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40. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_9.09–9.12

Authored by Abhay Ram Das

Religious Studies

University

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40. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_9.09–9.12
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2.

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4.

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5.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

श्रील प्रभुपाद जी ने हमें श्लोक संख्या 9.9 के तात्त्पर्य में क्या निर्देश दिया है ?

यह कि हमें यह कदापि नहीं सोचना चाहिए कि भगवान् के पास कोई काम नहीं है ।

यह कि हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि भगवान् केवल वैकुण्ठ लोक में ही रहते हैं ।

यह कि हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि भगवान् हमारे हितैषी नहीं अपितु शत्रु हैं ।

यह कि हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि भगवान् हमारे सेवक हैं और हम इस जगत के स्वामी हैं ।

6.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

भगवान् सदैव कहाँ और कैसे कार्यकलापों व्यस्त रहते हैं ?

भगवान् अपने वैकुण्ठलोक में सतत दिव्य आनन्दमय आध्यात्मिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं ।

भगवान् भौतिक जगत् में रहकर यहाँ के जीवों की इच्छाओं की पूर्ति हेतु व्यवस्था में निमग्न रहते हैं ।

भगवान् अपने वैकुण्ठलोक में रहकर,अधिकाधिक शक्तियाँ अर्जित करने के लिए सदैव तपस्या में लीन रहते हैं ।

भगवान् अपने वैकुण्ठलोक में रहकर, प्रतिक्षण अपनी शक्तियों को व्यवस्थित करने में ही व्यस्त रहते हैं ।

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

श्लोक संख्या 9.9 में भगवान् श्रीकृष्ण भौतिक कार्यों के प्रति अपना क्या सम्बन्ध उद्घाटित करते हैं ?

यह कि भगवान् को भौतिक कार्यों से कोई सरोकार नहीं रहता है ।

यह कि भौतिक जगत् के समस्त कार्य भगवान् की शक्तियों के द्वारा किये जाते हैं ।

यह कि भगवान् भौतिक जगत् के कार्यों के प्रति सदैव उदासीन रहते हैं ।

यह सभी कथन सत्य हैं क्योंकि भगवान् की भौतिक जगत् के प्रति उदासीनता को प्रकट करते हैं ।

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