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ओज़ोन परत पृथ्वी की ढाल

ओज़ोन परत पृथ्वी की ढाल

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6th - 8th Grade

Hard

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Class10 A

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ओज़ोन परत पृथ्वी की ढाल

ओज़ोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की एक परत है जिसमें ओजोन गैस की सघनता अपेक्षाकृत अधिक होती है। ओज़ोन परत के कारण ही धरती पर जीवन संभव है। यह परत सूर्य के उच्च आवृत्ति के पराबैंगनी प्रकाश की 93-99 % मात्रा अवशोषित कर लेती है, जो पृथ्वी पर जीवन के लिये हानिकारक है। पृथ्वी के वायुमंडल का 91% से अधिक ओज़ोन यहां मौजूद है।

16 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय ओजोन दिवस मनाया जाता है. पृथ्वी की सतह से करीब 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर ओजोन गैस की एक पतली परत पाई जाती है. इसे ही ओजोन लेयर या ओजोन परत कहते हैं. ओजोन की ये परत सूर्य से आने वाली अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन को सोख लेती है. ये रेडिएशन अगर धरती तक बिना किसी परत के सीधी पहुंच जाए तो ये मनुष्य के साथ पेड़-पौधों और जानवरों के लिए भी बेहद खतरनाक को सकती है.

पृथ्वी पर जीवन के लिए ओजोन परत बहुत जरूरी है. सूर्य से सीधी आने वाली अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन बहुत हानिकारक होती है. इसके प्रभाव से कैंसर जैसी कई खतरनाक बीमारियां हो सकती है. ओजोन की परत इन रेडिएशन को सोखकर हमारे जीवन की रक्षा करती है.

पर क्या आप जानते हैं कि हमारे जीवन की रक्षा करने वाली ओजोन लेयर अब खुद खतरे में है. ओजोन परत पर पहले से ही छेद हो गए हैं जिन्हें ओजोन होल्स कहा जाता है. इन ओजोन होल्स का पहली बार पता सन 1985 में चला था. मौजूदा समय में कई तरह के केमिकल ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचा रहे हैं. जिससे ओजोन की परत और पतली होकर फैलने का खतरा बढता जा रहा है.

ओजोन लेयर को बिगाड़ने के जिम्मेदार भी हम ही हैं. फैक्ट्री और तरह-तरह के उद्योग से निकलने वाले खतरनाक रसायन हवा में फैलकर प्रदूषण फैला रहे हैं.

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ओज़ोन परत पृथ्वी की ढाल

ओज़ोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की एक परत है जिसमें ओजोन गैस की सघनता अपेक्षाकृत अधिक होती है। ओज़ोन परत के कारण ही धरती पर जीवन संभव है। यह परत सूर्य के उच्च आवृत्ति के पराबैंगनी प्रकाश की 93-99 % मात्रा अवशोषित कर लेती है, जो पृथ्वी पर जीवन के लिये हानिकारक है। पृथ्वी के वायुमंडल का 91% से अधिक ओज़ोन यहां मौजूद है।

16 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय ओजोन दिवस मनाया जाता है. पृथ्वी की सतह से करीब 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर ओजोन गैस की एक पतली परत पाई जाती है. इसे ही ओजोन लेयर या ओजोन परत कहते हैं. ओजोन की ये परत सूर्य से आने वाली अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन को सोख लेती है. ये रेडिएशन अगर धरती तक बिना किसी परत के सीधी पहुंच जाए तो ये मनुष्य के साथ पेड़-पौधों और जानवरों के लिए भी बेहद खतरनाक को सकती है.

पृथ्वी पर जीवन के लिए ओजोन परत बहुत जरूरी है. सूर्य से सीधी आने वाली अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन बहुत हानिकारक होती है. इसके प्रभाव से कैंसर जैसी कई खतरनाक बीमारियां हो सकती है. ओजोन की परत इन रेडिएशन को सोखकर हमारे जीवन की रक्षा करती है.

पर क्या आप जानते हैं कि हमारे जीवन की रक्षा करने वाली ओजोन लेयर अब खुद खतरे में है. ओजोन परत पर पहले से ही छेद हो गए हैं जिन्हें ओजोन होल्स कहा जाता है. इन ओजोन होल्स का पहली बार पता सन 1985 में चला था. मौजूदा समय में कई तरह के केमिकल ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचा रहे हैं. जिससे ओजोन की परत और पतली होकर फैलने का खतरा बढता जा रहा है.

ओजोन लेयर को बिगाड़ने के जिम्मेदार भी हम ही हैं. फैक्ट्री और तरह-तरह के उद्योग से निकलने वाले खतरनाक रसायन हवा में फैलकर प्रदूषण फैला रहे हैं.

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