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Research aptitute

Total questions: 14

Worksheet time: 28mins

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1.

50 मदो की संख्यात्मक योग्यता जाँच की क्रोनबेक अल्फा .80 है। यदि इस जाँच को समान लंबाई के दो आधे भागो में यादृच्छिक रूप से विभाजित किया जाता, तो इन दो भागों के बीच संभावित सहसंबंध क्या होगा?

a)

.40

b)

.56

c)

.67

d)

.80

2.

प्रश्न संख्या 46 से 50 के लिए निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए : सामान्यत : अनुसंधान प्रक्रिया की शुरूआत अनुसंधान समस्या की पहचान और निरूपण से होती है । समस्या की पहचान के पश्चात् उपयुक्त परिकल्पनाएँ विकसित की जाती हैं । ये परिकल्पनाएँ उस समस्या का अस्थायी समाधान होती हैं और दो और इससे अधिक चरों के बीच संबंध के अनुमानित विवरणों को प्रस्तुत करती हैं । परिकल्पनाओं को विभिन्न तरीकों से वर्गीकृत किया जा सकता है , यथा दिशासूचक बनाम गैर - दिशासूचक , सहसंबंधी बनाम कारणात्मक आदि । एडवर्ड ने मनोवैज्ञानिक अनुसंधान में चरों को उद्दीपक चरों , प्राणीय चरों और व्यवहारिक चरों के रूप में वर्गीकृत किया । चरों को सतत चरों और अससत चरों के रूप में वर्गीकृत किया गया है । असतत चरों के दो प्रकार हैं - वास्तविक अससत चर और कृत्रिम असंतत चर । अनुसंधान में चरों को उपयुक्त रूप से ऑपरेशनलाइज करने की आवश्यकता होती है । रॉबिन्सन ने मनोवैज्ञानिक अध्ययन को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया - प्रयोगशाला प्रयोग , क्षेत्र प्रयोग , एक्स - पोस्ट फेक्टो क्षेत्र अध्ययन और प्रयोग का एक्स - पोस्ट फेक्टो विश्लेषण ( अल्प आशोधित ) । चौथी श्रेणी को कम मान्यता मिली किंतु यह विज्ञान के विकास के लिए अनिवार्य है । 46. निम्नलिखित परिकल्पना / परिकल्पनाओं में से कौन सी अनिदेशित ( गैर - दिशासूचक ) परिकल्पनाएँ हैं ? 1 . दुश्चिता के संबंध में पुरुष और महिला में अंतर होता है । बुद्धि और शैक्षिक उपलब्धि नकारात्मक रूप से संबंधित है । दुश्चिता छात्रों के शैक्षिक कार्य निष्पादन में बाधा उत्पन्न करती है । 4 . दबाव और कार्य उत्पादन एक - दूसरे से जुड़े हुए हैं ।

a)

( A ) केवल 2

b)

( B ) केवल 1 और 3

c)

( C ) केवल 3 और 4

d)

( D ) केवल 1 और 4

3.

निम्न गद्यांश को पढ़िए और पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए : सामान्यत : अनुसंधान प्रक्रिया की शुरूआत अनुसंधान समस्या की पहचान और निरूपण से होती है । समस्या की पहचान के पश्चात् उपयुक्त परिकल्पनाएँ विकसित की जाती हैं । ये परिकल्पनाएँ उस समस्या का अस्थायी समाधान होती हैं और दो और इससे अधिक चरों के बीच संबंध के अनुमानित विवरणों को प्रस्तुत करती हैं । परिकल्पनाओं को विभिन्न तरीकों से वर्गीकृत किया जा सकता है , यथा दिशासूचक बनाम गैर - दिशासूचक , सहसंबंधी बनाम कारणात्मक आदि । एडवर्ड ने मनोवैज्ञानिक अनुसंधान में चरों को उद्दीपक चरों , प्राणीय चरों और व्यवहारिक चरों के रूप में वर्गीकृत किया । चरों को सतत चरों और अससत चरों के रूप में वर्गीकृत किया गया है । असतत चरों के दो प्रकार हैं - वास्तविक अससत चर और कृत्रिम असंतत चर । अनुसंधान में चरों को उपयुक्त रूप से ऑपरेशनलाइज करने की आवश्यकता होती है । रॉबिन्सन ने मनोवैज्ञानिक अध्ययन को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया - प्रयोगशाला प्रयोग , क्षेत्र प्रयोग , एक्स - पोस्ट फेक्टो क्षेत्र अध्ययन और प्रयोग का एक्स - पोस्ट फेक्टो विश्लेषण ( अल्प आशोधित ) । चौथी श्रेणी को कम मान्यता मिली किंतु यह विज्ञान के विकास के लिए अनिवार्य है ।


(2) निम्नलिखित में से कौन - सा कृत्रिम असतत प्राणीय चर का एक उदाहरण है ?

a)

( A ) सफल या असफल रूप में

b)

( B ) राष्ट्रीयता

c)

( C )परीक्षा परिणाम छात्रों का निम्न , औसत और उच्च मेधावी के रूप में वर्गीकरण

d)

( D ) लिंग

4.

निम्न गद्यांश को पढ़िए और पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए : सामान्यत : अनुसंधान प्रक्रिया की शुरूआत अनुसंधान समस्या की पहचान और निरूपण से होती है । समस्या की पहचान के पश्चात् उपयुक्त परिकल्पनाएँ विकसित की जाती हैं । ये परिकल्पनाएँ उस समस्या का अस्थायी समाधान होती हैं और दो और इससे अधिक चरों के बीच संबंध के अनुमानित विवरणों को प्रस्तुत करती हैं । परिकल्पनाओं को विभिन्न तरीकों से वर्गीकृत किया जा सकता है , यथा दिशासूचक बनाम गैर - दिशासूचक , सहसंबंधी बनाम कारणात्मक आदि । एडवर्ड ने मनोवैज्ञानिक अनुसंधान में चरों को उद्दीपक चरों , प्राणीय चरों और व्यवहारिक चरों के रूप में वर्गीकृत किया । चरों को सतत चरों और अससत चरों के रूप में वर्गीकृत किया गया है । असतत चरों के दो प्रकार हैं - वास्तविक अससत चर और कृत्रिम असंतत चर । अनुसंधान में चरों को उपयुक्त रूप से ऑपरेशनलाइज करने की आवश्यकता होती है । रॉबिन्सन ने मनोवैज्ञानिक अध्ययन को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया - प्रयोगशाला प्रयोग , क्षेत्र प्रयोग , एक्स - पोस्ट फेक्टो क्षेत्र अध्ययन और प्रयोग का एक्स - पोस्ट फेक्टो विश्लेषण ( अल्प आशोधित ) । चौथी श्रेणी को कम मान्यता मिली किंतु यह विज्ञान के विकास के लिए अनिवार्य है ।


( 3 ) निम्नलिखित में से किसे मनोवैज्ञानिक प्रयोग में आश्रित चर के रूप में नहीं प्रयोग किया जा सकता है ?

(1) हृदय गति (2) अधिगम दर

(3) प्रतिक्रिया काल (4) आयु

a)

( A ) केवल 4

b)

( B ) केवल 1 और 2

c)

( C ) केवल 3 और 4

d)

( D ) केवल 1.2 और 4

5.

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए आर पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए : सामान्यत : अनुसंधान प्रक्रिया की शुरूआत अनुसंधान समस्या की पहचान और निरूपण से होती है । समस्या की पहचान के पश्चात् उपयुक्त परिकल्पनाएं विकसित की जाती हैं । ये परिकल्पनाएँ उस समस्या का अस्थायी समाधान होती हैं और दो और इससे अधिक चरों के बीच संबंध के अनुमानित विवरणों को प्रस्तुत करती हैं । परिकल्पनाओं को बिभिन्न तरीकों से वर्गीकृत किया जा सकता है , यथा दिशासूचक बनाम गैर - दिशासूचक , सहसंबंधी बनाम कारणात्मक आदि । चरों को सतत चरों और अससत चरों रूप में वर्गीकृत किया गया है । असतत चरों के दो प्रकार हैं - वास्तविक अससत चर और कृत्रिम असंतत चर । अनुसंधान में चरों को उपयुक्त रूप से ऑपरेशनलाइज करने की आवश्यकता होती है । रॉबिन्सन ने मनोवैज्ञानिक अध्ययन को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया - प्रयोगशाला प्रयोग , क्षेत्र प्रयोग , एक्स - पोस्ट फेक्टो क्षेत्र अध्ययन और प्रयोग का एक्स - पोस्ट फेक्टो विश्लेषण ( अल्प आशोधित ) । चौथी श्रेणी को कम मान्यता मिली किंतु यह विज्ञान के विकास के लिए अनिवार्य है ।

( 4 ) गौण प्रसरण को नियंत्रित करने की अनुसंधानकर्ताओं की क्षमता ( सामान्यतः ) के संदर्भ में निम्नलिखित तीन प्रकार की जाँचों को बढ़ते क्रम में लगाएँ :

1 . प्रयोगशाला प्रयोग

2 . क्षेत्र प्रयोग

3 . एक्स पोस्ट फेस्टो क्षेत्र अध्ययन

a)

A ) 3 , 1 , 2

b)

( B ) 1 , 2 , 3

c)

( C ) 3.2.1

d)

( D ) 2.3.1

6.

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए आर पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए : सामान्यत : अनुसंधान प्रक्रिया की शुरूआत अनुसंधान समस्या की पहचान और निरूपण से होती है । समस्या की पहचान के पश्चात् उपयुक्त परिकल्पनाएं विकसित की जाती हैं । ये परिकल्पनाएँ उस समस्या का अस्थायी समाधान होती हैं और दो और इससे अधिक चरों के बीच संबंध के अनुमानित विवरणों को प्रस्तुत करती हैं । परिकल्पनाओं को बिभिन्न तरीकों से वर्गीकृत किया जा सकता है , यथा दिशासूचक बनाम गैर - दिशासूचक , सहसंबंधी बनाम कारणात्मक आदि । चरों को सतत चरों और अससत चरों रूप में वर्गीकृत किया गया है । असतत चरों के दो प्रकार हैं - वास्तविक अससत चर और कृत्रिम असंतत चर । अनुसंधान में चरों को उपयुक्त रूप से ऑपरेशनलाइज करने की आवश्यकता होती है । रॉबिन्सन ने मनोवैज्ञानिक अध्ययन को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया - प्रयोगशाला प्रयोग , क्षेत्र प्रयोग , एक्स - पोस्ट फेक्टो क्षेत्र अध्ययन और प्रयोग का एक्स - पोस्ट फेक्टो विश्लेषण ( अल्प आशोधित ) । चौथी श्रेणी को कम मान्यता मिली किंतु यह विज्ञान के विकास के लिए अनिवार्य है ।


( 5 ) विनाशकारी भूकंप के पश्चात् अनुसंधानकर्ता ने यह समझने के लिए लोगों के एक समूह का साक्षात्कार लिया कि क्या भूकंप के कारण भाग्य के प्रति उनकी अभिवृत्ति में बदलाव आया है । इसे निम्नलिखित में से किस एक का सबसे अच्छा उदाहरण माना जा सकता है ?

a)

( A ) एक्स पोस्ट फेक्टो क्षेत्र अध्ययन

b)

( B ) क्षेत्र प्रयोग

c)

( C ) अभिवृत्ति परिवर्तन प्रयोग

d)

( D ) जैववासिकीय अध्ययन

7.

निम्नलिखित परिच्छेद पढ़िए और नीचे दिए पाँच प्रश्नों का उत्तर दीजिए : व्यक्तित्व एवं मनोमिति में शोधकर्ता ने , मानवीय विशेषताओं की सम्पूर्ण छान - बीन के पश्चात् , अस्सी व्यक्तित्व मापनियां ( स्केल्स ) पाईं जो शायद मानवीय व्यक्तित्व का समग्र विवरण प्रदान करेगा । उसने इन मापनियों को काफी बड़े प्रतिदर्श में प्रयुक्त की ( N 1000 ) और अस्सी मापनियों के बीच अंतः सहसम्बन्ध प्राप्त किए । शोधकर्ता इन मापनियों का कारक - विश्लेषण करना चाहता है । 80 x 80 सहसम्बन्ध मैट्रिक्स के विकर्णी स्थानों में यूनिटीस रखते हुए , अचूर्णित कारक निकाल लिये गये । घूर्णन के लिए कारकों की संख्या का फैसला करने के लिए विभिन्न मानदंडों का उपयोग करके , पन्द्रह कारक प्रतिधारित किए । इन पन्द्रह कारकों ने कुल प्रसरण में 70 % की व्याख्या की । यह पन्द्रह कारक उपयुक्त विधि की सहायता से घूर्णित किये गये और परिणमित अंतः सहसम्बन्ध मैट्रिक्स की जाँच की गई । कुछ अंतः सहसम्बन्ध काफी उच्च थे । फिर द्वितीय कोटि का कारक विश्लेषण किया गया जिसके फलस्वरूप पाँच लगभग लंबकोणीय कारकों की लब्धि हुई ।


(1) 80 x 80 सहसम्बन्ध मैट्रिक्स का कारक विश्लेषण करते समय , निम्नलिखित चार कारक निष्कर्षण विधियों में से किसका उपर्युक्त कार्य में विनियोजन किया गया होगा ?

a)

( A ) न्यूनतम वर्ग विधि

b)

( B ) पुष्टिकारक कारक - विश्लेषण विधि

c)

( C ) प्रिन्सिपल अॅक्सेस विधि

d)

( D ) प्रिन्सिपल कांपोनंट्स विधि

8.

निम्नलिखित परिच्छेद पढ़िए और नीचे दिए पाँच प्रश्नों का उत्तर दीजिए : व्यक्तित्व एवं मनोमिति में शोधकर्ता ने , मानवीय विशेषताओं की सम्पूर्ण छान - बीन के पश्चात् , अस्सी व्यक्तित्व मापनियां ( स्केल्स ) पाईं जो शायद मानवीय व्यक्तित्व का समग्र विवरण प्रदान करेगा । उसने इन मापनियों को काफी बड़े प्रतिदर्श में प्रयुक्त की ( N 1000 ) और अस्सी मापनियों के बीच अंतः सहसम्बन्ध प्राप्त किए । शोधकर्ता इन मापनियों का कारक - विश्लेषण करना चाहता है । 80 x 80 सहसम्बन्ध मैट्रिक्स के विकर्णी स्थानों में यूनिटीस रखते हुए , अचूर्णित कारक निकाल लिये गये । घूर्णन के लिए कारकों की संख्या का फैसला करने के लिए विभिन्न मानदंडों का उपयोग करके , पन्द्रह कारक प्रतिधारित किए । इन पन्द्रह कारकों ने कुल प्रसरण में 70 % की व्याख्या की । यह पन्द्रह कारक उपयुक्त विधि की सहायता से घूर्णित किये गये और परिणमित अंतः सहसम्बन्ध मैट्रिक्स की जाँच की गई । कुछ अंतः सहसम्बन्ध काफी उच्च थे । फिर द्वितीय कोटि का कारक विश्लेषण किया गया जिसके फलस्वरूप पाँच लगभग लंबकोणीय कारकों की लब्धि हुई ।


( 2 ) घूर्णन के लिए कारकों की संख्या का निर्णय करते समय मापदंड निम्नलिखित में से क्या नहीं है ?

a)

( A ) कैटल स्क्री

b)

( B ) गुटमान का रूट > 1 मानदंड

c)

( C ) कारक हल द्वारा स्पष्ट कुल प्रसरण का प्रतिशत

d)

( D ) विल्क का मानदंड

9.

निम्नलिखित परिच्छेद पढ़िए और नीचे दिए पाँच प्रश्नों का उत्तर दीजिए : व्यक्तित्व एवं मनोमिति में शोधकर्ता ने , मानवीय विशेषताओं की सम्पूर्ण छान - बीन के पश्चात् , अस्सी व्यक्तित्व मापनियां ( स्केल्स ) पाईं जो शायद मानवीय व्यक्तित्व का समग्र विवरण प्रदान करेगा । उसने इन मापनियों को काफी बड़े प्रतिदर्श में प्रयुक्त की ( N 1000 ) और अस्सी मापनियों के बीच अंतः सहसम्बन्ध प्राप्त किए । शोधकर्ता इन मापनियों का कारक - विश्लेषण करना चाहता है । 80 x 80 सहसम्बन्ध मैट्रिक्स के विकर्णी स्थानों में यूनिटीस रखते हुए , अचूर्णित कारक निकाल लिये गये । घूर्णन के लिए कारकों की संख्या का फैसला करने के लिए विभिन्न मानदंडों का उपयोग करके , पन्द्रह कारक प्रतिधारित किए । इन पन्द्रह कारकों ने कुल प्रसरण में 70 % की व्याख्या की । यह पन्द्रह कारक उपयुक्त विधि की सहायता से घूर्णित किये गये और परिणमित अंतः सहसम्बन्ध मैट्रिक्स की जाँच की गई । कुछ अंतः सहसम्बन्ध काफी उच्च थे । फिर द्वितीय कोटि का कारक विश्लेषण किया गया जिसके फलस्वरूप पाँच लगभग लंबकोणीय कारकों की लब्धि हुई । 46 . 80 x 80 सहसम्बन्ध मैट्रिक्स का कारक विश्लेषण करते समय , निम्नलिखित चार कारक निष्कर्षण विधियों में से किसका उपर्युक्त कार्य में विनियोजन किया गया होगा ?


( 3 ) निम्नलिखित चार कारक – घूर्णन विधियों में से कौनसी विधि / विधियां उपर्युक्त बताए परिणाम प्रदान कर सकता / सकते है / हैं ?

1 . ऑब्लिमिन घूर्णन

2 . वैरीमैक्स घूर्णन

3 . प्रोमैक्स घूर्णन

4 . क्वार्टिमैक्स घूर्णन

a)

( A ) सिर्फ 1 और 2

b)

( B ) सिर्फ 1 और 3

c)

( C ) सिर्फ 2 और 3

d)

( D ) सिर्फ 2 और 4

10.

निम्नलिखित परिच्छेद पढ़िए और नीचे दिए पाँच प्रश्नों का उत्तर दीजिए : व्यक्तित्व एवं मनोमिति में शोधकर्ता ने , मानवीय विशेषताओं की सम्पूर्ण छान - बीन के पश्चात् , अस्सी व्यक्तित्व मापनियां ( स्केल्स ) पाईं जो शायद मानवीय व्यक्तित्व का समग्र विवरण प्रदान करेगा । उसने इन मापनियों को काफी बड़े प्रतिदर्श में प्रयुक्त की ( N 1000 ) और अस्सी मापनियों के बीच अंतः सहसम्बन्ध प्राप्त किए । शोधकर्ता इन मापनियों का कारक - विश्लेषण करना चाहता है । 80 x 80 सहसम्बन्ध मैट्रिक्स के विकर्णी स्थानों में यूनिटीस रखते हुए , अचूर्णित कारक निकाल लिये गये । घूर्णन के लिए कारकों की संख्या का फैसला करने के लिए विभिन्न मानदंडों का उपयोग करके , पन्द्रह कारक प्रतिधारित किए । इन पन्द्रह कारकों ने कुल प्रसरण में 70 % की व्याख्या की । यह पन्द्रह कारक उपयुक्त विधि की सहायता से घूर्णित किये गये और परिणमित अंतः सहसम्बन्ध मैट्रिक्स की जाँच की गई । कुछ अंतः सहसम्बन्ध काफी उच्च थे । फिर द्वितीय कोटि का कारक विश्लेषण किया गया जिसके फलस्वरूप पाँच लगभग लंबकोणीय कारकों की लब्धि हुई । 46 . 80 x 80 सहसम्बन्ध मैट्रिक्स का कारक विश्लेषण करते समय , निम्नलिखित चार कारक निष्कर्षण विधियों में से किसका उपर्युक्त कार्य में विनियोजन किया गया होगा ?


( 4 ) द्वितीय - कोटि का कारक विश्लेषण करने के लिए निम्नलिखित में से कौनसी स्थिति स्थितियां आवश्यक है हैं ?


1 . यह परिकल्पना की गई है कि लंबकोणीय द्वितीय - कोटि के कारक कम हैं ।


2 . प्रथम - कोटि के कारकों को तिरछे घूर्णन करना चाहिए ।


3 . कम से कम कुछ अंतःकारक सहसम्बन्धों को काफी उच्च होना चाहिए ।

a)

( A ) सिर्फ 1 और 2

b)

( B ) सिर्फ 1 और 3

c)

( C ) सिर्फ 2 और 3

d)

( D ) 1 , 2 और 3

11.

निम्नलिखित परिच्छेद पढ़िए और नीचे दिए पाँच प्रश्नों का उत्तर दीजिए : व्यक्तित्व एवं मनोमिति में शोधकर्ता ने , मानवीय विशेषताओं की सम्पूर्ण छान - बीन के पश्चात् , अस्सी व्यक्तित्व मापनियां ( स्केल्स ) पाईं जो शायद मानवीय व्यक्तित्व का समग्र विवरण प्रदान करेगा । उसने इन मापनियों को काफी बड़े प्रतिदर्श में प्रयुक्त की ( N 1000 ) और अस्सी मापनियों के बीच अंतः सहसम्बन्ध प्राप्त किए । शोधकर्ता इन मापनियों का कारक - विश्लेषण करना चाहता है । 80 x 80 सहसम्बन्ध मैट्रिक्स के विकर्णी स्थानों में यूनिटीस रखते हुए , अचूर्णित कारक निकाल लिये गये । घूर्णन के लिए कारकों की संख्या का फैसला करने के लिए विभिन्न मानदंडों का उपयोग करके , पन्द्रह कारक प्रतिधारित किए । इन पन्द्रह कारकों ने कुल प्रसरण में 70 % की व्याख्या की । यह पन्द्रह कारक उपयुक्त विधि की सहायता से घूर्णित किये गये और परिणमित अंतः सहसम्बन्ध मैट्रिक्स की जाँच की गई । कुछ अंतः सहसम्बन्ध काफी उच्च थे । फिर द्वितीय कोटि का कारक विश्लेषण किया गया जिसके फलस्वरूप पाँच लगभग लंबकोणीय कारकों की लब्धि हुई ।


( 5 ) दो कारकों को ‘ ऑर्थोगोनल ' कहा जाता है , जब दो कारकों के बीच पृथक्कता का कोण निम्नलिखित होता है :

a)

( A ) 90 डिग्री

b)

( B ) 90 डिग्री से कम

c)

( C ) 90 डिग्री से अधिक

d)

( D ) शून्य और 180 डिग्री के बीच में

12.

सूची - I को सूची – II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए कूटों से सही उत्तर का चयन करें :

सूची- I सूची - II

p . फाई - गुणांक 1. एक चर का

अन्य चरों के

समुच्चय के

साथ

सहसम्बन्ध


q . स्पियरमैन रो 2. युग्मभुजी

चर और

सतत चर के

बीच

सहसम्बन्ध


r. आंशिक चर 3. क्रमसूचक

मापनी पर

मापे

सहसम्बन्ध

गए या उसमें

रूपान्तरित

दो चरों के

बीच

सहसम्बन्ध


S. बिन्दु 4. बाहरी चर /

चरों के प्रभाव

द्विपंक्तिक

को हटाने के

बाद दो चरों

सहसम्बन्ध

के बीच

सहसम्बन्ध


5. दो युग्मभुजी

चरों के बीच

सहसम्बन्ध


कूट :

P q r S

a)

( A ) 5 3 4 2

b)

( B ) 2 3 4 5

c)

( C ) 5 3 4 1

d)

( D ) 3 5 4 1

13.

प्रसरण विश्लेषण के पुनरावर्त मापों में , बीस प्रयोज्यों के साथ , प्रत्येक प्रयोज्य का सभी तीन प्रयोगात्मक स्थितियों के अंतर्गत परीक्षण किया गया , स्थितियां X प्रयोज्य प्रसरण ( त्रुटि प्रसरण के प्राक्कलन के रूप में भी उपयोग किया गया है ) , स्वतन्त्रता की कितनी कोटियों पर आधारित होगा ?

a)

( A ) 3

b)

( B ) 19

c)

( C ) 38

d)

( D ) 57

14.

निम्नलिखित सहसम्बन्धों को दो चरों के बीच सम्बन्ध की मजबूती के सम्बन्ध में अवरोही क्रम में व्यवस्थित करें :


1 . 0.8

2 . -0.5

3 . 0.4

4 .- 0.9

a)

( A ) 4 , 2 , 3,1

b)

( B ) 4 , 1 , 2 , 3

c)

( C ) 1 , 3 , 2,4

d)

( D ) 3 , 2 , 1 , 4