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Bhagavad Gita As It Is DAY-64 (18.9-18)

Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa

Life Skills, Philosophy, Special Education

KG - Professional Development

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Bhagavad Gita As It Is DAY-64 (18.9-18)
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1.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

जो व्यक्ति कृष्णभावनामृत में रहकर कारखाने में कार्य करता है, वह किस तरह दिव्य स्तर पर कार्य करता है? (18.9)

वह कारखाने के कार्यों से अपने को जोड़ता है

वह कारखाने के श्रमिकों से अपने को जोड़ता है

वह तो मात्र कृष्ण के लिए कार्य करता है

वह इसका फल कृष्ण को अर्पण कर देता है

2.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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कैसा त्याग सात्त्विक कहलाता है? (18.9)

जब मनुष्य नियत कर्तव्य को करणीय मान कर करता है

जब मनुष्य समस्त भौतिक संगति तथा फल की आसक्ति को त्याग देता है

जब मनुष्य नियत कर्त्तव्य को ही भौतिक समझकर त्याग देता है

3.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

सतोगुण में स्थित बुद्धिमान त्यागी, जो अध्यात्म को प्राप्त है, किस प्रकार कार्य करता है? (18.10)

न तो अशुभ कार्य न किसी व्यक्ति से घृणा करता है

उपयुक्त स्थान-समय पर बिना डरे कर्तव्य करता है

न शुभकर्म से लिप्त होता है

न अपने शरीर को कष्ट देने वाले से घृणा करता है

कर्म के विषय में कोई संशय नहीं रखता

4.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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कौन वास्तव में त्यागी है? (18.11)

समस्त कर्मों का परित्याग करने वाला

जो कर्म फल का परित्याग करता है

जो कृष्ण के लिए कर्म करता है

जो कर्म फलों को भोगता नहीं

जो कृष्ण को सब कुछ अर्पित करता है

5.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

किस व्यक्ति को इच्छित (इष्ट), अनिच्छित (अनिष्ट) तथा मिश्रित – ये तीन प्रकार के कर्मफल मृत्यु के बाद मिलते हैं? (18.12)

जो संन्यासी है

जो त्यागी नहीं है

कृष्णभावनामय व्यक्ति

6.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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किस प्रकार अन्तर्यामी परमात्मा परम नियंत्रक हैं? (18.13)

भगवद्गीता में कहा गया है – सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टः – वे प्रत्येक व्यक्ति को उसके पूर्व कर्मों का स्मरण करा कर किसी न किसी कार्य में प्रवृत्त करते रहते हैं

जो कृष्ण भावना भावित कर्म अन्तर्यामी भगवान् के निर्देशानुसार किये जाते हैं, उनका फल न तो इस जीवन में, न ही मृत्यु के पश्चात् मिलता है

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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सांख्य और वेदांत में क्या सम्बन्ध है? (18.13)

सांख्य का अर्थ है ज्ञान का आधार स्तम्भ और वेदान्त अग्रणी आचार्यों द्वारा स्वीकृत ज्ञान का चरम आधार स्तम्भ है

वेदान्त का अर्थ है ज्ञान का आधार स्तम्भ और सांख्य अग्रणी आचार्यों द्वारा स्वीकृत ज्ञान का चरम आधार स्तम्भ है

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