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Worksheetsआत्मपरिचय
Total questions: 22
Worksheet time: 11mins
आत्मपरिचय का सर्वाधिक सही अर्थ है -
स्वयं का परिचय
आत्मज्ञान
आत्मसाक्षात्कार
आत्मपरिचय कविता के कवि हैं -
भवानीप्रसाद मिश्र
हरिवंशराय बच्चन
जयशंकर प्रसाद
निम्न में कौन सी रचना बच्चनजी की है -
युगांत
आँसू
मधुशाला
बच्चनजी किस वाद के अग्रणी कवि हैं
प्रयोगवाद
हालावाद
छायावाद
कवि किसका भार लिए फिरता है ?
जग जीवन का
प्रेम का
अपनी बीती स्मृतियों का
स्नेह - सुरा में कौन सा अलंकार है ?
उपमा
उत्प्रेक्षा
रूपक
उन्मादों में अवसाद का क्या आशय है ?
उमंग में प्रेम की उदासी या दुःख
पागलपन और दुख
उतावलेपन के कारण उत्पन्न दुःख
जग पूछ रहा उनको जो जग की गाते ' पंक्ति में जग किसको पूछता है ?
जो दूसरो की निंदा करते हैं |
जो दूसरों की चापलूसी करते हैं
जो दूसरों की प्रशंसा करते हैं
है यह अपूर्ण संसार न मुझको भाता - कवि को यह संसार अधूरा लगता है क्योकि
यहाँ के लोग स्वार्थी हैं
प्रेम की कमी है |
लोग केवल धन के पीछे भाग रहे हैं
निज उर के उपहार का आशय है -
कवि के ह्रदय की ख़ुशी
कवि के जीवन का दुःख
कवि की प्रेरणा
कवि के अनुसार नादान कौन है -
जो जीवन सत्य को नहीं जानते |
जो चतुर हैं |
जो सुख में बहुत प्रसन्न होते हैं |
मैं और, और जग और, कहाँ का नाता' का आशय है -
मेरा और संसार का संबंध टकराहट से भरा है |
मेरे और संसार के बीच प्रेमपूर्ण संबंध है |
मेरे और संसार के बीच काल्पनिक संबंध है |
जिस पृथ्वी पर संसार वैभव जोड़ा करता है कवि ऐसी पृथ्वी को
पैरों से ठुकराता है
नमन करता है |
आभार व्यक्त करता है
रोदन में राग’ और ‘शीतल वाणी में आग’ में कौन सा अलंकार है ?
रूपक
विरोधाभास
अतिश्योक्ति
शीतल वाणी में आग - से आशय है -
कवि की वाणी शीतल है पर शब्दों में संसार की विसंगतियों को जला डालने की क्षमता है |
कवि की वाणी कोमल है जो आग से शीतल हो गई है |
कवि आग के डर से हमेशा कोमल शब्दों का प्रयोग करता है
प्रासाद शब्द का अर्थ है-
अच्छे कर्मो का फल
भगवान् का प्रसाद
महल
ब वह विरह की पीड़ा के कारण रोने लगता है तो संसार उसे क्या समझता है ?
कवि बहुत दुखी है |
कवि गीत गा रहा है |
कवि निराश है |
आत्मपरिचय कविता की भाषा है -
ब्रज
खड़ी बोली
अवधी
कवि स्वयं को क्या कहलवाना पसंद करता हैं
कवि
दीवाना
सांसारिक व्यक्ति
कवि संसार को क्या संदेश देता हैं?
आशावादिता का
भाईचारे का
मस्ती का
बच्चनजी किस वाद के अग्रणी कवि हैं
प्रयोगवाद
हालावाद
छायावाद
बच्चनजी किस वाद के अग्रणी कवि हैं
प्रयोगवाद
हालावाद
छायावाद
