Worksheetsऑनलाइन क्लास टेस्ट,कक्षा :7'स',हिन्दी,पाठ: हम पंछी उन्मुक्त
Total questions: 10
Worksheet time: 20mins
पिंजरे में बंद पक्षियों का कहना है -
हम पिंजरे में खुश रहते हैं।
हम खुले आकाश में विचरण करने वाले हैं।
हम पेड़ों पर रहना चाहते हैं।
हम उड़ना ही जीवन मानते हैं।
'हम पंछी उन्मुक्त गगन के' नामक कविता के कवि कौन हैं?
भवानीप्रसाद मिश्र
सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
रहीम
शिवमंगल सिंह 'सुमन'
पिंजरे में रहकर पक्षी क्या नहीं कर पाएँगे?
गा नहीं पाएँगे
कुछ खा नहीं पाएँगे
उड़ नहीं पाएँगे
मन की भावनाएँ किसी को कह नहीं पाएँगे
कवि पक्षियों के माध्यम से मनुष्य की किस भावना को दर्शाना चाहता है ?
परतंत्रता में सभी सुविधाएँ पाने की ।
सदा स्वतंत्रता का जीवन जीने की।
ऊँचाइयों को छूने की ।
किसी के बंधन में रहने की ।
पक्षियों को सोने की कटोरी में रखा भोजन भी अच्छा क्यों नहीं लगता ?
क्योंकि वह भोजन स्वादिष्ट नहीं था ।
क्योंकि वह भोजन बंधन में मिल रहा था ।
क्योंकि पक्षियों को भूख नहीं थी ।
क्योंकि वे अपने मित्रों से बिछुड़ चुके थे ।
'नभ की सीमा पाने' शब्दों का क्या आशय है ?
तेज़ी से उड़ने की
आकाश से पार जाने की
आकाश की ऊँचाइयाँ छूने की
नभ पर जाकर रहना
'अनार के दाने' किसके प्रतीक हैं हैं ?
अनार के दानों रूपी आसमान के तारे
बड़े अनार के दाने
लाल अनार के दाने
छोटे - छोटे अनार के दाने
'पंखों की होड़ा -होड़ी' से क्या अर्थ निकलता है ?
एक दूसरे से आगे बढ़ने की चाह
सदा उड़ने की चाह
क्षितिज पाने की चाह
इनमें से कोई नहीं
पक्षियों का अपने - आप से क्या प्रण है ?
क्षितिज पाने के लिए पिंजरा तोड़ देंगे ।
क्षितिज मिलन के लिए आपकी होड़ लगाएँगे ।
क्षितिज मिलन करेंगे या प्राण त्याग देंगे ।
लंबी उड़ान भरने पर भी क्षितिज मिलन न होने पर विचलित होना ।
'साँसों की डोरी तनना' मुहावरे का अर्थ क्या है ?
साँस रुक जाना
साँस नहीं ले पाना
साँस चढ़ जाना
लंबी - लंबी साँसें लेना
