
Bhagavad Gita As It Is DAY-32 (8.2-11)
Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa
Life Skills, Philosophy, Special Education
KG - Professional Development
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1.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
अर्जुन ने भगवान् से क्या प्रश्न पूछे? (8.2)
यज्ञ का स्वामी कौन है और वह शरीर में कैसे रहता है?
मृत्यु के समय भक्ति में लगे रहने वाले आपको कैसे जान पाते हैं?
2.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
अर्जुन ने भगवान् को मधुसूदन कहकर क्यों सम्बोधित किया? (8.2)
क्योंकि कृष्ण ने मधु नामक असुर का वध किया था
जिससे कृष्ण उस के मन में उठने वाली समस्त आसुरी शंकाओं को नष्ट कर दें
क्योंकि कृष्ण मधुवन में विहार करते हैं और मधु के समान मधुर हैं
3.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
5 mins • 1 pt
कौन प्रार्थना करते हैं, “हे भगवान्! इस समय मैं पूर्ण स्वस्थ हूँ | अच्छा हो कि मेरी मृत्यु इसी समय हो जाय जिससे मेरा मन रूपी हंस आपके चरणकमलोंरूपी नाल के भीतर प्रविष्ट हो सके”? (8.2)
महाराज खट्वांग
महाराज मुचुकुन्द
महाराज कुलशेखर
महाराज चित्रकेतु
4.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
सही विकल्प पहचानें | (8.3)
ब्रह्म का अर्थ है भगवान् और परब्रह्म का अर्थ जीव है
भौतिक चेतना में जीव का स्वभाव पदार्थ पर प्रभुत्व जताना है
आध्यात्मिक चेतना या कृष्णभावनामृत में जीव की स्थिति परमेश्वर की सेवा करना है
5.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
वैदिक साहित्य में जीव को क्या-क्या कहा जाता है? (8.3)
आत्मा
जीवात्मा
परमात्मा
ब्रह्म
परब्रह्म
6.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
छांदोग्य उपनिषद् में दिए वैदिक यज्ञ-अनुष्ठानों के वर्णन के अनुसार कौन सी अग्नियां उनकी सही आहुति के साथ लिखी गयी हैं? (8.3)
स्वर्गलोक - श्रद्धा
बादल - सोम
पृथ्वी - वर्षा
मनुष्य - अन्न
स्त्री - वीर्य
7.
MULTIPLE SELECT QUESTION
5 mins • 1 pt
अधिभूत, अधिदैव, अधियज्ञ की सही व्याख्या चुनिए | (8.4)
निरन्तर परिवर्तनशील यह भौतिक प्रकृति अधिदैव कहलाती है
भगवान् का विराट रूप, जिसमें सूर्य-चन्द्र जैसे समस्त देवता सम्मिलित हैं, अधिभूत (भौतिक अभिव्यक्ति) कहलाता है
प्रत्येक देहधारी के हृदय में परमात्मा स्वरूप स्थित परमेश्वर कृष्ण (यज्ञ का स्वामी) अधियज्ञ कहलाते हैं
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