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20. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_4.41–5.06

Authored by Abhay Ram Das

Religious Studies

University

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20. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_4.41–5.06
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2.

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कृपया यहाँ पर अपना मोबाईल न0 लिखें ।

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4.

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कृपया यहाँ पर अपना पता लिखें ।

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5.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

आत्मपरायण व्यक्ति से आप क्या समझते हो ?

जो अपने कर्मफलों का परित्याग करते हुए भक्ति करता है ।

जिसके समस्त संशय दिव्यज्ञान द्वारा विनष्ट हो चुके होते हैं ।

जो कर्मों के बंधनों से मुक्त होता है ।

ये सभी विकल्प सही हैं ।

6.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

सनातन योग पद्धति में कितने प्रकार के और कौन-कौन से यज्ञ कर्म किए जाते हैं ?

दो प्रकार के यज्ञकर्म - द्रव्ययज्ञ और आत्मज्ञान यज्ञ ।

दो प्रकार के यज्ञकर्म - तपोयज्ञ और स्वाध्याय यज्ञ ।

दो प्रकार के यज्ञकर्म - योगयज्ञ और तपोयज्ञ ।

दो प्रकार के यज्ञ कर्म - द्रव्य यज्ञ और योग यज्ञ ।

दो प्रकार के यज्ञकर्म - द्रव्ययज्ञ और आत्मज्ञान यज्ञ ।

दो प्रकार के यज्ञकर्म - तपोयज्ञ और स्वाध्याय यज्ञ ।

दो प्रकार के यज्ञकर्म - योगयज्ञ और तपोयज्ञ ।

दो प्रकार के यज्ञ कर्म - द्रव्य यज्ञ और योग यज्ञ ।

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

यदि द्रव्ययज्ञ आत्म-साक्षात्कार के लिए नहीं किया जाता है तो ऐसा यज्ञ भौतिक बन जाता है । ऐसा क्यों ?

क्योंकि ऐसा द्रव्ययज्ञ सकाम कर्मों हेतु किए जाने के कारण भौतिक स्तर पर ही रह जाता है ।

क्योंकि द्रव्ययज्ञ इंद्रियतृप्ति हेतु किए जाने वाले कर्मों का अनुपूरक होता है ।

क्योंकि ऐसा द्रव्ययज्ञ कृष्णभावनाभावित कर्म होता है ।

क्योंकि द्रव्ययज्ञ का प्रावधान सांसारिक इच्छाओं की तुष्टि हेतु ही हुआ है ।

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