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WorksheetsTatva Charcha Quiz 18
Total questions: 15
Worksheet time: 5mins
यह आत्मा दुखी क्यों है ?
कर्मों के कारण
पर द्रव्यों के कारण
अच्छा भोजन नहीं मिलने के कारण
स्वभाव को भूलकर मोह राग द्वेष करने के कारण
कुंभार ने मिट्टी का घड़ा बनाया । इस कार्य में कुंभार क्या है ?
कर्ता
करण ( साधन )
निमित्त
उपादान
मोहन ने राजू का मोबाइल गिरा दिया । मोबाइल टूट गया । मोहन को बहुत गुस्सा आया । मोहन का गुस्सा क्या है ?
द्रव्य कर्म
भाव कर्म
नोकर्म
पुण्य
आवरण शब्द का अर्थ क्या होता है
आमंत्रण
ढंकना / छिपाना
ग्रहण करना
त्याग करना
ज्ञानवरण कर्म के निमित्त से जीव के ज्ञान गुण का घात होता है । ज्ञान गुण क्या है ?
प्रतिजीवी गुण
अनुजीवी गुण
सामान्य गुण
भावकर्म
दर्शनावरन के कर्म के उदय के निमित्त से जीव को :
भगवान के दर्शन नहीं मिल पाते
सम्यग्दर्शन नहीं हो पाता
दर्शन गुण (दर्शन उपयोग ) पर आवरण होता है
आँखों से दिखाई नहीं देता
मोहनीय कर्म के दो भेद हैं :
सामान्य मोहनीय एवं विशेष मोहनीय
दर्शन मोहनीय एवं चारित्र मोहनीय
ज्ञान मोहनीय एवं श्रद्धान मोहनीय
ज्ञान मोहनीय एवं श्रद्धान मोहनीय
मुनिराज द्वारा आत्मा का स्वरूप समझाने पर भी मनोज को शरीर और जीव एक ही लगता है । उसको कौन से कर्म का उदय चल रहा है ?
ज्ञानावरण
असाता वेदनीय
दर्शन मोहनीय
अंतराय
राजू और काजू दोनों जुड़वा भाई हैं । फिर भी उनकी शक्ल नहीं मिलती । और लंबाई चौड़ाई भी अलग है । किस कर्म के कारण ?
अंतराय कर्म
नाम कर्म
दर्शावरण कर्म
मोहनीय कर्म
विकर्ण नामक राजा बहुत क्रूर था । अपनी प्रजा को बहुत दुख देता था । सभी को बुरे शब्द कहता था । हिंसा करता था । उसके पिता तो बहुत अच्छे राजा थे फिर भी विकर्ण का व्यवहार अपने कुल के योग्य नहीं था । उसे किस गोत्र का उदय माना जाए ?
उच्च गोत्र
नीच गोत्र
रोगी गोत्र
निरोगी गोत्र
श्रुतसागर मुनिराज ने चारों मंत्रियों को कैसे हराया ?
शस्त्र चलाकर
प्रबल युक्तियों से वाद विवाद में
युद्ध करके
उनका मज़ाक उड़ाकर
विष्णुकुमार मुनिराज ने कौन सी ऋद्धि से अपने शरीर को बड़ा बनाया ?
क्रिया ऋद्धि
विक्रिया ऋद्धि
गरिमा ऋद्धि
अणिमा ऋद्धि
जंबूस्वामी इस युग के :
पहले तीर्थंकर थे
अंतिम केवली थे
21 वे नंबर के तीर्थंकर थे
बहुत बड़े राजा थे
इनमे से कौन सी भावना बारह भावनाओं में शामिल नहीं हैं ?
अनित्य भावना
नित्य भावना
एकत्व भावना
अन्यत्व भावना
निश्चय से इस विश्व में हमारी शरण कौन हैं ?
माता पिता
शुद्धात्मा
शिक्षक
पंच परमेष्ठी
