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कबीर  के दोह

कबीर के दोह

Assessment

Presentation

•

Other

•

6th - 7th Grade

•

Hard

Created by

Hemalatha Suresh

FREE Resource

7 Slides • 0 Questions

1

कबीर के दोह

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2

सन्त कबीर कवि और समाज सुधारक थे। कबीर शब्द का अर्थ अरबी भाषा में महान होता है। कबीरदास भारत के भक्ति काव्य परंपरा के महानतम कवियों में से एक थे। भारत में धर्म, भाषा या संस्कृति किसी की भी चर्चा बिना कबीर की चर्चा के अधूरी ही रहेगी। 

3

माला तो कर में फिरै,जीभ फिरै मुख माहिं।

मनुवाँ तो चहुँ दिशि फिरै , ये तो सुमिरन नाहिं ।।

4

दुख में सुमिरन सब करै , सुख में करै न कोय ।

जो सुख में सुमिरन करै , तो दुख काहे को होय।।

5

साई इतना दीजिये , जामें कुटुंब समाय।

मैं भी भूखा ना रहुँ साधु न भूखा जाय ।।

6

काल करै सो आज कर, आज करै सो अब्ब ।

पल में परलै होयगा,बहुरि करैगो कब्ब ।।

7

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