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Bhagavad Gita As It Is DAY-04 (1.31-40)

Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa

History, Life Skills, Religious Studies

KG - Professional Development

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Bhagavad Gita As It Is DAY-04 (1.31-40)
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1.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

कितने प्रकार के मनुष्य परम शक्तिशाली तथा जाज्वल्यमान सूर्यमण्डल में प्रवेश करने के योग्य होते हैं? (1.31)

1

2

3

4

2.

MULTIPLE SELECT QUESTION

3 mins • 1 pt

सारे बद्धजीव क्या सोचकर शरीर पर आधारित संबंधों के प्रति आकर्षित होते हैं? (1.31)

इसी से वे प्रसन्न हो सकेंगे

देहात्मबुद्धि के कारण वे शरीर के भीतर वास्तविक जीव को नहीं जानते और शरीर को ही सबकुछ समझते हैं

3.

MULTIPLE SELECT QUESTION

3 mins • 1 pt

अर्जुन के शत्रुओं को मारने से विमुख होकर वन में जाकर एकांत में निराशापूर्ण जीवन काटने की इच्छा में क्या गलत है? (1.31)

वह क्षत्रिय के नैतिक धर्म को भूल रहा है

क्षत्रिय के जीवननिर्वाह के लिए आवश्यक व अपने पिता के उत्तराधिकार रूपी राज्य को त्यागना चाह रहा है

वह अपने शत्रुओं को भी मारने से विमुख हो रहा है

4.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

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"श्रेयः" शब्द का अर्थ बताइये | (1.31)

कल्याण

सम्बन्धी

सुख

विजय

5.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

Media Image

अर्जुन ने भगवान् को किस नाम से सम्बोधित किया? (1.32)

कृष्ण

गोविन्द

मधुसूदन

जनार्दन

6.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

भगवान् किसी जीव की इन्द्रियों की तुष्टि या इच्छाओं की पूर्ति कहाँ तक करते हैं? (1.32)

जितना वह चाहता है

जितने का वह पात्र होता है

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

Media Image

भगवान् कब जीव की सारी इच्छाओं को पूरा कर देते हैं? (1.32)

जब वह अपनी इन्द्रियों की तृप्ति के साथ-साथ भगवान् की इन्द्रियों को भी तुष्ट करने का प्रयास करता है

जब वह अपनी इन्द्रियों की तृप्ति करने का जी-तोड़ भरसक प्रयास करता है

जब वह अपनी इन्द्रियों की तृप्ति न करके भगवान् की इन्द्रियों को तुष्ट करने का प्रयास करता है

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