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Worksheetsफणीश्वर नाथ रेणु - पहलवान की ढोलक
Total questions: 12
Worksheet time: 6mins
फणीश्वर नाथ रेणु का बहुचर्चित आंचलिक उपन्यास कौनसा है ?
कितने चौराहे
परती परिकथा
मैला आँचल
दीर्घतपा
लुट्टन पहलवान ढोल को ही अपना गुरु क्यों मानता था ?
ढोल से निकली हुई ध्वनियाँ से उसने कुश्ती के दाँव-पेच सीखे थे
ढोल से निकली हुई ध्वनियाँ उसे आदेश देती हुई प्रतीत होती थी
ढोल से निकली हुई ध्वनियाँ से पहलवान की नसें उत्तेजित हो जाती थी
उपरोक्त सभी
गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान ढोल क्यों बजाता रहा ?
गाँव में महामारी और सूखे के कारण निराशाजनक माहौल को दूर करने के लिए
गाँव वालों के मन में जीने की उमंग जगाने के लिए
महामारी से लड़ने की प्रेरणा देने के लिए
उपरोक्त सभी
‘पहलवान की ढोलक’ पात्र के आधार पर लुट्टन की चारित्रिक विशेषताएँ कौनसी थीं ?
साहसी
भाग्यहीन
संवेदनशील
उपरोक्त सभी
‘पहलवान की ढोलक’ कहानी का प्रतीकार्थ क्या है ?
लोक कला और इसके कलाकार के अप्रासंगिक हो जाने की कथा
‘भारत’ पर ‘इंडिया’ के छा जाने की कथा
व्यवस्था के बदलने के साथ पुराने संबंध समाप्त कर दिए की कथा
उपरोक्त सभी
लुट्टन को पहलवान बनने की प्रेरणा कैसे मिली ?
उसके माता-पिता के देहांत के कारण
उसका पालन पोषण करने वाली विधवा सास को गाँव वालों के द्वारा परेशान किए जाने के कारण
लोगों से बदला लेने के लिए
उपरोक्त में से कुछ भी नहीं
लुट्टन ने सर्वाधिक हिम्मत कब दिखाई ?
दोनों बेटों की मृत्यु पर वह नहीं रोया
अकेले बेटों का अंतिम संस्कार किया
श्यामनगर के दंगल में चाँद सिंह को हराते समय
उपरोक्त सभी
पहलवान की अंतिम इच्छा क्या थी ?
उसे चिता पर पेट के बल लिटाया जाए |
चिता को आग देते समय ढोल अवश्य बजाया जाए।
क्योंकि वह जिंदगी में कभी चित नहीं हुआ था अतः वह वीर की तरह अपना अंतिम संस्कार चाहता था
उपरोक्त सभी
लुट्टन सिंह राज पहलवान कैसे बना ?
दंगल में चाँद सिंह नामक प्रसिद्द पहलवान को हराकर
अच्छे ढोल बजने की वजह से
श्यामनगर के राजा के कुश्ती के शौकीन होने की वजह से
उपरोक्त में से कुछ भी नहीं
लुट्टन को गाँव वापस क्यों लौटना पड़ा?
राजा की मृत्यु के बाद राजकुमार के सत्ता सँभालने के कारण
महल के तौर-तरीकों में भी परिवर्तन कर दिए जाने के कारण
कुश्ती का स्थान घुड़सवारी को दिए जाने के कारण
उपरोक्त सभी
ढोलक की आवाज़ का पूरे गाँव पर क्या असर होता था ?
रात की विभीषिका और दुख का सन्नाटा कम होता था
महामारी से पीड़ित लोग बीमारी रूपी शत्रु से लड़ने के लिए तत्पर हो जाते थे
गांववालों की आँखों के सामने दंगल का दृश्य साकार हो जाता था
उपरोक्त सभी
पहलवान के बेटों की मृत्यु पर गाँववालों की हिम्मत क्यों टूट गई ?
वे पहलवान को अपना सहारा मानते थे
उन्हें लगा कि पहलवान अंदर से टूट जाएगा
उनकी सहायता करने वाला कोई नहीं रहेगा।
उपरोक्त सभी
