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Bhagavad Gita As It Is DAY-33 (8.12-21)

Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa

Life Skills, Philosophy, Special Education

KG - Professional Development

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Bhagavad Gita As It Is DAY-33 (8.12-21)
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1.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

अविचलित दिव्य समाधि में बने रहने के लिए आज के समय में कौन सी विधि व्यावहारिक (सुगम) है? (8.12)

इन्द्रियभोग के सारे द्वार बन्द करना

इन्द्रियविषयों से इन्द्रियों को हटाना

मन हृदय में स्थित परमात्मा पर केन्द्रित करना

प्राणवायु को सिर के ऊपर तक चढ़ाना

कृष्णभावनामृत में अपने मन को कृष्ण में स्थिर करना

2.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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निर्विशेषवादी (निराकारवादी) कहाँ रह जाते हैं? (8.13)

ब्रह्मज्योति

वैकुण्ठ लोक

गोलोक वृन्दावन

अमेरिका

3.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

यदि कोई – हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे | हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे– इस मन्त्र का जप करते हुए शरीर त्यागता है तो वह कहाँ जाता है? (8.13)

अपने अभ्यास के गुणानुसार आध्यात्मिक लोकों में

निर्विशेष ब्रह्मज्योति में

अमेरिका में

अधोलोकों में

4.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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ॐकार के विषय में क्या सही है? (8.13)

ॐ, ब्रह्म तथा भगवान् कृष्ण परस्पर भिन्न नहीं हैं

ॐ, कृष्ण की निर्विशेष ध्वनि है

हरे कृष्ण में यह ॐ सन्निहित है

5.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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शुद्धभक्त क्या चाहता है? (8.14)

स्वर्गलोक जाना

ब्रह्मज्योति से तादात्म्य

मोक्ष या भवबन्धन से मुक्ति

भगवान् को प्रसन्न करना

कुछ नहीं चाहता

6.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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कौन सा शब्द सूचित करता है कि इस श्लोक में शुद्ध भक्तियोग का वर्णन है, जिसमें ज्ञान, कर्म या हठ आदि अन्य विधियों का मिश्रण नहीं होता? (8.14)

अनन्यचेताः

सततं

स्मरति

नित्यशः

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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किसे पूर्णशान्ति का लाभ होता है? (8.14)

स्वर्गलोक चाहने वाला कर्मयोगी

ब्रह्मज्योति से तादात्म्य का इच्छुक ज्ञानयोगी

मोक्ष या भवबन्धन से मुक्ति का अभिलाषी हठयोगी

एकनिष्ट भाव से भक्ति में लगा निष्काम शुद्धभक्त

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