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ऐसे थे लाल बहादुर शास्त्री

ऐसे थे लाल बहादुर शास्त्री

Assessment

Presentation

World Languages

3rd Grade

Hard

Created by

SADAT ALLI

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4 Slides • 0 Questions

1

"प्राची! जल्दी-जल्दी काम खत्म कर लो, फिर खेलने जाना," माँ ने आवाज़ लगाई। "माँ कल तो छुट्टी है, कल कर लूँगी।" प्राची ने चहकते हुए कहा। "छुट्टी क्यों है?" माँ ने जिज्ञासा से पूछा। प्राची बोली, "माँ कल दो अक्टूबर है। हाँ माँ, दो अक्टूबर यानी गाँधी जी और शास्त्री जी का जन्मदिन। गाँधी जयंती पर विद्यालय में छुट्टी होती हैं।" "क्या तुम गाँधी जी के बारे में जानती हो?" माँ ने पूछा। "हाँ, थोड़ा-बहुत। लेकिन माँ, ये शास्त्री जी कौन थे? क्या आप मुझे इनके बारे में बताएँगी, वे कैसे थे? प्राची ने उत्सुकता से पूछा। "हाँ-हाँ बताती हूँ।" माँ बोली। 

2

बात उन दिना की है जब नन्हें की अवस्था अभी छह वर्ष की थी। एक बार अपने साथियों के साथ कर वह एक बगीचे में गुलाब के फूल तोड़ने पहँचा। सभी साथियों ने फल तोड़-तोड़कर अपनी झोलियों में भर लिए। किंतु सबसे छोटा और कमज़ोर होने के कारण नन्हें अभी एक फूल भी नहीं तोड़ पाया था। बहुत प्रयत्न के बाद एक फूल पर हाथ पहुँचा ही था कि बाग का माली आ पहुँचा। उसे देखते ही सभी बालक नौ-दो ग्यारह हो गए। पर, नन्हें भाग न सका और माली की पकड़ में आ गया। शिकार को हाथ आया देखकर माली ने पूरी ताकत से उसे पीटना शुरू कर दिया। "माँ, फिर क्या हुआ?" प्राची ने पूछा। 

"फिर, नन्हें ने धीरे से कहा "मेरे पिता नहीं हैं, इसलिए मुझे इस तरह मार रहे हो न!" माली इस बात को सुनकर पछताया और फिर शांत होकर उत्तर दिया "पिता न होने पर तो तुम्हारी और भी अधिक जिम्मेदारी है, बेटा।"

3

यह सुनकर नन्हें बिलख-बिलखकर रो पड़ा।" 

माँ ने फिर कहा-"उसी दिन से उसने निश्चय कर लिया कि अब वह आजीवन ऐसा कोई काम नहीं करगा, जिससे किसी को नुकसान पहुँचे।" 

"माँ, क्या 'नन्हें ही शास्त्री जी थे?" "हाँ बेटी, इनका पूरा नाम था-लाल बहादुर शास्त्री।" 

"एक बात और, दो अक्टूबर का दिन सारे देश में बापू के जन्मदिवस के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म भी सन् 1904 को इसी दिन उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे मुगलसराय में हुआ था।" माँ ने बताया। अब छोटी प्राची की समझ में आ गया कि लाल बहादुर बचपन से ही अपनी जिम्मेदारी समझते थे। जो भी काम उन्हें सौंपा जाता था, वे उसे सच्चाई, ईमानदारी और लगन के साथ पूरा करते थे। 

अपनी विशेषताओं के कारण ही वे स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने। उन्होंने पूरे देश को 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया। 'जय जवान, जय किसान' की आवाज़ लगाती हुई प्राची फिर अपना काम करने में जुट गई। 

4

शब्दार्थ:

जिज्ञासा-उत्सुकता, जानने की इच्छा 

अवस्था-उम्र, प्रयत्न-कोशिश, 

नौ-दो ग्यारह (होना)-डरकर भाग जाना 

आजीवन-सारा जीवन 

सौंपा -दिया जाना 

"प्राची! जल्दी-जल्दी काम खत्म कर लो, फिर खेलने जाना," माँ ने आवाज़ लगाई। "माँ कल तो छुट्टी है, कल कर लूँगी।" प्राची ने चहकते हुए कहा। "छुट्टी क्यों है?" माँ ने जिज्ञासा से पूछा। प्राची बोली, "माँ कल दो अक्टूबर है। हाँ माँ, दो अक्टूबर यानी गाँधी जी और शास्त्री जी का जन्मदिन। गाँधी जयंती पर विद्यालय में छुट्टी होती हैं।" "क्या तुम गाँधी जी के बारे में जानती हो?" माँ ने पूछा। "हाँ, थोड़ा-बहुत। लेकिन माँ, ये शास्त्री जी कौन थे? क्या आप मुझे इनके बारे में बताएँगी, वे कैसे थे? प्राची ने उत्सुकता से पूछा। "हाँ-हाँ बताती हूँ।" माँ बोली। 

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