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44. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_9.27–9.31

Authored by Abhay Ram Das

Religious Studies

University

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44. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_9.27–9.31
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1.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

कृष्ण आत्म संतुष्ट है किन्तु फिर भी वे पत्र, पुष्प, फल आदि अर्पित किये जाते है उन्हें क्यूँ स्वीकार करते है ?

क्योंकि कृष्ण लोगों में दान करने की प्रवति को लोकहित में बढ़ाना चाहते है

क्योंकि कृष्ण भक्त से प्रेम व् स्नेह का आदान प्रदान चाहते है

ताकि दान करने वाला व्यक्ति दान के फल से स्वर्ग जा सके

क्योंकि कृष्ण को दान /पूजा करने कृष्ण की शक्ति बढती है

2.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

30 sec • 1 pt

हमें कौन से समय में तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए ?

रविवार

द्वादशी के दिन

रात के समय

(ii) & (iii)

3.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

30 sec • 1 pt

भगवद गीता के अनुसार जो लोग कृष्ण को बिना अर्पित किये खाते है वो केवल -------- खाते है ?

भोजन

पाप

पेट भरने के लिए

आनंद के लिए

4.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

30 sec • 1 pt

कृष्ण को जब पत्र, पुष्प , फल और जल अर्पित किया जाता है तो वे इसे स्वीकार करते हैं , इसका अर्थ हुआ की कृष्ण .....................?

इन्द्रियों से युक्त है

इन्द्रियों से अतीत है अर्थात परे है

इन्द्रियों से रहित है

इन्द्रियों के स्वामी है

5.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

30 sec • 1 pt

कृष्ण जब इस धरती पर अवतरित हुए तब कृष्ण इन्द्रियों से युक्त थे , तब इसका क्या अर्थ हुआ की कृष्ण एक सामान्य व्यक्ति के समान थे या परम सत्य नही थे ?

हाँ ,क्योंकि निराकार ब्रह्मा कृष्ण / मानव रूप में प्रकट हुए थे जो वापिस निराकार ब्रह्मा में लीन हो गये थे |

नही ,क्योंकि कृष्ण अपने आदि दिव्य रूप में अपनी दिव्य इन्द्रियों के साथ अपने धाम सहित प्रकट हुए थे जो निराकार ब्रह्मा के भी आश्रय है |

हाँ , क्योंकि पर ब्रह्मा तो निराकार है और समस्त उपाधियों से रहित है |

(i) & (iii)

6.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

30 sec • 1 pt

भगवद गीता 9.27 के अनुसार कृष्ण को क्या - क्या अर्पित किया जाना चाहिए ?

समस्त कार्य

समस्त कार्य , भोजन और दान

समस्त कार्य, भोजन, दान और तपस्या

समस्त कार्य , भोजन , दान तपस्या और सुख / दुःख

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

30 sec • 1 pt

कृष्ण उपदेश करते हैं कि समस्त कार्य कृष्ण को अर्पित करो, तो क्या इसका अर्थ हुआ कि पाप कर्म भी कृष्ण को अर्पित किया जाय ?

हाँ , क्योंकि कृष्ण सब पाप और पुण्य से परे है |

नहीं , क्योंकि पापकर्म को कृष्ण की संतुष्टि के लिए नहीं किया जा सकता |

हाँ, क्योंकि अगर कृष्ण को पाप भी अर्पित किया जाय तो वे सरे पापों से जीव को मुक्त कर देते हैं |

हाँ , क्योंकि पाप और पुण्य व्यक्ति की सोच पर निर्भर करता है |

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