NEW
Font size
Worksheetsसमयसार गाथा १४
Total questions: 27
Worksheet time: 14mins
समयसार गाथा १४ के अनुसार भुतार्थ नयसे आत्मा का स्वरुप कैसा नहीं है?
अबद्धस्पृष्ट
अनन्य
अनियत
अविशेष
असंयुक्त
समयसार गाथा १४ के अनुसार अभुतार्थ नयसे आत्मा का स्वरुप कैसा नहीं है?
बद्धस्पृष्ट
अनन्य
अनियत
विशेष
संयुक्त
समयसार गाथा १४ किसको दर्शाती है?
भुतार्थ नय
अभुतार्थ नय
जिव का स्वरुप
अभुतार्थ नय से जिव का स्वरुप
भुतार्थ नय से जिव का स्वरुप
समयसार गाथा १४ के अनुसार भुतार्थ नयसे जिव केअबद्धस्पृष्टता का आधार क्या है है?
वर्तमान अवस्था
कर्मक्षय-मोक्ष
अमुर्तिक स्वभाव
समयसार गाथा १४ के अनुसार अभुतार्थ नयसे जिव के बद्धस्पृष्टता का आधार क्या है है?
वर्तमान अवस्था
कर्मक्षय-मोक्ष
अमुर्तिक स्वभाव
स्पर्श गुण
समयसार गाथा १४ के अनुसार भुतार्थ नयसे जिव केअबद्धस्पृष्टता का अर्थ क्या नही है
बंध रहित
स्पर्श रहित
कर्म रहित
परद्रव्य रहित
स्पर्शज्ञान रहित
समयसार गाथा १४ के अनुसार भुतार्थ नयसे जिव के अनन्यत्व
का अर्थ क्या नही है
मनुष्य पर्यायरहित
देव पर्यायरहित
तिर्यंच पर्यायरहित
अन्य-अन्य रूप होना
अन्य-अन्य रूप नहीं होना
समयसार गाथा १४ के अनुसार भुतार्थ नयसे जिव के अनियत
का अर्थ क्या नही है
औदयिक भावरहित
औपशमिक भावरहित
क्षयोपशमिक भावरहित
क्षायिक भावरहित
स्वभाव अर्थ पर्याय रहित
समयसार गाथा १४ के अनुसार भुतार्थ नयसे जिव के अविशेष
का अर्थ क्या है
अभेदरूप ज्ञायक
ज्ञान, दर्शन आदि गुणवाला
ज्ञान स्वरूपी भगवान
चेतन स्वरूपी भगवान
समयसार गाथा १४ के अनुसार भुतार्थ नयसे जिव के असंयुक्तता
का अर्थ क्या है
मोह-राग-द्वेष रहित
द्रव्य कर्मो से रहित
शरीररहित
सुख-दुःख सहित
समयसार गाथा १४ के अनुसार अभुतार्थ दृष्टी कैसे नहीं देखती?
संयोग की ओर से
पर्याय की ओर से
भेद की ओर से
स्वभाव के समीप जाकर
समयसार गाथा १४ के अनुसार आत्मा कैसा है?
अबद्धस्पृष्टादि पाचभावरूप ही
बद्धस्पृष्टादि पाचभावरूप ही
कभी बद्धस्पृष्टादि-कभी अबद्धस्पृष्टादि भावरूप
कोई बद्धस्पृष्टादि-कोई अबद्धस्पृष्टादि भावरूप
सभी हमेशा बद्धस्पृष्टादि और अबद्धस्पृष्टादि भावरूप
समयसार गाथा १४ के अनुसार मै कभी भी बदलता नही कौन कहता है ?
अबद्धस्पृष्ट
अनन्य
अनियत
अविशेष
असंयुक्त
समयसार गाथा १४ के अनुसार मै कभी भी अस्थिर नही हु कौन कहता है ?
अबद्धस्पृष्ट
अनन्य
नियत
अविशेष
असंयुक्त
समयसार गाथा १४ के अनुसार मै अभेद हु कौन कहता है ?
अबद्धस्पृष्ट
अनन्य
नियत
अविशेष
असंयुक्त
समयसार गाथा १४ के अनुसार मै भाव कर्म रहित हु कौन कहता है ?
अबद्धस्पृष्ट
अनन्य
नियत
अविशेष
असंयुक्त
समयसार गाथा १४ के अनुसार मै द्रव्यकर्म रहित हु कौन कहता है ?
अबद्धस्पृष्ट
अनन्य
नियत
अविशेष
असंयुक्त
समयसार गाथा १४ के अनुसार शुद्धनय के विषय में क्या आता है?
स्वभाव अर्थ पर्याय
षट्गुणी हानि-वृद्धिरूप पर्यायें
औपशमिकभाव, क्षायिकभाव और क्षामोपशमिकभाव रूप पर्यायें
कारणशुद्ध पर्याय
समयसार गाथा १४ के असंयुक्तता के अनुसार
मोह-राग-द्वेष है ही नही
मोह-राग-द्वेष है
मोह-राग-द्वेष स्वभाव है अतः उसको गौण किया है
मोह-राग-द्वेष विभाव है अतः उसको गौण किया है
समयसार गाथा १४ के अनुसार किस विशेषण के माध्यम से पर्यायों से भिन्न नही बताया गया है?
असंयुक्त
अनन्य
नियत
अविशेष
समयसार गाथा १४ के अनुसार किस विशेषण के माध्यम से मनुष्य पर्याय से भिन्न बताया गया है?
असंयुक्त
अनन्य
नियत
अविशेष
समयसार गाथा १४ के अनुसार किस विशेषण के माध्यम से असमानजातीय व्यंजनपर्यायों से भिन्न से भिन्न बताया गया है?
असंयुक्त
अनन्य
नियत
अविशेष
समयसार गाथा १४ के अनुसार किस विशेषण के माध्यम से षटगुणी हानि-वृद्धिरूप स्वभाव अर्थपर्यायों से भिन्न बताया गया है?
असंयुक्त
अनन्य
नियत
अविशेष
समयसार गाथा १४ के अनुसार किस विशेषण के माध्यम से औदयिक भावों
से भिन्न से भिन्न से भिन्न बताया गया है?
असंयुक्त
अनन्य
नियत
अविशेष
समयसार गाथा १४ के अनुसार किस विशेषण के माध्यम से अभेद बताया गया है?
असंयुक्त
अनन्य
नियत
अविशेष
समयसार गाथा १४ के अनुसार शुद्धनय का विषय क्या नही है?
नर-नारकादी पर्यायो में जो सामानरूप से विद्यमान रहता है, एक रूप हो में रहता है, एकाकार रहता हैं
सामान्य, अभेद नित्य एवं एक आत्मा पर ही दृष्टि को केन्द्रित करना
क्रमश: प्रवर्त्तमान होनेवाली पर्यायों में जो सदा एक-सा रहता है, अक्रमरूप से विद्यमान रहता है,
अनेकाकार पर्यायों में जो एकाकाररूप से उपस्थित रहता है वह ज्ञायकभाव
कोई नही
समयसार गाथा १४ के अनुसार षटगुणी हानि-वृद्धि किस गुण की पर्याय है ?
प्रदेशत्व
द्रव्यत्व
अगुरुलघु गुण
वस्तुत्व गुण
