प्रकार चोट की गई है?
उत्तर – “चलना हमारा काम है” -कविता में कवि ने भाग्यवाद पर करारा चोट किया है। संसार में कुछ लोग ऐसे होते है जो कर्म से ज्यादा भाग्य पर विश्वास करते है। जो लोग भाग्यवादी होते है, वे जीवन में असफल होते हैं। क्योंकि वे अपने जीवन में कर्म नहीं करते है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए आगे तो बढ़ते है, पर थोड़ी दूर जाकर या तो रुक जाते हैं या फिर लौट जाते हैं। ऐसे लोग जीवन में अपने भाग्य पर निर्भर रह जाते हैं और अपने बुरे भाग्य के लिए ईश्वर को कोसते हैं। ऐसे लोगों को सम्बोधित करते हुए कवि कहते हैं कि भाग्य पर निर्भर होना छोड़ों और आगे बढ़ो। जीवन में कर्म करते हुए आगे चलते रहो, तभी तुम्हारा जीवन सफल होगा।
(ग) कवि के अनुसार जीवन में सफलता किसे मिलती है?
उत्तर - कवि के अनुसार जीवन में सफलता उसी व्यक्ति को मिलती है, जो परिश्रमी, विवकेशील, आशावादी, प्रयत्नशील, गतिशील, निर्भीक व कल्पनाशील हो। इन्हीं गुणों के कारण उनका जीवन सार्थक होता है। उनकी बुद्धि के बल पर विज्ञान एवं समाज का विकास होता है। इसलिए आठों पहर धैर्यवान बन कर, परिश्रम करते हुए जीवन गति को गतिमान बना कर, लगन और दृढ़ता के साथ जीवन पथ पर आगे बढ़ते हुए कठिनाइयों का सामना करते हुए कर्मपथ पर चलना चाहिए।
(घ) कवि ने कविता में “चलना हमारा काम है”- पंक्ति को बार-बार क्यों दोहराया गया है? कवि इससे क्या प्रेरणा दे रहा है ?
उत्तर - कवि ने कविता में ’’चलना हमारा काम है’’- पंक्ति को बार-बार इसलिए दोहराया है कि मनुष्य को सदा प्रयत्नशील, गतिशील रहना चाहिए। तभी उसका जीवन सार्थक होगा। अन्यथा कीड़े-मकोड़ों की तरह जीवन जीकर हम भी उनकी पंक्ति में शामिल हो जाते हैं। कर्मशील व्यक्ति ही मर कर भी अमर हो जाते हैं। कवि हमें जीवन में सदा गतिशील एवं कर्मशील रहने की प्रेरणा दे रहे है। क्योंकि जीवन में वही व्यक्ति सफल होता है जो आगे बढ़ते ही जाता है। कवि कहते है कि चलना ही जीवन का नाम है।
कवि के अनुसार जीवन में सफलता किसे मिलती है?
जो परिश्रमी, विवकेशील, आशावादी, प्रयत्नशील, गतिशील, निर्भीक व कल्पनाशील हो।
जो केवल भाग्य पर निर्भर करता हो।
जो जीवन में कभी प्रयास नहीं करता।
जो कठिनाइयों से डरकर पीछे हट जाता है।
कविता में 'चलना हमारा काम है' पंक्ति को बार-बार क्यों दोहराया गया है?
मनुष्य को सदा प्रयत्नशील और गतिशील रहने की प्रेरणा देने के लिए।
भाग्य पर निर्भर रहने की सलाह देने के लिए।
जीवन में रुकने और आराम करने की प्रेरणा देने के लिए।
कठिनाइयों से बचने की सलाह देने के लिए।
कवि ने भाग्यवाद पर किस प्रकार चोट की है?
भाग्य पर निर्भर रहने वालों को कर्मशील बनने की प्रेरणा देकर।
भाग्य पर विश्वास करने की सलाह देकर।
कर्म न करने वालों को भाग्यवादी कहकर।
भाग्य को जीवन का मुख्य आधार मानकर।
कवि के अनुसार जीवन पथ पर गिरने वाले व्यक्ति को क्या प्राप्त नहीं होता?
जीवन की सफलता का सुख।
भाग्य का सहारा।
ईश्वर का आशीर्वाद।
जीवन का आराम।
कवि के अनुसार जीवन में निराशा से बचने का उपाय क्या है?
कर्म करते हुए आगे बढ़ते रहना।
भाग्य पर निर्भर रहना।
कठिनाइयों से बचना।
ईश्वर को कोसना।
कवि के अनुसार जीवन में गतिशीलता का महत्व क्या है?
जीवन को सार्थक बनाना।
जीवन को आरामदायक बनाना।
जीवन को भाग्य पर निर्भर बनाना।
जीवन को कठिनाइयों से बचाना।
कवि के अनुसार जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कौन से गुण आवश्यक हैं?
परिश्रम, विवेकशीलता, आशावादिता, प्रयत्नशीलता।
भाग्यवादिता, आराम, ईश्वर पर विश्वास।
कठिनाइयों से बचने की प्रवृत्ति।
जीवन में रुकने और आराम करने की प्रवृत्ति।
व्यथित हैं मेरा हृदय-प्रदेश,
चलूँ , उसको बहलाऊँ आज
बताकर अपना सुख-दुख उसे
हृदय का भार हटाऊँ आज।।
चलूँ माँ के पद- पंकज पकड़
नयन जल से नहलाऊँ आज।
मातृ मंदिर में मैंने कहा----
चलूँ दर्शन कर आऊँ आज।।
(क) कविता की रचयित्री कौन हैं? ये पंक्तियाँ उनकी किस कविता से ली गई हैं? उसके
हृदय के व्यथित होने का क्या कारण है ?
उत्तर - कविता की रचयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान हैं। ये पंक्तियाँ उनकी कविता “मातृ मंदिर की ओर” से ली गई हैं। उसके हृदय के व्यथित होने का कारण यह है कि अनेक नवयुवक देश-भक्तों के बलिदान के पश्चात भी देश को विदेशी शासन से मुक्ति दिलाने में सफलता प्राप्त नहीं हो रही है। चारों ओर शोषण, अत्याचार फैला हुआ है। यहाँ के लोग शोषण, गरीबी, अन्याय को झेल रहे हैं।यह पीड़ा सामान्य पीड़ा नहीं है, जिसे आसानी से सहा जा सके।
(ख) कवयित्री ने अपने मन को बहलाने का कौन-उपाय ढूँढ़ा?
उत्तर - कवयित्री ने अपने मन को बहलाने के लिए मातृभूमि जैसे पवित्र मंदिर में जाने का उपाय ढूँढ़ा ताकि माँ को अपना सुख-दुख बता कर, अपने हृदय की पीड़ा, व्यथा, वेदना को बता कर अपने हृदय के बोझ को कम कर सके। वह वहाँ जाकर जी भर कर रोना चाहती हैं। रोने से उनके मन का भार कम होगा। वह असफलता के आँसुओं से माँ के कमल के समान चरणों को भिगो देगीं। उन्हें अपने सुख- दुख से अवगत कराएंगी।
(ग) “चलूँ माँ के पद- पंकज पकड़ नयन जल से नहलाऊँ आज” -पंक्ति का भावार्थ लिखिए।
उत्तर - उपरोक्त पंक्ति का भावार्थ यह है कि कवयित्री की इच्छा है कि देवी माँ के मंदिर में पहुँच कर माँ के कमलरूपी चरण पकड़ कर अपने अश्रु रूपी जल से धो दूँ। अर्थात आज अपनी सारी व्यथा व दुख देवी माँ के चरणों में प्रकट कर दूँ। वे भारत माता के चरणो में गिर कर विलाप करती हुई रोना चाहती हैं। अतः कवयित्री की यही इच्छा है कि आज जाकर देवी माँ के दर्शन कर ही लूँ।
(घ) उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवयित्री क्या प्रेरणा दे रही है?
उत्तर - उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवयित्री भारतवासियों को देश की स्वतंत्रता के लिए उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है। कवयित्री समझाना चाहती है कि आज देश की स्थिति बड़ी ही नाजुक है। चारों ओर गुलामी के कारण हाहाकार मचा हुआ है। ऐसी स्थिति में देश की स्वतंत्रता के लिए सभी नागरिकों को आगे आना होगा। जरूरत पड़ी तो अपने प्राणों को देश की रक्षा के लिए बलिदान भी करना होगा। इस प्रकार उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवयित्री को राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मबलिदान एवं त्याग की भावना को जगाना है।
कविता की रचयित्री कौन हैं?
सुभद्रा कुमारी चौहान
महादेवी वर्मा
जयशंकर प्रसाद
रामधारी सिंह दिनकर
कवयित्री ने अपने मन को बहलाने का कौन-सा उपाय ढूँढ़ा?
मातृभूमि जैसे पवित्र मंदिर में जाने का
संगीत सुनने का
पुस्तकें पढ़ने का
मित्रों से बात करने का
'चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़ नयन जल से नहलाऊँ आज' पंक्ति का भावार्थ क्या है?
माँ के चरणों में अपनी व्यथा और दुख प्रकट करना
माँ के चरणों में फूल चढ़ाना
माँ के चरणों में जल अर्पित करना
माँ के चरणों में पूजा करना
कवयित्री के हृदय के व्यथित होने का क्या कारण है?
देश को विदेशी शासन से मुक्ति न मिलना
व्यक्तिगत समस्याएँ
प्राकृतिक आपदाएँ
सामाजिक असमानता
कवयित्री उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा क्या प्रेरणा दे रही हैं?
देश की स्वतंत्रता के लिए आगे बढ़ने की
संगीत और कला को बढ़ावा देने की
व्यक्तिगत विकास की
धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने की
कवयित्री ने अपने हृदय का भार हटाने के लिए क्या किया?
माँ को अपना सुख-दुख बताया
मित्रों से सलाह ली
पुस्तकें पढ़ीं
धार्मिक अनुष्ठान किया
कवयित्री ने किस कविता से उपर्युक्त पंक्तियाँ ली हैं?
'मातृ मंदिर की ओर'
'झाँसी की रानी'
'भारत की पुकार'
'वीर बालक'
किंतु यह हुआ अचानक ध्यान
दीन हूँ ,छोटी हूँ ,अज्ञान।
मातृ मंदिर का दुर्गम मार्ग
तुम्हीं बतला दो हे भगवान।
मार्ग के बाधक पहरेदार
सुना है ऊँचे- से सोपान।
फिसलते हैं ये दुर्बल पैर
चढ़ा दो मुझको हे भगवान।।
(क) कवयित्री को अचानक क्या ध्यान आया? उसने भगवान से क्या प्रार्थना की?
उत्तर - कवयित्री जब मातृ मंदिर में जाकर भारत माता से अपनी व्यथा व्यक्त करना चाहती है तभी उन्हें अचानक यह ध्यान आया कि माँ के मंदिर का मार्ग अत्यंत दुर्गम है,जहाँ पहुँचना बहुत कठिन है। ऐसी स्थिति में वह मातृ मंदिर में कैसे प्रवेश कर सकती है? इसलिए स्वयं को असक्ष्म, छोटी और अज्ञानी कह कर ईश्वर से ही कोई उपाय बताने की प्रार्थना करती है। वे कहती है कि हे ईश्वर मुझे माता के मंदिर तक पहुँचने का कोई मार्ग दिखाए। अब तुम्हीं हमारी सहायता कर सकते हो और मुझे उन सीढ़ियों पर पहुँचा सकते हो ,जहाँ से मेरे पाँव फिसलते हैं।
(ख) “मार्ग के बाधक पहरेदार” से कवयित्री का क्या तात्पर्य है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - “मार्ग के बाधक पहरेदार” से तात्पर्य अंग्रेजी हुकूमत से है, तथा वहाँ पहुँचने के लिए जो सीढ़ियाँ है वह भी बहुत ऊँची हैं। मार्ग में बाधाओं से तात्पर्य अंग्रेजी सरकार द्वारा होने वाले अत्याचारों से है, जो देशभक्तों के प्रयासों को बार-बार अपने सामर्थ्य से विफल कर देती है। मार्ग में अनेक पहरेदार हैं, जो बाधा उपस्थित करते हैं। ये हमेशा इसी प्रयास में रहते थे कि अधिक से अधिक लोगों का शोषण किया जाए।
(ग) कवयित्री ने मातृ मंदिर के मार्ग को दुर्गम क्यों कहा है? वह भगवान से क्या प्रार्थना करती है?
उत्तर - कवयित्री ने मातृ मंदिर के मार्ग को दुर्गम इसलिए कहा है क्योंकि वहाँ तक पहुँचने का रास्ता बहुत ही कठिन है। वहाँ आसानी से नहीं पहुँचा जा सकता। मंदिर की सीढ़ियाँ बहुत ऊँची हैं, वहाँ तक पहुँचने के लिए ये अनगिनत सीढ़ियाँ बाधक बन कर खड़ी हैं। उनके पाँव अत्यंत दुर्बल है , किन्तु वे मन्दिर तक जाना चाहती है। इसलिए वे भगवान से प्रार्थना करती हैं कि माता उन्हें इतना साहस,बल, मार्ग की बाधाओं का सामना करने की शक्ति प्रदान करें कि वह उनके मंदिर तक पहुँचने में समर्थ हो सकें।
(घ) शब्दार्थ लिखिए-
उत्तर - दीन-- गरीब बाधक-- बाधा डालने वाला ,रोकने वाला
दुर्गम-- जहाँ पहुँचना कठिन हो सोपान-- सीढ़ी
कवयित्री को अचानक क्या ध्यान आया?
मातृ मंदिर का मार्ग दुर्गम है
मंदिर में प्रवेश करना आसान है
भगवान से प्रार्थना करना व्यर्थ है
मंदिर की सीढ़ियाँ छोटी हैं
कवयित्री ने भगवान से क्या प्रार्थना की?
मंदिर तक पहुँचने का मार्ग दिखाने की
मंदिर की सीढ़ियाँ हटाने की
अंग्रेजी हुकूमत को समाप्त करने की
मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति देने की
‘मार्ग के बाधक पहरेदार’ से कवयित्री का क्या तात्पर्य है?
अंग्रेजी हुकूमत
मंदिर के पुजारी
मंदिर की सीढ़ियाँ
भगवान
कवयित्री ने मातृ मंदिर के मार्ग को दुर्गम क्यों कहा है?
वहाँ तक पहुँचने का रास्ता कठिन है
मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है
मंदिर की सीढ़ियाँ छोटी हैं
भगवान की कृपा नहीं है
कवयित्री भगवान से क्या चाहती है?
साहस और बल
धन और संपत्ति
मंदिर की सीढ़ियाँ हटाने की
अंग्रेजी हुकूमत को समाप्त करने की
‘दीन’ शब्द का अर्थ क्या है?
गरीब
अज्ञानी
साहसी
बलवान
‘दुर्गम’ शब्द का अर्थ क्या है?
जहाँ पहुँचना कठिन हो
जहाँ पहुँचना आसान हो
जहाँ कोई बाधा न हो
जहाँ भगवान हों
अहा! वे जगमग-जगमग जगी
ज्योतियाँ दीख रही हैं वहाँ
शीघ्रता करो वाद्य बज उठे
भला मैं कैसे जाऊँ वहाँ ?
सुनाई पड़ता है कल-गान
मिला दूँ मैं भी अपनी तान।
शीघ्रता करो मुझे ले चलो ,
मातृ मंदिर में हे भगवान।।
(क) “ज्योतियाँ दीख रही हैं वहाँ”-पंक्ति द्वारा कवयित्री का संकेत किस ओर है?
उत्तर - ‘‘ज्योतियाँ दीख रही हैं वहाँ‘‘-पंक्ति द्वारा कवयित्री का संकेत देश को स्वतंत्रता मिल जाने की ओर है। जगमग-जगमग करने वाले दीपकों की लौ अपना प्रकाश बिखेर रही है। कवयित्री को वे ज्योति पुंज दिखाई दे रहे हैं अर्थात अब भारत को स्वतंत्रता मिल जाएगी क्योंकि चारों तरफ से सुगबुगाहट सुनाई दे रही है। देश भर के लोग इसके लिए ऊर्जान्वित हो चुके हैं। लोगों में स्वतंत्रता, एकता एवं अखण्डता की भावना सर्वोपरि है। कवयित्री इस प्रकार आशावादी सोच का संचार करती हैं।
(ख) “वाद्य बज उठे” से कवयित्री का क्या अभिप्राय है? उनकी ध्वनि सुन कर उसकी क्या प्रतिक्रिया होती है?
उत्तर - “वाद्य बज उठे” से कवयित्री का अभिप्राय यह है कि अनेक वीर पुत्र देश की रक्षा के लिए सकारात्मक ऊर्जा व देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत होकर ,अपने प्राणों को न्यौछावर करने के लिए तैयार हैं। मंदिर में बजने वाले वाद्य यंत्र की ध्वनि सुन कर कवयित्री उसमें अपनी तान मिलाना चाहती हैं क्योंकि उन्हें अब स्वतंत्रता के स्वर सुनाई दे रहे हैं। उन सुरों में वह भी अपनी आवाज मिलाना चाहती हैं। वह स्वतंत्रता के गान में अपना योगदान देना चाहती हैं। उसकी ध्वनि सुन कर उसके मन में यही प्रतिकिया होती है कि कवयित्री शीघ्र से शीघ मंदिर पहुँचने के लिए माता से अनुनय विनय करती है। उन्हें लगता है कि सबके साथ मिल कर आगे बढ़ने से लक्ष्य जल्दी प्राप्त हो सकेगा।
(ग) “कल-गान” से कवयित्री का क्या आशय है? इस संदर्भ में कवयित्री अपनी क्या अभिलाषा व्यक्त करती है?
उत्तर - “कल-गान” से कवयित्री का आशय सुंदर गीत अर्थात स्वतंत्रता के आनंद के गीत से है। मातृ मंदिर में कल गान को सुन कर कवयित्री का मन प्रसन्न हो जाता है। उन्होंने यह अभिलाषा व्यक्त की है कि मातृ मंदिर में अनगिनत जलते दीपक के साथ कल गान की ध्वनि सुनाई पड़ रही है। वहाँ पहुँचने में वे स्वयं को अक्षम पाती है। उस गाने की धुन में अपने गाने की धुन को मिलाना चाहती हैं। वे भी भारत माता को गुलामी की जंजीरों से आजाद करवाने की चाह रखती हैं।
(घ) उपर्युक्त पंक्तियों का मूलभाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - भारत माता का मंदिर दूर है अर्थात स्वतंत्रता अभी दूर है, पर इतनी दूर भी नहीं है। वे आह्लादित हो उठी है। अगणित दीपकों का प्रकाश चारों दिशाओं में प्रकाशवान हो रहा है, प्रार्थना के समय के वाद्य-संगीत की ध्वनि सुनाई पड़ रही है, किंतु वे स्वयं को वहाँ पहुँचने में अक्षम पाती है। मूलभाव यह है कि अनेक वीर पुत्र देश की रक्षा के लिए उत्साहित हैं। उनका ओजस्वी स्वर अन्य वीर सपूतों को पुकार रहा है। भारत माता की पूजा अर्चना हो रही है, मधुर संगीत सुनाई पड़ रहा है। कवयित्री भी वहीं देश राग गाना चाहती हैं, उस पवित्र मंदिर तक शीघ्र पहुँचने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं। अर्थात माया-मोह एवं स्वार्थ के बंधनों से मुक्त होकर देश पर मर मिटने वाले वीर सपूतों के साथ कवयित्री भी सम्मिलित होना चाहती हैं।
कवयित्री ने 'ज्योतियाँ दीख रही हैं वहाँ' पंक्ति में किस ओर संकेत किया है?
देश को स्वतंत्रता मिल जाने की ओर
मंदिर में जलते दीपकों की ओर
सुगबुगाहट सुनाई देने की ओर
ऊर्जान्वित लोगों की ओर
'वाद्य बज उठे' से कवयित्री का क्या अभिप्राय है?
देश की रक्षा के लिए वीर पुत्रों की सकारात्मक ऊर्जा
मंदिर में बजने वाले वाद्य यंत्र
स्वतंत्रता के स्वर सुनाई देना
स्वतंत्रता के गान में योगदान देना
'कल-गान' से कवयित्री का क्या आशय है?
स्वतंत्रता के आनंद के गीत
मधुर संगीत
मंदिर में बजने वाले गीत
भारत माता की पूजा
कवयित्री ने 'मातृ मंदिर' का उल्लेख क्यों किया है?
स्वतंत्रता प्राप्ति के प्रतीक के रूप में
भारत माता की पूजा के लिए
मधुर संगीत सुनने के लिए
दीपकों के प्रकाश के लिए
उपर्युक्त पंक्तियों का मूलभाव क्या है?
स्वतंत्रता प्राप्ति की ओर अग्रसर होना
माया-मोह से मुक्त होना
देश राग गाना
वीर सपूतों के साथ सम्मिलित होना
कवयित्री 'स्वतंत्रता के गान' में अपनी तान क्यों मिलाना चाहती हैं?
स्वतंत्रता के स्वर सुनाई देने के कारण
देश प्रेम की भावना से प्रेरित होकर
मंदिर में बजने वाले वाद्य यंत्र की ध्वनि सुनकर
लक्ष्य जल्दी प्राप्त करने के लिए
कवयित्री ने 'अगणित दीपकों का प्रकाश' का उल्लेख क्यों किया है?
स्वतंत्रता की ओर संकेत करने के लिए
मंदिर की सुंदरता दिखाने के लिए
देश की एकता और अखंडता को दर्शाने के लिए
सुगबुगाहट सुनाई देने के लिए
चलूँ मैं जल्दी से बढ़- चलूँ
देख लूँ माँ की प्यारी मूर्ति।
अहा ! वह मीठी-सी मुसकान
जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति।।
उसे भी आती होगी याद ?
उसे , हाँ आती होगी याद।
नहीं तो रूठूँगी मैं आज
सुनाऊँगी उसको फरियाद।।
(क) उपर्युक्त पंक्तियों के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि कवयित्री की क्या इच्छा है?
उत्तर - कवयित्री की इच्छा है कि वह जल्दी से जल्दी चल कर देवी माँ का दर्शन कर ले और माता की प्यारी मूर्ति को देख ले। उनकी कल्पना में माता की मुस्कुराती हुई मूर्ति नाच रही है। माता की मीठी सी मुस्कान को याद कर उनके मन में नई अनोखी सी स्फूर्ति आ जाती है। जिस तरह से वह माता को याद कर रही है ,उसी तरह माता भी उसे याद कर रही होगी। वह पुनः कहती है कि अगर माता उसको याद नहीं कर रही होगीं तो आज वह माता से रूठ जाएगी और उनके दरबार में अपनी फरियाद सुनाएगी। अर्थात माता का हृदय कोमल होता है, इसलिए उनकी फरियाद अवश्य सुनी जाएगी। माँ उनकी गलतियों को क्षमा कर देगी। इस प्रकार उन्होंने अधिकार पूर्वक माता के सामने अपनी फरियाद रखने की इच्छा व्यक्त की है।
(ख) “मीठी-सी मुस्कान” का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - उपरोक्त पंक्तियों के माध्यम से कवयित्री कल्पना करते हुए कहती है कि भारत माता की वह सुंदर मूर्ति जिसे देख कर हमारे मुख पर मुस्कान फैल जाती है, तथा माँ की प्यारी सी, मीठी सी मुस्कान से मेरे हृदय में नई-सी स्फूर्ति, अद्भुत चुस्ती और उतेजना जाग जाती है। अर्थात माता प्रेरणा देने वाली है। वे माँ की मुस्कराती मूर्ति देखना चाहती है, माँ के मुख पर वह मुस्कान तब ही आएगी, जब भारत माता बंधन मुक्त होगी।
(ग) “जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति” -पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - “जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति” -पंक्ति का आशय यह है कि मातृभूमि की मूर्ति अत्यंत दिव्य है। उसकी मुस्कान इतनी मधुर है कि उसे देखते ही शरीर में नई स्फूर्ति अर्थात ताजगी का समावेश हो जाता है। कवयित्री अपनी स्वतंत्र भारत माता की उस छवि की कल्पना करती है, जब वह बंधनों से मुक्त होगी और उसके मुख पर मुस्कान आ जाएगी। माता की मीठी सी मुस्कान को याद कर उसके मन में नई अनोखी सी स्फूर्ति आ जाती है।
(घ) उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
उत्तर - कवयित्री मातृ मंदिर तक पहुँचने के लिए बैचेन है, मंदिर में स्थापित मूर्ति के दर्शन करने के लिए आतुर हैं। भारत माता की प्यारी सी मूर्ति देखना चाहती है। कवयित्री कहती है कि माँ की प्यारी सी मुस्कान से मेरे हृदय में एक नई-सी स्फूर्ति जाग जाती है क्योंकि माँ की मूर्ति उनकी आँखों में बसी हुई है। वे किसी भी तरह से माता के दर्शन करना चाहती है। माता के दर्शन से उनका शरीर नई उमंग, नई चेतना, नए उत्साह से भर उठता है। वे अधिकारपूर्वक माता के सामने अपनी फरियाद को भी रखती हैं। मन में विचार करती है कि जिस तरह कवयित्री माँ को याद करती है, उसी तरह क्या माँ को भी उसकी याद आती होगी ? आगे वह संदेह प्रकट करते हुए कहती है, अगर माता मुझे स्मरण नहीं करती होगी, तो मैं आज रूठ जाऊँगी और अपनी फरियाद सुनाऊँगी। कवयित्री माँ को सम्बोधित करती हुई कहती है जिस माँ के स्मरण मात्र से उसके शरीर में नई स्फूर्ति जाग जाती है यदि वह माँ उसे स्मरण नहीं करती तो आज वह माँ से रूठ कर अपनी फरियाद माँ के समक्ष रखेगी।
कवयित्री की क्या इच्छा है?
माता की मूर्ति को देखना
माता से बात करना
माता के साथ खेलना
माता के लिए खाना बनाना
'मीठी-सी मुस्कान' का संदर्भ क्या है?
माता की प्यारी मुस्कान
माता की आँखें
माता का गहना
माता का वस्त्र
'जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति' का क्या आशय है?
माता की मुस्कान से नई ऊर्जा का अनुभव
माता की मूर्ति का अद्भुत सौंदर्य
माता के मंदिर का वातावरण
माता के दर्शन का महत्व
कवयित्री क्यों माता से फरियाद करना चाहती है?
माता उसे याद नहीं करती
माता उसे दर्शन नहीं देती
माता उसे प्यार नहीं करती
माता उसे आशीर्वाद नहीं देती
कवयित्री के अनुसार माता की मुस्कान कब आएगी?
जब भारत माता बंधन मुक्त होगी
जब मंदिर में पूजा होगी
जब कवयित्री माता को देखेगी
जब माता खुश होगी
कवयित्री के मन में माता के प्रति क्या भावना है?
अधिकारपूर्वक फरियाद रखने की
माता से डरने की
माता से दूर रहने की
माता को भूलने की
कवयित्री के अनुसार माता की मूर्ति कैसी है?
दिव्य और प्रेरणादायक
साधारण और सामान्य
भारी और चमकदार
छोटी और सुंदर
कलेजा माँ का, मैं संतान
करेगी दोषों पर अभिमान।
मातृ-वेदी पर हुई पुकार ,
चढ़ा दो मुझको ,हे भगवान ।।
सुनूँगी माता की आवाज़
रहूँगी मरने को तैयार।
कभी भी उस वेदी पर देव ,
न होने दूँगी अत्याचार।।
न होने दूँगी अत्याचार
चलो , मैं हो जाऊँ बलिदान।
मातृ-मंदिर में हुई पुकार ,
चढ़ा दो मुझको , हे भगवान।।
(क) उपर्युक्त पंक्तियों में “माँ” की किस विशेषता का उल्लेख किया गया है और क्यों?
उत्तर - उपर्युक्त पंक्तियों में “माँ” की विशेषता का उल्लेख इसलिए किया गया है क्योंकि माँ का हृदय माँ का ही होता है। माँ के हृदय में अपनी संतान के प्रति अगाध ममता होती है, वह अपनी संतान की त्रुटियों को भी क्षमा कर देती है। उसके मन में अपनी संतान के प्रति गर्व का भाव होता है। उसकी अच्छाई और बुराई हमेशा स्वीकारती आई है। पुत्र कुपुत्र हो सकता है पर माता कभी भी कुमाता नहीं हो सकती।
(ख) “मातृ-वेदी पर हुई पुकार” का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - “मातृ-वेदी पर हुई पुकार” में मातृ-वेदी पंक्ति का संदर्भ है कि आज भारत भूमि पर विपत्तियों के काले बादल छाए हुए है। वह परतंत्रता के बंधन में जकड़ी हुई है, अनेकानेक अत्याचार हो रहे है। अतः अपनी रक्षा के लिए भारत माता अपनी वीर सपूतों का आह्वान कर रही है। कवयित्री माँ के आह्वान पर, अपने देश की रक्षा के लिए बड़े से बड़ा त्याग करने के लिए भी तैयार हैं।
(ग) कौन किस पर तथा किस प्रकार अत्याचार कर रहा था? अत्याचार के विरोध में कवयित्री अपनी क्या इच्छा व्यक्त करती है?
उत्तर - अंग्रेज भारत पर, देशभक्तों को राजद्रोही मान कर, उनके साथ अन्याय व अत्याचार करते थे। अत्याचार के विरोध में कवयित्री अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहती है कि वह अपने देशवासियों पर किसी प्रकार का अत्याचार नहीं होने देगी। स्वाधिनता के लिए अपने प्राणों को भी देने के लिए तैयार है। वे ईश्वर से प्रार्थना कर रही है कि आज मेरा देश, मेरी परतंत्र मातृभूमि मुझे पुकार रही है। ईश्वर मुझे इतनी शक्ति दो कि मैं भारत माता को उन विदेशी शासकों द्वारा किए गए अत्याचार से मुक्त करा सकूँ।
(घ) उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवयित्री क्या प्रेरणा दे रही है?
उत्तर - उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवयित्री देशवासियों को प्रेरणा दे रही है, कि उन्हें अपने देश की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। अपने प्राणों की चिंता किये बिना अपना जीवन इस देश पर न्यौछावर करने के भाव रखना चाहिए। अर्थात देशवासियों को स्वतंत्रता-संग्राम में अपने जीवन की बाज़ी लगाने के लिए प्रेरित कर रही है। ताकि देश में शांति व सद्भावना स्थापित हो सके।
उपर्युक्त पंक्तियों में 'माँ' की किस विशेषता का उल्लेख किया गया है और क्यों?
माँ का हृदय माँ का ही होता है।
माँ अपनी संतान की त्रुटियों को क्षमा नहीं करती।
माँ के मन में अपनी संतान के प्रति गर्व का भाव नहीं होता।
माँ अपनी संतान की अच्छाई और बुराई को स्वीकार नहीं करती।
'मातृ-वेदी पर हुई पुकार' का संदर्भ क्या है?
भारत भूमि पर विपत्तियों के काले बादल छाए हुए हैं।
भारत भूमि पर शांति और सद्भावना स्थापित है।
भारत भूमि पर कोई विपत्ति नहीं है।
भारत भूमि पर स्वतंत्रता संग्राम समाप्त हो चुका है।
कौन किस पर तथा किस प्रकार अत्याचार कर रहा था?
अंग्रेज भारत पर अत्याचार कर रहे थे।
भारतीय देशभक्तों पर अत्याचार कर रहे थे।
विदेशी शासक भारतीयों को स्वतंत्रता दे रहे थे।
अंग्रेज भारतीयों को सम्मानित कर रहे थे।
कवयित्री अत्याचार के विरोध में अपनी क्या इच्छा व्यक्त करती है?
स्वाधीनता के लिए अपने प्राणों को देने की।
विदेशी शासकों का समर्थन करने की।
अत्याचार को सहन करने की।
परतंत्रता को स्वीकार करने की।
उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवयित्री क्या प्रेरणा दे रही है?
देश की सुरक्षा के लिए तत्पर रहने की।
अपने प्राणों की चिंता करने की।
देश पर अत्याचार सहने की।
विदेशी शासकों का समर्थन करने की।
कवयित्री ईश्वर से क्या प्रार्थना कर रही है?
भारत माता को विदेशी शासकों के अत्याचार से मुक्त कराने की शक्ति देने की।
विदेशी शासकों को और अधिक शक्ति देने की।
भारत माता को परतंत्रता में रखने की।
देशवासियों को अत्याचार सहने की शक्ति देने की।
'पुत्र कुपुत्र हो सकता है पर माता कभी भी कुमाता नहीं हो सकती' का क्या अर्थ है?
माँ हमेशा अपनी संतान की अच्छाई और बुराई को स्वीकार करती है।
माँ अपनी संतान की त्रुटियों को कभी क्षमा नहीं करती।
माँ अपनी संतान के प्रति गर्व का भाव नहीं रखती।
माँ अपनी संतान की अच्छाई को ही स्वीकार करती है।
