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रहीम के दोहे

Total questions: 10

Worksheet time: 3mins

Name
Class
Date
1.

रहीम का जन्म कब और कहा हुआ?

a)

1747, दिल्ली

b)

1498, अमरावती

c)

1556, लाहौर

d)

1565, लाहौर

2.

रहीम के दोहे में कितने दोहे हैं?

a)

10

b)

11

c)

12

d)

13

3.

धागा टूटने से क्या होता हैं?

a)

रिश्ता में गाँठ पड़ जाती है।

b)

रिश्ता मज़बूत बनता है।

c)

इंसान मर जाता है।

d)

इंसान रोता है।

4.

हम अपने दुःखों को दूसरों के साथ साझा नहीं करना चाहिए।

यह किस दोहे के अर्थ है?

a)

रहिमन पानी राखिए, बिनु पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।।

b)

नाद रीझी तन देत मृग, नर धन हेत समेत।

ते रहिमन पशु से अधिक, रीझेहु कछू न देत।।

c)

बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोय।

रहिमन फ़ाटे दूध को, मथे न माखन होय।।

d)

रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखों गोय।

सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय।।

5.

कौन सा दोहा कीचड़ का काव्य के समान है?

a)

एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।

रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय॥

b)

चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध-नरेस।

जा पर बिपदा पड़त है, सो आवत यह देस॥

c)

धनि रहीम जल पंक को लघु जिय पियत अघाय।

उदधि बड़ाई कौन है, जगत पिआसो जाय॥

d)

रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।

जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि॥

6.

मोती, मानुष, चून के संदर्भ में पानी के महत्व को स्पष्ट कीजिए।

a)

मोती-चमक

मानुष-इज़्ज़त

चून-खाद्य

b)

मोती-चमक

मानुष-खाद्य

चून-इज़्ज़त

c)

मोती-इज़्ज़त

मानुष-खाद्य

चून-चमक

d)

मोती-खाद्य

मानुष-चमक

चून-इज़्ज़त

7.

छोटा लग सकता है, लेकिन एक बड़ा मूल्य है।

जैसे....

a)

समुद्र

b)

दोहा

c)

बैग

d)

चश्मा

8.

चित्रकूट में कौन रेहता है

a)

इब्राहिम लोदी

b)

अशोका

c)

अवध- नरेस

d)

लक्ष्मण

9.

रहीम के दोहे किसने लिखा है?

a)

रैदास

b)

रहीम

c)

अरुण कमल

d)

रहिम

10.

कौन सा दोहा नीचे दिए गए के समान है?

धनि रहीम जल पंक को लघु जिय पियत अघाय।

उदधि बड़ाई कौन है, जगत पिआसो जाय॥

a)

बढ़ा भया तो का भया जैसे पेड़ खजूर।

पंथी को छाया नहीं, फल लगे अति दूर।।

b)

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,

जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।

c)

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

d)

साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय,

सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।