Search Header Logo

Bhagavad Gita As It Is DAY-65 (18.19-28)

Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa

Life Skills, Philosophy, Special Education

KG - Professional Development

Used 20+ times

Bhagavad Gita As It Is DAY-65 (18.19-28)
AI

AI Actions

Add similar questions

Adjust reading levels

Convert to real-world scenario

Translate activity

More...

    Content View

    Student View

15 questions

Show all answers

1.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

Media Image

तमोगुण किस प्रकार कार्य करता है? (18.19)

प्रकाशक

भौतिकवादी

आलस्य तथा प्रमाद का प्रेरक

2.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

Media Image

इनमें से कौन सा गुण मुक्ति का साधन है? (18.19)

सतोगुण

रजोगुण

तमोगुण

कोई भी नहीं, प्रकृति के सारे गुण बन्धनकारी हैं

3.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

समस्त जीवों में एक ही आत्मा है, यद्यपि पूर्व कर्मों के अनुसार उनके शरीर भिन्न-भिन्न हैं - यह कैसा ज्ञान है जो आत्मसाक्षात्कार का एक पहलू बताया गया है? (18.20)

निराकार

साकार

4.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

रजोगुण से उत्पन्न, राजसी ज्ञान के कारण व्यक्ति की क्या धारणा होती है? (18.21)

एक शरीर दूसरे शरीर से भिन्न है, क्योंकि उनमें चेतना का विकास भिन्न प्रकार से होता है

शरीर स्वयं आत्मा है और शरीर के परे कोई पृथक् आत्मा नहीं है, चेतना अस्थायी है

इस शरीर के परे कोई विशेष जीवात्मा या परम आत्मा नहीं है; और यह शरीर क्षणिक अज्ञानता का प्रकाश है

5.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

इनमें से कौन सा ज्ञान तामसी, तमोगुण से उत्पन्न कहा जाता है? (18.22)

इस शरीर से परे आत्मा सम्बन्धी ज्ञान

जिस ज्ञान से लौकिक तर्क तथा चिन्तन (मनोधर्म) द्वारा नाना प्रकार के सिद्धान्त तथा वाद जन्म ले

शरीर को सुखमय बनाये रखने वाले ज्ञान को

6.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

Media Image

तामसी ज्ञान के क्या लक्षण हैं? (18.22)

सत्य को जाने बिना अति तुच्छ कार्य में लिप्तता

प्रमाणों या शास्त्रीय आदेशों के माध्यम से अर्जित

खाने, सोने, रक्षा करने तथा मैथुन करने का ज्ञान

परम सत्य से सम्बंधित

धन, शारीरिक आवश्यकताओं की तुष्टि

7.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

Media Image

कौन सा कर्म सात्त्विक कहलाता है? (18.23)

जो कर्म अनियमित है

जो आसक्ति, राग या द्वेष से युक्त है

कर्मफल की चाह से किया जाता है

शास्त्रों में संस्तुत वृत्तिपरक कर्म

परमात्मा को प्रसन्न करने के लिए

Access all questions and much more by creating a free account

Create resources

Host any resource

Get auto-graded reports

Google

Continue with Google

Email

Continue with Email

Classlink

Continue with Classlink

Clever

Continue with Clever

or continue with

Microsoft

Microsoft

Apple

Apple

Others

Others

Already have an account?