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समयसार गाथा १२-१३

Total questions: 30

Worksheet time: 23mins

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1.

समयसार गाथा १२ के अनुसार जिनमत प्रवर्ताने के लिए क्या नहीं छोड़ना चाहिए ?

a)

तीर्थ और तत्व

b)

व्यवहार और निश्चय

c)

दोनों को

d)

दोनों को नही

2.

समयसार गाथा १२ के अनुसार व्यवहारनय के छोड़ने से किसका नाश होगा ?

a)

तीर्थ का

b)

तत्त्व का

c)

निश्चय का

d)

तीनो का

3.

समयसार गाथा १२ के अनुसार निश्चयनय के छोड़ने से किसका नाश होगा ?

a)

तीर्थ का

b)

तत्त्व का

c)

व्यवहार का

d)

तीनो का

4.

समयसार गाथा १२ के अनुसार तीर्थ अर्थात क्या ?

a)

शुद्धात्मा

b)

उपदेश

c)

तिर्थक्षेत्र

d)

शब्द

5.

समयसार गाथा १२ के अनुसार तीर्थ प्रवर्तन अर्थात क्या

a)

उपदेश प्रक्रिया की निरंतरता

b)

आत्मानुभव

c)

दोनों

d)

दोनों नहीं

6.

समयसार गाथा १२ के अनुसार तीर्थ का अर्थ "उपदेश" और क्या कहा गया है ?

a)

चौथा, पांचवा, छटवा आदि गुणस्थान

b)

सम्यकदर्शन-ज्ञान-चारित्र

c)

संसारी और मुक्त जिव

d)

मोक्षमार्ग

e)

सभी

7.

समयसार गाथा १२ के अनुसार परमभाव कौनसे गुणस्थान में नही होते ?

a)

चतुर्थ गुणस्थान से पहले

b)

सातवे गुणस्थान से पहले

c)

तेरवे गुणस्थान से पहले

d)

चौदावे गुणस्थान से पहले

8.

समयसार गाथा १२ के अनुसार अपरमभाव अर्थात क्या ?

a)

शुभ भाव

b)

अशुभ भाव

c)

अशुद्ध उपयोग

d)

सभी

9.

समयसार गाथा १२ के अनुसार व्यवहारनय किन्हें प्रयोजन वान है ?

a)

अ) कभी कभी किसी-किसीको

b)

ब )जिन्हें आत्मानुभूति नहीं हुई उनको

c)

क )स्वानुभव से छूटकर सविकल्प हुए उनको

d)

अ, ब, क सभी को

e)

ड )सभी को

10.

समयसार गाथा १२ के अनुसार जहा तक यथार्थ श्रद्धान नहीं होती तब तक क्या करना चाहिए ?

a)

जिनवचनों को सुनना, धारण करना

b)

उपदेशक गुरु की भक्ति करना

c)

जिनबिंब का दर्शन करना

d)

व्यवहार मार्ग में प्रवर्तन करना

e)

सभी

11.

समयसार गाथा १२ के अनुसार जिन्हें सच्चा श्रद्धान हुआ हो उन्हें व्यवहार मार्ग में प्रवर्तन करना

a)

योग्य है

b)

अयोग्य है

c)

जब तक स्थिरता नहीं होती तब तक योग्य है

d)

स्थिरता के बाद भी योग्य है

12.

समयसार गाथा १२ के अनुसार जिन्हें सच्चा श्रद्धान हुआ हो उन्हें कौनसे व्यवहार मार्ग में प्रवर्तन करना चाहिए

a)

परद्रव्य का अवलंबन को छोड़नेरूप अणुव्रत-महाव्रत का ग्रहण

b)

पंचपरमेष्टि का ध्यान

c)

गुरु की संगती करना

d)

विशेष जानने के लिए शास्त्र का अभ्यास करना

e)

सभी

13.

समयसार कलश ४ के अनुसार आत्मानुभव को कौन प्राप्त होता है ?

a)

जो निश्चय और व्यवहार के विरोध को ध्वसं करनेवाले, स्याद्वाद से चिन्हि जिनवचनों में रमण करते हैं

b)

पुरुषार्थ से मिथ्यात्व का वमन करनेवाले

c)

कुनय से खण्डित नहीं होनेवाले

d)

सभी

14.

समयसार कलश ५ के अनुसार व्यवहार नय कैसा है ?

a)

पहली पदवी में पैर रखा है उनके लिए हस्तावलंब (हाथ का सहारा) है

b)

जो परम अर्थ की श्रद्धा करते है उसमे लीन होते है उन्हें कुछ भी प्रयोजन वान नहीं है

c)

उपयोगी और पराधीनता अनुभव करने वाला

d)

सौभाग्य नहीं कमजोरी का सूचक

e)

सभी

15.

समयसार कलश ६ के अनुसार निश्चय सम्यक दर्शन क्या है

a)

शुद्धनय के विषयभूत इस भगवान आत्माको परद्रव्यों और उनके भावों से पृथक्‌ देखना

b)

शुद्धनय के विषयभूत इस भगवान आत्माको यही आत्मा मैं हूँ अथवा ऐसा ही आत्मा मैं हु ऐसा दर्शन

c)

नवतत्त्व की विकल्पात्मक श्रद्धा वाली परिपाटी को छोड़कर एकआत्मा की प्राप्ति

d)

सभी

16.

समयसार कलश ६ के अनुसार आत्मा कैसे जानने में आता है ?

a)

चैतन्यमात्र का ध्यान करने से

b)

सर्वज्ञ की वाणी में आया हुआ सम्पूर्ण आत्माका स्वरुप जानने से

c)

आगम के अभ्यास से और गुरु के मुख से सुनकर

d)

सभी

17.

समयसार गाथा १३ के अनुसार भुतार्थ नय से कितने तत्त्व है ?

a)

b)

c)

d)

18.

समयसार गाथा १३ के अनुसार अभुतार्थ नय से कितने तत्त्व है ?

a)

b)

c)

d)

19.

समयसार गाथा १३ के अनुसार अभुतार्थ नय क्या दिखाता है और क्यों?

a)

९ तत्व, तीर्थ की प्रवृत्ति के लिए

b)

१ तत्व, आत्मानुभव के लिए

c)

९ तत्व, आत्मानुभव के लिए

d)

सभी

20.

समयसार गाथा १३ के अनुसार भुतार्थ नय क्या दिखाता है और क्यों?

a)

९ तत्व, तीर्थ की प्रवृत्ति के लिए

b)

१ तत्व, आत्मानुभव के लिए

c)

१ तत्व, तीर्थ की प्रवृत्ति के लिए

d)

सभी

21.

समयसार गाथा १३ के अनुसार ९ तत्व अपने क्यों नहीं ?

a)

निमित्त-नैमित्तिक भाव होने से

b)

स्वभाव नहीं होने से

c)

भुतार्थनय के द्वारा देखने से

d)

त्रैकालिक नहीं होने से

e)

सभी

22.

समयसार कलश ८ के अनुसार अशुद्धता के जलनेसे स्वर्ण

a)

वर्णसमूह रूप हो जाता है

b)

अग्नि की लौ में हरा, पिला रूप हो जाता है

c)

स्वर्ण वर्ण में दिखाई देता है

d)

स्वर्ण ही कहलाता है

23.

समयसार कलश ८ के अनुसार भेदज्ञान के स्तर कैसा है ?

a)

संयोग, संयोगी भाव, द्रव्य-गुण-पर्याय, लक्ष्य-लक्ष्ण भेद

b)

संयोग, संयोगी भाव, लक्ष्य-लक्ष्ण भेद, द्रव्य-गुण-पर्याय

c)

द्रव्य-गुण-पर्याय, संयोग, संयोगी भाव, लक्ष्य-लक्ष्ण भेद

d)

लक्ष्य-लक्ष्ण भेद, द्रव्य-गुण-पर्याय, संयोग, संयोगी भाव

24.

समयसार कलश ९ के अनुसार परमशुद्धनिश्चयनय के विषयभूत शुद्धात्मा का अनुभव होने पर इनमे से क्या नहीं होता

a)

नयों की लक्ष्मी उदय को प्राप्त नहीं होती

b)

प्रमाण अस्त हो जाता है

c)

निक्षेपों का समूह कहाँ चला जाता है पता नहीं चलता

d)

द्वैत भासित होता है

25.

समयसार कलश ९ के अनुसार गुण-गुणीके भेदरूप ज्ञान कैसा है ?

a)

साधना रूप है

b)

प्रमाण-नय- निक्षेपरूप विकल्प उत्पन्न करता है

c)

विकल्प वाले प्रथम अवस्था में उपयोगी है

d)

स्वरुपमात्र अनुभवने पर झूठे है

e)

सभी

26.

समयसार कलश १० के अनुसार शुद्धनय आत्मा को कैसा प्रकाशित नहीं करता है ?

a)

परभावों से भिन्‍न,

b)

आदि-अन्त से रहित,

c)

परिपूर्ण,

d)

संकल्प-विकल्पों के जाल से सहित

27.

समयसार कलश १० के अनुसार संकल्प क्या है ?

a)

द्रव्यकर्म में अपनत्व स्थापित करना

b)

भावकर्म में अपनत्व स्थापित करना

c)

नोकर्म में अपनत्व स्थापित करना

d)

सभी

28.

समयसार कलश ९ के अनुसार क्रम से प्रमाण, नय और निक्षेप के कितने भेद है ?

a)

२, २, ४

b)

२, ८, ४

c)

२, ८, २

d)

२, २, २

29.

समयसार गाथा १३ के अनुसार भुतार्थनय से जाने हुए नवतत्वों में क्या जाना गया है ?

a)

जिवतत्व

b)

पारिणामिक भावरूप शुद्ध जिव तत्व

c)

क्षायिक भावरूप जिवतत्व

d)

परमपारिणामिक भावरूप शुद्ध जिव तत्व

e)

सभी

30.

आपके मत अनुसार सबसे अधिक महत्वपूर्ण गाथा कौनसी है ?

a)

गाथा ६

b)

गाथा ७

c)

गाथा ११

d)

गाथा १२