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34. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_7.29–8.04

Authored by Abhay Ram Das

Religious Studies

University

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34. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_7.29–8.04
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2.

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4.

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कृपया यहाँ पर अपना पता लिखें ।

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5.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

कौन से बुद्धिमान् व्यक्ति भगवान् श्रीकृष्ण की भक्ति की शरण ग्रहण करते हैं ?

जो जरा तथा मृत्यु से मुक्ति पाने के लिए यत्नशील होते हैं ।

भौतिक जगत् के कष्टों से पीड़ित व्यक्ति ।

अर्थ प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्ति ।

यह सभी प्रकार के व्यक्ति भगवान् श्रीकृष्ण की भक्ति की शरण ग्रहण करते हैं ।

6.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

दिव्य कर्मों अर्थात् कृष्णभावनाभावित कर्मों के विषय में पूर्ण ज्ञान रखने वाले व्यक्ति को भगवान् श्रीकृष्ण ने "वास्तव में ब्रह्म" क्यों कहा है ?

क्योंकि ऐसे व्यक्ति को ज्ञान होता है कि कृष्णभावनाभावित कर्मों के द्वारा ही वास्तविक मुक्ति प्राप्त की जा सकती है ।

क्योंकि ऐसे व्यक्ति को ज्ञान होता है कि कृष्णभावनाभावित कर्मों के द्वारा वास्तविक शाँति प्राप्त की जा सकती है ।

क्योंकि ऐसे व्यक्ति को ज्ञान होता है कि कृष्णभावनाभावित कर्मों के द्वारा ही वास्तविक आनन्द प्राप्त किया जा सकता है ।

यह सभी कथन सत्य हैं ।

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

जन्म, मृत्यु, जरा तथा व्याधि आध्यात्मिक शरीर को क्यों नहीं सताते हैं ?

क्योंकि आध्यात्मिक शरीर आध्यात्म नामक पदार्थ का बना होता है ।

क्योंकि आध्यात्मिक शरीर में काल के अधीन नहीं होता है ।

क्योंकि आध्यात्मिक शरीर भगवान् की शक्तियों के अधीन कार्य नहीं करता है ।

क्योंकि आध्यात्मिक शरीर सप्ततत्व का बना होता है ।

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