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Worksheetsसमयसार गाथा १९
Total questions: 36
Worksheet time: 18mins
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार अप्रतिबुद्ध का क्या अर्थ है ?
अज्ञानी
अश्रद्धानी
असंयमी
सभी
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार अज्ञानी की परिभाषा की है ?
जिसे ज्ञान ही नही है
जिसे कम ज्ञान है
जिसका ज्ञान मंद है
जिसका ज्ञान विपरीत है
सभी
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार "जबतक यह आत्मा ज्ञानावरणी आदि ______ मोह-राग द्वेषादि ______एवं शरीरादि ________में अहं बुद्धि रखता है, ममत्व बुद्धि रखता है तबतक अज्ञानी रहता है"
द्रव्य कर्मों,भावकर्मों ,नोकर्मो
नोकर्मो. द्रव्य कर्मों, भावकर्मों
भावकर्मों, द्रव्य कर्मों, नोकर्मो
द्रव्य ,भाव ,नोकर्म
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार "जबतक यह आत्मा कर्मो में अहं बुद्धि रखता है, ममत्व बुद्धि रखता है; यह __________रहता है कि 'ये सभी मैं हूँ और मुझमें ये सभी कर्म-नोकर्म हैं' - तबतक अज्ञानी रहता है।
जानता
मानता
अनुभवता
सभी
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार जिव अज्ञानी कब तक रहेगा ?
मुक्ति की काल लब्धि नजदीक आने तक
देव-शास्त्र-गुरु आदि निमित्त मिलने तक
स्वभाव का आश्रय नही लेता तब तक
कर्मो मे एकत्व ममत्व करता तब तक
सभी
जिनागम के अनुसार जिव अज्ञानी कब तक रहेगा ?
मुक्ति की काल लब्धि नजदीक आने तक
देव-शास्त्र-गुरु आदि निमित्त मिलने तक
स्वभाव का आश्रय नही लेता तब तक
कर्मो मे एकत्व ममत्व करता है तब तक
सभी
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार जिव ज्ञानी कब होगा ?
मुक्ति की काल लब्धि नजदीक आने पर
देव-शास्त्र-गुरु आदि निमित्त मिलने पर
स्वभाव का आश्रय लेने पर
कर्मो मे एकत्व ममत्व छोड़ने पर
सभी
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार अज्ञान का कारण क्या है ?
एकत्व-ममत्व बुद्धि
एकत्व-ममत्व-कर्तुत्व-भोक्तृत्व बुद्धि
कर्तुत्व-भोक्तृत्व बुद्धि
कर्मो मे एकत्व-ममत्व बुद्धि
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार "ये ही मैं हूँ इसप्रकार की मान्यता का नाम ______ है, _________ है
अहं बुद्धि. एकत्व बुद्धि
ममत्व बुद्धि, स्वामित्व
कर्तुत्व बुद्धि
भोक्तृत्व बुद्धि
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार "ये मेरे हैं, मैं इनका हूँ' इसप्रकार की मान्यता का नाम ______ है, _________ है
अहं बुद्धि. एकत्व बुद्धि
ममत्व बुद्धि, स्वामित्व
कर्तुत्व बुद्धि
भोक्तृत्व बुद्धि
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार "•मैं इनका कर्ता हूँ, ये मेरे कर्ता हैं
इसप्रकार की मान्यता का नाम ______ है
अहं बुद्धि. एकत्व बुद्धि
ममत्व बुद्धि, स्वामित्व
कर्तुत्व बुद्धि
भोक्तृत्व बुद्धि
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार "मैं इनका भोक्ता हूँ, ये मेरे भोक्ता हैं इसप्रकार की मान्यता का नाम ______ है
अहं बुद्धि. एकत्व बुद्धि
ममत्व बुद्धि, स्वामित्व
कर्तुत्व बुद्धि
भोक्तृत्व बुद्धि
मै गोरा हु-काला हु इसप्रकार की मान्यता का नाम ______ है
अहं बुद्धि. एकत्व बुद्धि
ममत्व बुद्धि, स्वामित्व
कर्तुत्व बुद्धि
भोक्तृत्व बुद्धि
मेरी आवाज़ बहोत सुरीली है इसप्रकार की मान्यता का नाम ______ है
अहं बुद्धि. एकत्व बुद्धि
ममत्व बुद्धि, स्वामित्व
कर्तुत्व बुद्धि
भोक्तृत्व बुद्धि
कर्मो के उदय के कारण क्रोध आया इसप्रकार की मान्यता का नाम ______ है
अहं बुद्धि. एकत्व बुद्धि
ममत्व बुद्धि, स्वामित्व
कर्तुत्व बुद्धि
भोक्तृत्व बुद्धि
मै परिवार का सदस्य हु इसप्रकार की मान्यता का नाम ______ है
अहं बुद्धि. एकत्व बुद्धि
ममत्व बुद्धि, स्वामित्व
कर्तुत्व बुद्धि
भोक्तृत्व बुद्धि
मै भाग्यशाली हु इसप्रकार की मान्यता का नाम ______ है
अहं बुद्धि. एकत्व बुद्धि
ममत्व बुद्धि, स्वामित्व
कर्तुत्व बुद्धि
भोक्तृत्व बुद्धि
कर्मो के उदय मे बहोत दुःख होता है इसप्रकार की मान्यता का नाम ______ है
अहं बुद्धि. एकत्व बुद्धि
ममत्व बुद्धि, स्वामित्व
कर्तुत्व बुद्धि
भोक्तृत्व बुद्धि
"आम बहोत स्वादिस्ट था" इसप्रकार की मान्यता का नाम ______ है
अहं बुद्धि. एकत्व बुद्धि
ममत्व बुद्धि, स्वामित्व
कर्तुत्व बुद्धि
भोक्तृत्व बुद्धि
"मै पुरुष/ स्त्री हु" इसप्रकार की मान्यता का नाम ______ है
अहं बुद्धि. एकत्व बुद्धि
ममत्व बुद्धि, स्वामित्व
कर्तुत्व बुद्धि
भोक्तृत्व बुद्धि
"मेरे फोटोज बहोत अछे आते है " इसप्रकार की मान्यता का नाम ______ है
अहं बुद्धि. एकत्व बुद्धि
ममत्व बुद्धि, स्वामित्व
कर्तुत्व बुद्धि
भोक्तृत्व बुद्धि
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार जिव ज्ञानी कब होगा ?
मुक्ति की काल लब्धि नजदीक आने पर
देव-शास्त्र-गुरु आदि निमित्त मिलने पर
स्वभाव का आश्रय लेने पर
कर्मो मे एकत्व ममत्व छोड़ने पर और मात्र उनको जानेगा तब
सभी
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार "जैसे स्पर्शादि में पुद्गल का और पुद्गल में स्पर्शादि का अनुभव होता है अर्थात् दोनों एकरूप अनुभव में आते हैं, उसीप्रकार जबतक आत्मा को ___________________ भ्रान्ति होती है; अर्थात् दोनों एकरूप भासित होते हैं; तबतक तो वह अप्रतिबुद्ध है
कर्म और नोकर्म में आत्मा की
आत्मा में कर्म नोकर्म की
दोनों
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार, जो ______________________________________में अहं बुद्धि, ममत्व बुद्धि, कर्तृत्व बुद्धि और भोक्तृत्व बुद्धि रखता है, वह अज्ञानी है और जो मात्र उन्हें जानता है, वह ज्ञानी है
कर्म में
नोकर्म में
कर्म के उदय में होनेवाले अपने विकारी परिणामों
सभी
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार, _______________अपने आत्मा में प्रविष्ट नहीं हैं; आत्मा की ज्ञानस्वच्छता ही ऐसी है कि जिसमें ज्ञेय का प्रतिबिम्ब दिखाई दे
कर्म
नोकर्म
कर्म के उदय में होनेवाले अपने विकारी परिणाम
सभी
ज्ञेय
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार आत्म तिरस्कारी पुद्गल परिणाम क्या हैं ?
मोह आदि अन्तरंग परिणाम रूप कर्म
शरीरादि बाह्यवस्तुरूप नोकर्म
दोनों
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार कर्मो का एकत्व और ममत्व तोड़ने के लिए क्या समझना मिथ्यात्व है ?
अरूपी आत्मा की तो अपने को और पर को जाननेवाली ज्ञातृता ही है
कर्म तथा नोकर्म पुद्गल के हैं
अपना ज्ञान होना और पर-राग का ज्ञान होना यह तो अपने ज्ञान का स्वभाव है
राग है इस कारण राग का ज्ञान हुआ
रागादि पर हैं और जो पर्याय में रागादि का ज्ञान है, वह मेरा है
समयसार परमागम गाथा १९ के अनुसार भेद्ज्ञान कैसा होता है ?
रागादि का लक्ष्य छोड़ने से
अपनी ज्ञायक सत्ता लक्ष्य में लेने से
दोनों
समयसार परमागम कलश २१ के अनुसार अविचल अनुभूति को प्राप्त पुरुष ही _________ की भांति अपने में प्रतिबिम्बित हुए अनन्तभावों के स्वभावों से निरन्तर विकाररहित होते हैं
दर्पण
ज्ञान
ज्ञानाकर
ज्ञेयाकार
समयसार परमागम कलश २१ के अनुसार अविचल अनुभूति को प्राप्त पुरुष ज्ञान में जो ________ प्रतिभासित होते हैं, उनसे रागादि विकार को प्राप्त नहीं होते।
ज्ञायक
ज्ञेय
ज्ञानाकार
ज्ञेयाकार
समयसार परमागम कलश २१ के अनुसार अनुभूति कैसी है ?
भेदज्ञानमूलक
तत्वज्ञान मूलक
तत्व निर्णय मूलक
सभी
समयसार परमागम कलश २१ के अनुसार जिसप्रकार अग्नि के प्रतिबिम्बित होने से दर्पण गर्म नहीं होता
उसीप्रकार रागादि के ज्ञेय बनने से आत्मा रागादिरूप परिणमित नहीं होता
उसीप्रकार पुद्गलादी के ज्ञेय बनने से आत्मा पुद्गलादीरूप परिणमित नहीं होता
उसीप्रकार कर्म के ज्ञेय बनने से आत्मा कर्मरूप परिणमित नहीं होता
उसीप्रकार नोकर्म के ज्ञेय बनने से आत्मा नोकर्मरूप परिणमित नहीं होता
समयसार परमागम कलश २१ के अनुसार आत्मानुभूति के लिए क्या करना निरर्थक है ?
कर्म-नोकर्म के बीच भेदविज्ञान
स्व और पर के बीच भेदविज्ञान
पूजा-पाठ, जप-तप, तीर्थयात्रा, व्रत-शील, संयम
ज्ञान और राग के बिच भेद विज्ञानं
ज्ञान और ज्ञेय के बिच भेद्ज्ञान
समयसार परमागम कलश २१ के अनुसार जितने भी जीव आज तक सिद्ध हुए हैं, वे सब ___________से ही हुए हैं और जितने भी संसार में बंधे हैं, वे सब _________ के अभाव से ही बंधे हैं
भेदविज्ञान
व्रत-शील-संयम
तत्वज्ञान
तत्व निर्णय
समयसार परमागम कलश २१ के अनुसार इन मे से क्या सही नही है ?
अनन्त ज्ञेयों के जानने से भी हमारा ज्ञानदर्पण विकृत होनेवाला नहीं है
बिगड़ता तो उन्हें अपना जानने से है, अपना मानने से है, उनमें ही जमने-रमने से है, उनका ही ध्यान करने से हैं
अकेले जाननेमात्र से कुछ भी बिगाड़-सुधार नहीं है
उन्हें जानने का हट करना नही चाहिए
नहीं जानने का हट करना चाहिए
समयसार परमागम गाथा १९ के बाद आई अतिरिक्त गाथाओ के अनुसार क्या सही नही है ?
शुद्धजीव में उपयोग तन्मय हुआ, उपादेयबुद्धि से परिणत हुआ तो मोक्ष होता है
देहादिक अजीव में उपयोग तन्मय हुआ, उपादेयबुद्धि से परिणत हुआ तो बंध होता है
आत्मा अशुद्धनिश्चयनय से अशुद्धभावों का कर्ता है
शुद्धनिश्चयनय से शुद्धभावों कर्ता है
उपचरित-असद्भूत व्यवहारनय से पौद्गलिक कर्मों का कर्ता है
