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श्रीराम लक्ष्मण परशुराम संवाद

Total questions: 22

Worksheet time: 11mins

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1.

नाथ संभुधनु भंज निहारा।। हो इ हि के उ एक दास तुम्हारा का अर्थ होगा

a)

भगवान श्रीराम परशुराम से कहते हैं_हे नाथ,भगवान शिव के धनुष को तोड़ने वाला तो आपका कोई दास ही होगा।

b)

शिव जी के धनुष को मैंने तोड़ा है।

c)

कोई दास आकर शिव जी के इस धनुष को तोड़ गया है।

d)

भगवान शिव के इस धनुष को मैंने नहीं बल्कि किसी दास ने तोड़ा है।

2.

आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाई बोले मुनि कोही का अर्थ होगा_

a)

श्रीराम की बात सुनकर परशुराम बोले_मेरे लिए क्या आज्ञा है

b)

परशुराम से श्रीराम जी बोले_आपकी क्या आज्ञा है,आप मुझसे क्यों नहीं कहते?ऐसे सुनते ही मुनि क्रोध से बोले__

c)

मुनि क्रोध में आकर बोले कि उनके लिए क्या आज्ञा है

d)

पहरेदारों ने परशुराम जी से क्रोध सहित ये बातें कहीं।

3.

सेवकु सो जो करे सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई। इस पंक्ति का अर्थ हो सकता है__

a)

परशुराम ने श्रीराम से कहा_सेवक वो होता है,जो सेवा का काम करे,पर जो शत्रुता का काम करे उसके साथ तो लड़ाई ही करनी पड़ती है।

b)

श्रीराम ने परशुराम से कहा_सेवक का काम सेवा है,दुश्मन का काम दुश्मनी करना।

c)

सेवक सेवा भी करे और दुश्मन से युद्ध भी करे।

d)

ये पंक्तियां सैनिकों ने परशुराम जी से कहीं थीं।

4.

सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा।सहसबाहु सम सो रिपु मोरा।

a)

जिसने भी इस शिव धनुष को तोड़ा है वह सहस्र बाहु के समान मेरा शत्रु है।

b)

सिवधनु और सहस्रबाहु दोनों मेरे शत्रु हैं

c)

श्रीराम ने कहा कि शिवधनुष की तरह सहस्रबाहु को भी तोड़ दूंगा।

d)

सैनिक जब परशुराम जी को पकड़कर ले जा रहे थे तब उन्होंने सैनिकों से कहा कि सहस्रबाहु के समान तुम सब भी मेरे शत्रु हो।

5.

सो बिलगाऊ बिहा समाजा।न त मारे जैहहिं सब राजा।

a)

जिसने भी शिवजी के धनुष को तोड़ा है उसका विवाह यही मेरे सामने कर दो।नहीं तो सब राजा अभी मारे जाएंगे।

b)

शिव धनुष को तोड़ने वाले को इस सभा से अलग कर दिया जाए नहीं तो सब राजा मारे जाएंगे।

c)

परशुराम जी कहते हैं कि अगर यहां कोई शादी विवाह हुआ तो मार काट मच जाएगी।

d)

श्रीराम जी ने कहा कि शिवजी के धनुष को तोड़ने वाले को तुरंत परशुराम जी के सामने प्रस्तुत किया जाए नहीं तो सब मारे जाएंगे।

6.

सुनि मुनि बचन लखन मुसकाने। बोले परशु धरहि आवमाने इस पंक्ति का अर्थ होगा

a)

मुनि के वचन सुनकर लक्ष्मण जी मुस्कुराने लगे फिर परशुराम बोले

b)

मुनि के वचन सुनकर लक्ष्मण जी मुस्कुराने लगे और फरसा धारण किए परशुराम जी से अपमानपूर्वक शब्द कहने लगे।

c)

लक्ष्मण जी के वचन सुनकर मुनि परशुराम मुस्कुराए और लक्ष्मण से अपमानपूर्वक शब्द कहने लगे

d)

परशुराम जी लक्ष्मण को देख कर हंसने लगे और फरसा पकड़कर खड़े हो गए।

7.

बहु धनुहीं तोरी लरिकाई। कब हूं न असि रिस कीनिह गोसाईं।। इस पंक्ति का अर्थ होगा__

a)

बहू ने बहुत सारी धनुषों को तोड़ा।तब आप कहां थे?

b)

लक्ष्मण ने परशुराम जी से कहा_ बचपन में हमने ऐसी कितनी छोटी_छोटी धनुहिया तोड़ी है,तब तो आपने ऐसा क्रोध नहीं किया

c)

बहुत से बड़े काम किए हमने तब भी हम पर बचपन में किसी ने ऐसा क्रोध नहीं किया

d)

परशुराम जी धनुष तोड़ना हमारा प्रिय काम है।आप हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।

8.

यही धनु पर ममता केहि हेतू।सुनि रिसाई कह भृगकुलकेतू।।

a)

लक्ष्मण ने परशुराम जी से कहा_इस धनुष पर आपकी इतनी ममता किसलिए है? यह सुनते ही परशुराम जी बहुत ज्यादा क्रोधित होकर बोले__

b)

परशुराम जी ने लक्ष्मण जी से कहा इस धनुष पर तुम्हारी विशेष ममता क्यों है,मेरी समझ में नहीं आता।

c)

किसी खानदान की बहू भी ऐसा कर सकती है

d)

कह नहीं सकते

9.

इस पाठ के रचयिता हैं

a)

रविदास जी

b)

तुलसीदास जी

c)

सूरदास जी

d)

कबीरदास जी।

10.

र नृपबालक कालबस बोलत तोहि न संभार। धनुही सम त्रिपुरारि धनु बिदित सकल संसार।।

a)

परशुराम जी क्रोधित होकर बोले_हे राजा के पुत्र,तुम काल के वश होने के कारण संभल कर नहीं बोल रहे हो।इस शिव धनुष को,जिसे तू छोटी सी धनुही के समान बता रहा है,इसकी महिमा के बारे में सारा संसार भली भांति जानता है।

b)

परशुराम जी क्रोधित होकर लक्ष्मण से कहते हैं कि मृत्यु के वश होने पर भी तुम हंसकर इस विश्व प्रसिद्ध छोटी धनुही को शिव धनुष कह रहे हो

c)

लक्ष्मण जी क्रोधित होकर परशुराम का अपमान करते हुए कहते हैं कि वो(परशुराम) इस विश्वप्रसिद्ध शिव धनुष को धनुही के समान बता रहे हो।

d)

सभा में उपस्थित सभी राजा महाराजा और ऋषि परशुराम से कहने लगे कि यह धनुष कोई शिव धनुष थोड़े ही ना है,यह तो कोई छोटी मोटी धनुष है।

11.

लखन कहा हसी हमरे जाना।सुनहू देव सब धनुष समाना।। का अर्थ होगा

a)

लक्ष्मण जी ने हंसते हुए सब से कहा_हमारी नजर में सब धनुष और देव एक समान हैं

b)

लक्ष्मण ने हंसते हुए परशुराम जी से कहा_हे देव हमारे लिए तो सभी धनुष एक समान हैं।

c)

लक्ष्मण जी ने हंसते हुए कहा कि सब देव और धनुष हमारे सामने कुछ नहीं है।

d)

लक्ष्मण जी ने परशुराम जी और सब राजाओं की ओर देखकर कहा कि सब धनुष और देव हमारे लिए एक समान हैं।

12.

का छ ति लाभू जून धनु तोरेे। देखा राम नयन के भोरें।।

a)

इस पुराने धनुष के टूट जाने से किसी का क्या लाभ और क्या हानि? श्रीराम जी ने इसे नया समझ कर छुआ और उनके छूते ही यह टूट गया,इसमें श्री रामचंद्र जी का कोई दोष नहीं है।

b)

कुछ क्षति और लाभ ही हुआ है इस धनुष को तोड़ने से। श्रीराम जी ने देखा और यह टूट गया।

c)

इस धनुष को श्रीराम जी ने देखा और टूट गया।इससे सबको बहुत हानि और लाभ हुआ है।

d)

कुछ समझ में नहीं आ रहा है।कौन से भाषा है यह।पढ़ नहीं पा रहे हैं तो अर्थ समझना तो दूर की बात है।

13.

छुअत टूट रघु पतिहु न दोसू।मुनि बिनु काज करि कत रोसू।।

a)

श्रीराम के छूते ही टूट गया यह पुराना धनुष।है परशुराम जी आप बिना कारण क्रोध कर रहे हैं।

b)

आप का क्रोध करना सही है।इस धनुष को तोड़ने में श्रीराम जी का दोष है।

c)

श्रीराम के छूने से पहले ही यह धनुष टूट गया था।आप आकारण ही इसके लिए श्रीराम को दोषी मान रहे हैं

d)

है परशुराम जी यह धनुष तो पहले से ही टूटा हुआ है।आप इस बात पर क्रोध करने की बजाय क्यों नहीं अपने काम से काम रखते।

14.

बोले चितै परसु की ओरा। र सठ सुनेही सुभाऊ न मोरा।।

a)

अपने फरसे की ओर देखते हुए परशुराम अति क्रोधित होकर बोले_हे दुष्ट ! तूने मेरे स्वभाव के बारे में नहीं सुना ।

b)

लक्ष्मण जी परशुराम जी के फरसे की ओर देखकर बोले _लगता है आपने मेरे फरसे के बारे में नहीं सुना

c)

परशुराम जी लक्ष्मण की ओर देखकर बोले मेरे इस चिते परशु की और देख।मै साठ साल से इस को लेकर तेरी ही खोज में भटक रहा था।

d)

राजाओं ने परशुराम जी की आरती की और कहा कि आप जैसे साठ वर्ष की आयु में किसी को ऐसे फरसा लिए हुए घूमते नहीं देखा।

15.

बालक बोलि बधौ नहि तोही।केवल मुनि जड़ जानही मोही।। इस पंक्ति का अर्थ होगा_

a)

मै तो तुम्हारा वध इसलिए नहीं कर रहा हूं,क्योंकि तुम वृद्ध हो।तुम मुझे केवल जड़ मुनि समझ रहे हो।

b)

परशुराम जी। लक्ष्मण से कहते हैं_मै तो बालक समझ कर तुम्हारा वध नहीं कर रहा हूं और तुम मुझे मूर्ख मुनि समझ रहे हो।

c)

मै तुम्हे बालक कहकर संबोधित करता हूं,तुम मुझे केवल जड़ मुनि कहो।इसी में हम दोनों का कल्याण है।

d)

परशुराम जी कहते हैं लक्ष्मण से कि में बालक समझ कर तुम्हारा वध करना चाहता था पर अब क्षमा चाहता हूं।तुम भी मुझे मूर्ख मुनि समझ कर क्षमा कर दो।

16.

बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वाबिदित क्षत्रिय कुल द्रोही।।

a)

परशुराम जी लक्ष्मण से कहते हैं कि मुझे पता है लक्ष्मण तुम बाल ब्रह्मचारी नहीं हो पर तुम्हारा स्वभाव क्रोध वाला अवश्य है।इसके बावजूद भी तुम क्षत्रिय कुल के दुश्मन नहीं हो,यह भी सच है।

b)

परशुराम जी लक्ष्मण जी से कहते हैं कि बाल ब्रह्मचारी होने के साथ ही मै अति क्रोधित स्वभाव का भी हूं।सारा विश्व इस बात को जानता हैं कि मै क्षत्रिय कुल का नाश करने वाला हूं।

c)

मै बचपन से ब्रह्मचारी हूं।पर क्रोधित स्वभाव का नहीं।सारा संसार जानता है कि मैंने हमेशा क्षत्रिय कुल को विनाश से बचाया है।

d)

मै ऐसा ब्रह्मचारी हूं जो बचपन में ब्रह्मचारी ना बन पाया।पर सारा संसार मुझे बचपन से ही ब्रह्मचारी मानता है।

17.

भुजबल भूमि भूप बिनु किन्हीं। बिपुल बार महि देवन्ह दिनहीं।। इस पंक्ति का सही अर्थ चुनिए_

a)

परशुराम जी कहते हैं लक्ष्मण जी से कि अपनी भुजाओं के बल से इस धरती को राजाओं से रहित कर दिया है। इस धरती को कई बार महि नामक देव को दे दिया है

b)

परशुराम जी लक्ष्मण जी से कहते हैं कि अपनी भुजाओं के बल से अनेक बार इस पृथ्वी को राजाओं से खाली कर ब्राह्मणों को दान में दे दी है।

c)

लक्ष्मण जी खुद परशुराम जी से कहते हैं कि शायद आपको पता नहीं कि हमने खुद सब राजाओं को आप से बहुत पहले हरा कर इस पूरी पृथ्वी को ब्राह्मणों को बांट दिया है।

d)

लक्ष्मण जी और परशुराम जी ने एक दूसरे को अपनी विशेषता बताई है।

18.

सहस बाहु भुज छेदनिहारा। परसू बिलोकु महीपकुमारा।। इन पंक्तियों का अर्थ होगा__

a)

हे राजकुमार_मेरे इस फरसे को देख,इसने तो सहस्र बाहु की भुजाओं को भी काट कर फेंक दिया है।

b)

सहस्र बाहु की भुजाओं को काटा है मेरे इस फरसे ने विश्वास नहीं होता तो परसों आकर इसका चमत्कार देख लेना।

c)

परशुराम जी लक्ष्मण जी से कहते हैं हजार भुजाएं काटने वाले मेरे इस फरसे को देखकर किसी बिल में छुप जा हे राजा के कुमार।

d)

कह नहीं सकते कि इन पंकतियों में कौन किससे क्या कह रहा है।

19.

मातु पिताही जनि सोचबस करसी महीस किसोर। गरभन्नह के अर्भक दलन परसू मोर अति घोर।। इन पंक्तियों का अर्थ होगा_

a)

परशुराम जी लक्ष्मण से कहते हैं_हे राजकुमार! तू मुझसे लड़ाई मोल लेकर अपने माता पिता के लिए सोच और चिंता का कारण मत बन।मेरा फरसा बहुत कठोर है,यह तो गर्भ में पल रहे बच्चों को भी मारने की सामर्थ्य रखता है।

b)

परशुराम जी कहते हैं कि मैंने तो अपने इस फरसे से गर्भ में पल रहे शिशुओं तक को नष्ट कर दिया है। हे लक्ष्मण मुझसे लड़ाई मोल लेकर क्यों अपने माता पिता को सोच और चिंता में डाल रहे हो।

c)

परशुराम जी कहते हैं कि मेरे इस फरसे ,से जिसने गर्भों तक का नाश कर दिया है, डरो और अपने माता पिता को सोच और चिंता में मत डालो।

d)

दिए गए सारे अर्थ सही हैं।हम सभी अर्थों से सहमत हैं।

20.

श्रीराम लक्ष्मण परशुराम संवाद श्रीरामचितमानस के किस कांड लिया गया है।

a)

अयोध्या काण्ड

b)

अरण्य काण्ड

c)

बालकाण्ड

d)

उत्तर काण्ड

21.

बिहसि लखनु बोले मृदु बानी।अहो मुनिसु महाभट मानी।। इसका अर्थ पढ़िए और सही अर्थ चुनकर प्रश्नों का जवाब दीजिए।

1-परशुराम जी की बात सुनकर लक्ष्मण जी हंसते हुए विनम्र वाणी में बोले_मान गया मुनिवर आप महान योद्धा हैं।

2-परशुराम जी की बातों को सुनकर लक्ष्मण जी उन्हें महान योद्धा मान रहे हैं।

a)

उपर्युक्त अर्थों में से केवल पहला अर्थ ही सही है।

b)

केवल दूसरा अर्थ ही सही है।

c)

दोनों अर्थ गलत हैं।

d)

कुछ नहीं कहा जा सकता है।

22.

छुअत टूट रघु पतिहु न दोसू।मुनि बिनु काज करि कत रोसू।।

a)

श्रीराम के छूते ही टूट गया यह पुराना धनुष।है परशुराम जी आप बिना कारण क्रोध कर रहे हैं।

b)

आप का क्रोध करना सही है।इस धनुष को तोड़ने में श्रीराम जी का दोष है।

c)

श्रीराम के छूने से पहले ही यह धनुष टूट गया था।आप आकारण ही इसके लिए श्रीराम को दोषी मान रहे हैं

d)

है परशुराम जी यह धनुष तो पहले से ही टूटा हुआ है।आप इस बात पर क्रोध करने की बजाय क्यों नहीं अपने काम से काम रखते।