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WorksheetsCHARAK KALP STHAN(PRATYAKSH AYURVEDA )
Total questions: 20
Worksheet time: 10mins
. आचार्य चरक अनुसार वमन द्रव्य निम्न में से कोनसे गुण के कारण दोष समूह को विलीन कर देती है
उष्ण
तीक्ष्ण
सर
विकासी
आचार्य चरक अनुसार बस्ति हेतु स्नेह का कोनसा पाक प्रयुक्त होता है
मृदु
मध्यम
खर
अ और ब दोनों
आचार्य चरक अनुसार निम्न में से किसका शरद ऋतु में संग्रह नही करना चाहिए –
क्षीर
त्वक
सार
कंद
चरक संहिता के अनुसार षोडशिका का मान होता है
2 पल
1 पल
2 कर्ष
1 प्रसृत
पित्त दोष की विकृति में शोधन औषध के साथ दिया जाने वाला अनुपान है –
सौविरक
सुरा
मैरेय
फाणित
“नातिग्लानिकरमˎ पायौ हृदये न च रुक्करमˎ” निम्न में से कोनसे विरेचन द्रव्यों से सम्बंधित है –
तीक्ष्ण
मध्यम
मृदु
उपरोक्त सभी
फल पिप्पली को निम्न में से कोनसे द्रव्यों के साथ क्रम से मर्दन किया जाता है –
घृत – मधु – दधि – पलल
घृत – क्षीर – दधि – मधु
घृत – दधि – मधु – पलल
मधु – घृत – दधि – पलल
दन्ती एवं द्रवन्ती मूल को संग्रहीत करने के लिए उनकी मूल पर निम्न में से किसका लेप किया जाता है
मधु, चित्रक
मधु, शुण्ठी
मधु , पिप्पली
उपरोक्त में से कोई नही
निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए –
औषध योग
1. पिण्डीतक फल a. 60
2. राजकोशातकी b. 39
3. मृदंगफल c. 133
4. पिण्डफला d. 45
1-d, 2-a, 3-b, 4-c
1-c, 2-a, 3-a, 4-d
1-a, 2-b, 3-a, 4-c
1-d, 2-b, 3-c, 4-d
. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए –
औषध पर्याय
1. आरग्वध a. चित्रा
2. द्रवन्ती b. यवतिक्ता
3. शंखिनी c. अवघातक
4. त्रिवृत्त d. सर्वानुभूती
1-c, 2-a, 3-b, 4-d
1-b, 2-c, 3-b, 4-d
1-d, 2-b, 3-c, 4-a
1-c, 2-a, 3-d, 4-b
. एक 6 वर्ष का बालक, दाह और उदावर्त्त रोग से पीड़ित है, उसे विरेचनार्थ देना चाहिए
चतुरंगुल फलमज्जा + मधु
चतुरंगुल फलमज्जा + द्राक्षारस
चतुरंगुल फलमज्जा + क्षीर
चतुरंगुल फलमज्जा + दधिमण्ड
स्नूही क्षीर का शोधन निम्न में से किसके साथ किया जाता है-
तृण पञ्चमूल
बृहत् पञ्चमूल
द्विपञ्चमूल
उपरोक्त में से कोई नहीं
. चरक संहिता में महावृक्ष के कितने योगों का वर्णन मिलता है-
39
48
20
16
इन्द्रयव एवं कलिंगक कहा जाता है-
वत्सक फ़ल
कुटज पुष्प
कुटज बीज
वत्सक फलवृन्त
एक विष से पीड़ित रोगी के विषविकार को दूर करने के लिये चिकित्सक एक औषध के कल्क को धान्यक एवं तुम्बरू यूष के साथ सेवन करवाता है, वह औषध है
आरग्वध
वत्सक
धामार्गव
त्रिवृत्त
"मृदु कोष्ठे च तच्छुभम्" किस औषध हेतु निर्दिष्ट है-
आरग्वध
तिल्वक
अरुण त्रिवृत्त
श्यामा त्रिवृत्त
आचार्य चरक ने कौनसे द्रव्य का वर्धमान योग बताया है-
बृहत्पत्र
फलिनी
कोशातकी
यवतिक्ता
धामार्गव का वमन हेतु निम्न में से कौनसा अंग प्रयुक्त नही होता है-
मूल
फल
पुष्प
पत्र
कौनसे गुण के कारण त्रिवृत्त, वात को कुपित करती है-
लघु
सूक्ष्म
रुक्ष
शीत
मोहयेदाशुकारित्वातˎ..............क्षीण्वीत मूर्च्छयेतˎ [रिक्त स्थान की पूर्ति करे]
सुधा
दन्ती
श्यामा
द्रवन्ती
