NEW
Font size
WorksheetsTatva Charcha 4
Total questions: 15
Worksheet time: 5mins
णमो उवज्झायाणम् का अर्थ-
लोक मे सभी उपाध्यायों को नमस्कार हो
लोक मे सभी आचार्यो को नमस्कार हो.
लोक मे सभी साधुओ को नमस्कार हो
लोक मे सभी मंगल है
साधु परमेष्ठि के मुलगुण है -
27
28
26
36
णमोकार मंत्र का एक नाम है
समयसार
अतिवीर
भक्तामर मंत्र
शाश्वत मंत्र
इनमे से परमेष्ठि नही है
अरिहंत
सिद्ध
परमागम
साधू
जो सर्व परिग्रह से रहित होते है और मुनियो को पठन पाठन कराते है -
अरिहंत
आचार्य
उपाध्याय
शिक्षक
हमे शरण लेनी है -
अरिहंत तथा सिद्ध परमेष्ठि की
साधु परमेष्ठि की
केवली भगवान द्वारा बताए गए वीतराग धर्म की
इन सभी की
जो परम पद मे स्तिथ होते है वे है -
उत्तम
मंगल
कषाय
परमेष्ठि
वीतराग धर्म -
अनंत है
करोड़ है
दस है
एक है
लोक मे जो सबसे महान हो उसे कहते है –
मंगल
उत्तम
शरण
इसमे से सभी
अरिहंत परमेष्ठि को पहले नमस्कार किया क्योकि –
वे बड़े है
संसार मे है
उनका वैभव है
हमे हित का उपदेश देते है
तीर्थंकर होते है –
28
24
32
64
वीतरागी अर्थात –
पाप से रहित
मोह से रहित
मोह राग द्वेष से रहित
क्रोध से रहित
एक से अधिक नाम वाले तीर्थंकर –
4
5
1
3
सर्वज्ञ अर्थात –
जो कुछ नही जानते
जो लोक मे सभी पदार्थ को जानते है
जो मध्य लोक को जानते है
जो लोक तथा आलोक को जानते है
हम भी भगवान बन सकते है –
रोज मंदिर जाकर
बड़ो का विनय कर
भगवान के उपदेश सुनकर
भगवान के उपदेश समझकर उस पर चल कर
