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Worksheetsजैनेंद्र कुमार -बाजार दर्शन
Total questions: 15
Worksheet time: 8mins
जैनेंद्र कुमार कैसे उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध हैं ?
साहित्यिक
मनोवैज्ञानिक
राजनीतिक
आर्थिक
बाजार दर्शन में जैनेंद्र कुमार ने अर्थशास्त्र को क्या कहा है ?
न्याय शास्त्र
राजनीति शास्त्र
अनीति शास्त्र
उपरोक्त में से कुछ भी नहीं
निबंध में स्त्री को किसका प्रतीक बताया गया है ?
माया का
मोह का
न्याय का
अन्याय का
कायल शब्द का अर्थ क्या होता है ?
विरोधी
समर्थक
प्रशंसक
उपरोक्त में से कुछ भी नहीं
बाजार को शैतान का जाल क्यों कहा है ?
क्योंकि यह सब के साथ दुर्व्यवहार करता है l
क्योंकि वहां जाने पर पैसा खर्च हो जाता है l
क्योंकि यह लोगों को अपने लोभ में फंसा लेता है l
उपरोक्त सभी l
बाजार का जादू कब चलता है ?
जेब भरी और मन खाली हो l
मन भरा और जेब खाली हो l
जेब और मन दोनों भरे हो l
जेब और मन दोनों खाली हो l
बाजार का बाजारूपन कब व्यर्थ हो जाता है ?
जब मन में लक्ष्य न हो l
जब मन में लक्ष्य हो l
जब जेब में पैसा हो l
जब जेब में पैसा न हो l
मन खाली होने से क्या तात्पर्य है ?
मन में विषय विकार न होना l
मन में कोई लक्ष्य न होना l
मन में चंचलता न होना l
मन में शुद्धता न होना l
बाजार की सार्थकता किसमें हैं ?
आवश्यकता के समय काम न आना l
आवश्यकता के समय बाजार न खुलना l
आवश्यकता के समय काम आना l
उपरोक्त में से कुछ भी नहीं l
मन के बंद हो जाने से क्या तात्पर्य है ?
मन का भरा होना l
मन का खाली होना l
मन का शून्य हो जाना l
उपरोक्त सभी l
बाजार को सार्थकता कौन सा मनुष्य देता है ?
जो नहीं जानता कि उसे क्या चाहिए l
जो कुछ भी खरीद लेता है l
जो कुछ भी नहीं खरीदता l
जो जानता है कि वह क्या चाहता है l
अर्थशास्त्र को अनीति शास्त्र क्यों कहा गया है ?
क्योंकि यह विक्रेता और ग्राहक के बीच के बीच के सद्भाव को घटाता है l
ग्राहक और विक्रेता दोनों एक दूसरे को ठगने की फिराक में रहते हैं l
ग्राहक का शोषण होने लगता है l
उपरोक्त सभी l
बाजार का जादू चढ़ने पर व्यक्ति क्या करता है ?
अनावश्यक चीजें खरीद लाता है l
अनावश्यक पैसा खर्च करता है l
पैसे की शक्ति का प्रदर्शन करना चाहता है l
उपरोक्त सभी l
लू का लूपन व्यर्थ हो जाता है ?
जब शरीर में पानी न हो l
जब शरीर में पानी हो l
जब चारों ओर ठंडक हो l
उपरोक्त में से कुछ भी नहीं l
सच्चा कर्म किसके साथ होता है ?
पूर्णता की स्वीकृति के साथ l
अपूर्णता की स्वीकृति के साथ l
ज्ञानी मनुष्यों के साथ l
अज्ञानी मनुष्यों के साथ l
