
Chapter 9 सौर विकिरण , ऊष्मा संतुलन एवं तापमान
Authored by Manish Kumar
Geography
11th Grade
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1.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 1 pt
कथनः पवनों द्वारा ताप का स्थानांतरण एक स्थान से दूसरे स्थान पर होता है।
कारणः पृथ्वी के अलग-अलग भागों में ताप की मात्रा समान नहीं होती है।
कूटः
A
कथन सही है, कारण भी सही है तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
B
कथन सही है, कारण भी सही है लेकिन कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
C
कथन सही है, कारण गलत है।
D
कथन गलत है, कारण सही है।
A
B
C
D
Answer explanation
Explanation
व्याख्याः पृथ्वी के अलग-अलग भागों में प्राप्त ताप की मात्रा समान नहीं होती। इसी भिन्नता के कारण वायुमंडल के दाब में भिन्नता होती है एवं इसी कारण पवनों के द्वारा ताप का स्थानांतरण एक स्थान से दूसरे स्थान पर होता है।
2.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 1 pt
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. उपसौर की स्थिति में पृथ्वी को अपसौर की अपेक्षा अधिक सूर्यातप प्राप्त होता है।
2. अपसौर और उपसौर की स्थिति में सूर्यातप की भिन्नता के कारण पृथ्वी के दैनिक मौसम पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A
केवल 1
B
केवल 2
C
1 और 2 दोनों
D
न तो 1 और न ही 2
A
B
C
D
Answer explanation
Explanation
व्याख्याः
केवल पहला कथन सत्य है। पृथ्वी के पृष्ठ पर सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊर्जा का अधिकतम अंश लघु तरंगदैर्ध्य के रूप में आता है। पृथ्वी को प्राप्त होने वाली ऊर्जा को ही "सूर्यातप" (Insolation) कहते हैं। सूर्य के चारों ओर परिक्रमण के दौरान पृथ्वी 4 जुलाई को सूर्य से सबसे दूर होती है। पृथ्वी की इस स्थिति को अपसौर (Aphelion) कहा जाता है। 3 जनवरी को पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है, इस स्थिति को उपसौर (Perihelion) कहा जाता है। इसलिये पृथ्वी को उपसौर की स्थिति में, अपसौर की अपेक्षा अधिक सूर्यातप प्राप्त होता है।
दूसरा कथन असत्य है। सूर्यातप की भिन्नता का प्रभाव दूसरे कारकों, जैसे- स्थल एवं समुद्र का वितरण तथा वायुमंडल परिसंचरण के द्वारा कम हो जाता है। यही कारण है कि सूर्यातप की यह भिन्नता पृथ्वी की सतह पर होने वाले प्रतिदिन के मौसम परिवर्तन पर अधिक प्रभाव नहीं डाल पाती है।
3.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 1 pt
पृथ्वी की सतह पर सूर्यातप की तीव्रता की मात्रा में प्रतिदिन, हर मौसम और प्रतिवर्ष परिवर्तन होता रहता है। इसके प्रमुख कारण हैं-
1. पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूर्णन।
2. सूर्य की किरणों का नति कोण।
3. दिन की अवधि।
4. वायुमंडल की पारदर्शिता।
कूटः
A
केवल 1, 2 और 3
B
केवल 2, 3 और 4
C
केवल 1, 3 और 4
D
उपरोक्त सभी।
A
B
C
D
Answer explanation
Explanation
व्याख्याः पृथ्वी की सतह पर सूर्यातप की तीव्रता की मात्रा में प्रतिदिन, हर मौसम और प्रतिवर्ष परिवर्तन होता रहता है। सूर्यातप में विभिन्नता के निम्न कारण हैं-
1. पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना।
2. सूर्य की किरणों का नति कोण।
3. दिन की अवधि।
4. वायुमंडल की पारदर्शिता।
5. स्थल विन्यास।
अंतिम दो कारकों का प्रभाव कम पड़ता है।
4.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 1 pt
निम्नलिखित में से कौन-सी घटना/घटनाएँ प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण होती है/हैं?
1. आकाश का रंग नीला दिखाई पड़ना।
2. आकाश में इंद्रधनुष का बनाना।
3. सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य का लाल दिखाई देना।
कूटः
A
केवल 1
B
केवल 2 और 3
C
केवल 1 और 3
D
केवल 3
A
B
C
D
Answer explanation
Explanation
व्याख्याः लघु तरंगदैर्ध्य वाले सौर-विकिरण के लिये वायुमंडल अधिकांशतः पारदर्शी होता है। पृथ्वी की सतह पर पहुँचने से पहले सूर्य की किरणें वायुमंडल से होकर गुज़रती हैं। क्षोभमंडल में मौजूद जलवाष्प, ओज़ोन तथा अन्य किरणें अवरक्त विकिरण (Infrared radiation) को अवशोषित कर लेती हैं। क्षोभमंडल में निलंबित कण, दिखने वाले स्पेक्ट्रम को अंतरिक्ष एवं पृथ्वी की सतह की ओर विकीर्ण कर देते हैं। यही प्रक्रिया आकाश में रंग के लिये उत्तरदायी है। इसी से उदय एवं अस्त होनें के समय सूर्य लाल रंग का दिखाई देता है तथा आकाश नीले रंग का दिखाई देता है। ऐसा वायुमंडल में प्रकीर्णन के कारण होता है।
5.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 1 pt
वायुमंडल में उष्मा संचलन के संबंध में नीचे दिये गए युग्मों पर विचार कीजियेः
1. पृथ्वी के संपर्क में आने वाली वायुमंडल की परत का गर्म होना - चालन
2. वायुमंडल के लंबवत् तापन की प्रक्रिया - संवहन
3. वायु के क्षैतिज संचलन से ताप का स्थानांतरण - अभिवहन
उपरोक्त में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
A
केवल 1 और 2
B
केवल 2
C
1, 2 और 3
D
केवल 2 और 3
A
B
C
D
Answer explanation
Explanation
व्याख्याः उपरोक्त तीनों युग्म सही सुमेलित हैं।
सूर्य से आने वाली सौर विकिरण से गर्म होने के बाद पृथ्वी की सतह के निकट स्थित वायुमंडलीय परतों में दीर्घ तरंगों के रूप में ताप का संचरण होता है, पृथ्वी के संपर्क में आने वाली वायु धीरे-धीरे गर्म होती है। निचली परतों के संपर्क में आने वाली वायुमंडल की ऊपरी परतें भी गर्म हो जाती हैं। इस प्रक्रिया को चालन (Conduction) कहा जाता है।
चालन तभी होता है जब असमान ताप वाले दो पिंड एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं। वायुमंडल की निचली परतों को गर्म करने में चालन महत्त्वपूर्ण है।
पृथ्वी के संपर्क में आई वायु गर्म होकर धाराओं के रूप में लंबवत् उठती है और वायुमंडल में ताप का संचरण करती है। वायुमंडल के लंबवत् तापन की यह प्रक्रिया संवहन (Convection) कहलाती है। ऊर्जा के स्थानांतरण का यह प्रकार केवल क्षोभमंडल तक सीमित रहता है।
वायु के क्षैतिज संचलन से होने वाला ताप स्थानांतरण अभिवहन (Advection) कहलाता है।
6.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 1 pt
सूर्यातप की पृथ्वी की सतह पर स्थानिक वितरण के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः
1. पृथ्वी पर सबसे अधिक सूर्यातप उपोष्ण कटिबंधीय मरुस्थलों पर प्राप्त होता है।
2. एक ही अक्षांश पर स्थित महासागरीय भाग में, महाद्वीपीय भाग की अपेक्षा अधिक सूर्यातप प्राप्त होता है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A
केवल 1
B
केवल 2
C
1 और 2 दोनों
D
न तो 1 और न ही 2
A
B
C
D
Answer explanation
Explanation
व्याख्याः
पहला कथन सत्य है। धरातल पर प्राप्त सूर्यातप की मात्रा में उष्ण कटिबंध में 320 वाट/प्रति वर्गमीटर से लेकर ध्रुवों पर 70 वाट/प्रति वर्गमीटर तक भिन्नता पाई जाती है। सबसे अधिक सूर्यातप उपोष्ण कटिबंधीय मरुस्थलों पर प्राप्त होता है, क्योंकि यहाँ मेघाच्छादन बहुत कम पाया जाता है। उष्ण कटिबंध की अपेक्षा विषुवत् वृत्त पर कम मात्रा में सूर्यातप प्राप्त होता है।
दूसरा कथन असत्य है। सामान्यतः एक ही अक्षांश पर स्थित महाद्वीपीय भाग पर अधिक और महासागरीय भाग में अपेक्षाकृत कम मात्रा में सूर्यातप प्राप्त होता है।
7.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 1 pt
उष्णकटिबंधीय प्रदेशों के उत्तरी भाग में गर्मियों में चलने वाली स्थानीय पवन परिणाम है-
A
संवहन
B
चालन
C
विकिरण
D
अभिवहन
A
B
C
D
Answer explanation
Explanation
व्याख्याः वायु के क्षैतिज संचलन से होने वाले ताप का स्थानांतरण अभिवहन कहलाता है। मध्य अक्षांशों में दैनिक मौसम में आने वाली भिन्नताएँ केवल अभिवहन के कारण होती हैं। उष्णकटिबंधीय प्रदेशों में, विशेषतः उत्तरी भागों में गर्मियों में चलने वाली स्थानीय पवन “लू” इसी अभिवहन का ही परिणाम है।
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