WorksheetsCHARAK 10-13 QUIZ
Total questions: 26
Worksheet time: 13mins
निर्वापण गुण निम्न में से कौनसे स्नेह में होता है -
Which of the following Sneha has “Nirvapana” property-
घृत [Ghrita]
तैल [Taila]
वसा [Vasa]
मज्जा [Majja]
मंद विभ्रन्शा” स्नेह की कोनसी मात्रा हेतु कहा गया है ?
Manda Vibhransha is related to which of the Sneha Matra
उत्तम मात्रा [Uttama Matra]
मध्यम मात्रा [Madhyama Matra]
हृस्व मात्रा [ Hriswa Matra]
हृसियसी मात्रा [Hrisiyasi Matra]
वात के सम्बन्ध में सही है - सर्वेन्द्रियाणां .......?
It is right about Vata, Sarvendriyanam.................?
उद्घोषकः (Udghoshakah)
उद्घाटकः (Udghatakah)
उद्योजनक: (Udyojanakah
उद्योजकः (Udyojakah)
आचार्य भद्रकाय ने किस दोष का वर्णन किया है :-
Which Dosha is explained by Aacharya Bhadrakaapya-
पित्त (Pitta)
वात (Vaata)
कक (Kapha)
त्रिदोष (Tridosha)
वात में दारुण गुण स्वीकार किया है :-
Daaruna Guna for Vata is accepted by:-
आचार्य बडिश (Acharya Badisha)
आचार्य कुश (Acharya Kusha)
आचार्य आत्रेय (Acharya Aatreya)
आचार्य चक्रपाणि (Acharya Chakrapaani)
शास्त्र क्षार अग्निकर्म योग्य रोग है :-
Shastra, Kshara and Agnikarma used in a disease....
याप्य (Yaapya)
कृच्छ साध्य (Krichcha Saadhya)
असाध्य (Asaadhya)
साध्य (Saadhya)
चरकानुसार अनुमान के भेद है ?
) द्विविध
त्रिविध
चतुर्विध
पंचविध
"बुद्धि पश्यति या भावान् बहुकारणयोगजान। - किसके लिए कहा गया है।
प्रत्यक्ष प्रमाण हेतु
अनुमान हेतु
युक्ति हेतु
उपमान हेतु
पुनः अहितेभ्योऽर्थेभ्यो मनोनिग्रहः -कौनसी औषध है।
दैव व्यापाश्रय
युक्ति व्यपाश्रय
सत्वावजय
शोघन
पल्लवग्राही" वैद्य कौन होता है।
प्राणभिसर
रोगाभिसर
शास्त्रविद
छद्मर वैद्य
) अष्ट त्रित्व का वर्णन किस आचार्य ने किया है।
) पुनर्वसु आत्रेय
मैत्रेय
भिक्षु आत्रेय
) कृष्णात्रेय
आयुषोऽनुवृत्ति प्रत्ययभूतो- किसका कर्म है।
आत्मा
वायु का
मन का
मस्तिष्क
वातकलाकलीय अध्याय में 'पित्त संबंधी वर्णन किसने किया है।
वडिश
काप्य
BOTH
NONE
मज्जा सेवन' का निर्देश किस ऋतु में है।
माधव
प्रावृट
वर्षा
शरद
चरकानुसार 'शिर रूजा' में लाभप्रद है।
घृत
तैल
) वसा
मज्जा
चरकानुसार 'योनिविशोधन' किसका कार्य है।
घृत
तैल
वसा
मज्जा
उष्ण काल में दिन में स्नेहपान करने कौन सा रोग हो सकता है।
) मूर्छा
) अरूचि
आनाह
उपरोक्त सभी
चरकानुसार स्नेह की प्रविचारणाये होती है।
(
57
20
24
64
स्नेह' की प्रधान मात्रा का निर्देश किसमें नहीं है
वातरक्त
कुष्ठ
कामला
विसर्प
मंदविभ्रंशा स्नेह की कौनसी मात्रा होती है।
हस्व
मध्यम
उत्तम
ALL
चरकानुसार 'प्रथम एषणा' है।
प्राणैषणा
धनैषणा
परलोकैषणा
धर्मेषणा
वैद्य की 4 वृत्तियों में शामिल नहीं है।
मैत्री
कारुण्य
मुदिता
उपेक्षा
पुनः आहार औषधद्रव्याणा योजना - कौनसी औषध है।
दैव व्यापाश्रय
युक्ति व्यापाश्रय
सत्वावजय
संशोधन
प्रयोग ज्ञान विज्ञान सिद्धि सिद्धाः सुखप्रदाः। -किस वैद्य के गुण है।
प्राणभिसर
रोगाभिसर
शास्त्रविद
छद्मर वैद्य
आचार्य कुश ने वात के कितने गुण बताये गए
5
8
6
4
प्राकृत शरारस्थ वायु का कर्म है
तन्त्रयंत्रधर
सर्वेन्द्रियाणामुद्योजक
समीरणोडग्नेः
ALL
