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WorksheetsKṛṣṇa Book Practice Quiz (Chapter 47-48)
Total questions: 24
Worksheet time: 59mins
उद्धव जी को कौन सी मुक्ति प्राप्त थी? (अध्याय 47)
सारूप्य
सायुज्य
श्रीकृष्ण को दोष देते हुए गोपियों ने किस किस उपमा का उल्लेख किया? (अध्याय 47)
भ्रमर की पुष्प में तभी तक रूचि है जब तक मधु चाहिए
जैसे प्रेमी का धन समाप्त वैसे ही वेश्या की उसमें रूचि
यदि शासन सुरक्षा करने में असमर्थ है तो नागरिक द्वारा त्याग
विद्यार्थी का शिक्षा समाप्त होने पर विद्यालय व गुरु-त्याग
दक्षिणा मिलने पर ब्राह्मण द्वारा यजमान का त्याग
श्रीकृष्ण की अकृतज्ञता के विषय में राधारानी ने पौर्णमासी से सुने हुए कौन से उदाहरण दिए? (अध्याय 47)
क्षत्रिय की बजाय शिकारी की तरह वालि का वध
स्वार्थ हेतु शूर्पणखा को नाक कान काट कर कुरूप बनाना
उदार बलि महाराज को कौवे जैसे बांधकर धकेलना
दूध पिलाने आई पूतना को मारना
युवा विष्णुप्रिया के होते हुए संन्यास ग्रहण करना
गोपियों की ही तरह संतजन और महान भक्त क्रूर और कठोरहृदयी कृष्ण के विषय में वार्तालाप करना क्यों नहीं छोड़ पाते?(अध्याय 47)
श्री कृष्ण धोखेबाज हैं और काला जादू चलाकर सबको वश में कर लेते हैं
अद्वय श्रीकृष्ण का तथाकथित निर्दय चरित्र भी उतना ही आस्वादनीय है जितना कि दयालु चरित्र
श्रीमती राधारानी के अनुसार श्रीकृष्ण के लीलामृत की एक बूँद भी कान में पड़ने से क्या होता है? (अध्याय 47)
व्यक्ति तत्काल राग-द्वेष के स्तर से ऊपर उठ जाता है
भौतिक आसक्ति के संदूषण से पूर्णरूपेण मुक्त हो जाता है
भौतिक जगत की सभी प्रिय वस्तुओं का मोह त्याग देता है
साधु बनकर श्रीकृष्ण की खोज में भटकता रहता है
श्रीमती राधारानी का कृष्ण को दोष देना और उनके विषय में चर्चा का त्याग करने में असमर्थता, श्रेष्ठतम दिव्य भाव ________ के लक्षण हैं | (अध्याय 47)
अतिभाव
दुर्भाव
स्वभाव
महाभाव
भ्रमर रूप में दूत के दोबारा आने पर राधारानी ने कृष्ण के बारे में क्या विचार किया? (अध्याय 47)
श्रीकृष्ण अभी भी मुझ पर कृपालु हैं
उन्होंने मुझे अपने पास बुलाने के लिए भ्रमर को फिर भेजा है
जब उद्धव जी ने गोपियों की उच्च स्थिति का गुणगान किया तो उनका क्या भाव था? (अध्याय 47)
वे अपनी प्रशंसा सुनने में कृष्ण के सन्देश को ही भूल गयीं
अपनी उच्च स्थिति की प्रशंसा सुनने में उनकी रूचि नहीं थी
उन्होंने श्रीकृष्ण का सन्देश सुनने के प्रति उद्विग्नता प्रदर्शित की
कृष्णभावनामृत क्या है? (अध्याय 47)
वस्तुओं को यथारूप समझने के वास्तविक ज्ञान की सिद्धावस्था
जिस स्तर पर कृष्ण के साथ अपने सनातन सम्बन्ध को समझा जा सके
ब्रह्माण्ड के मूल रचयिता कौन हैं? (अध्याय 47)
ब्रह्मा
शिव
विश्वकर्मा
नारायण
मन कभी विचारों से रिक्त नहीं हो सकता और विचारों का विषय कृष्ण की शक्ति के ____ तत्वों की परिधि से बाहर नहीं हो सकता | जो बुद्धिमान यह जान लेता है वह श्रीकृष्ण की शरण में चला जाता है | (अध्याय 47)
16
8
5
3
ज्ञान की विभिन्न विधियों की नदियाँ कृष्ण रूपी समुद्र की ओर जाती हैं, पर फिर भी कौन सा मार्ग कष्टप्रद है? (अध्याय 47)
भक्ति
भक्तिरहित
श्री कृष्ण के अनुसार एक स्त्री कब अपने प्रेमी का ज्यादा ध्यान करती है? (अध्याय 47)
जब वह उससे दूर रहता है
जब वह उसके सम्मुख रहता है
गोपियों द्वारा उद्धृत - "निराशा सबसे बड़ा सुख है" - किस महान वेश्या ने कहा था?(अध्याय 47)
पिंगला
लक्षहीरा
चिंतामणि
नगरबाला कुब्जा
परम सत्य के तीन पक्ष कौन से हैं? (अध्याय 47)
सत्व-रजस-तमस
कर्म-ज्ञान-भक्ति
ब्राह्मण-क्षत्रिय-वैश्य
श्रीभगवान-अन्तर्यामी परमात्मा-सर्वव्यापक ब्रह्म
उद्धव जी ने अगले जन्म में वृन्दावन में एक पौधे, लता, तुच्छ घास या वनस्पति बनने की इच्छा क्यों व्यक्त की? (अध्याय 47)
वे गोपियों की उन्नत स्थिति को जानते हुए उनकी चरणरज को शिरोधार्य करना चाहते थे
इस जीवन में ऐसा करने का उनमें साहस नहीं था, अतएव अगले जन्म की कामना की
वृन्दावनवासी उद्धव को विदा करते समय उनसे क्या आशीर्वाद चाहते थे? (अध्याय 47)
वे सदैव कृष्ण के यशस्वी कार्यकलापों का स्मरण करते रहें
उनके मन सदैव कृष्ण के पदकमलों पर केंद्रित रहें
उनके शब्द सदैव कृष्ण के यशगान में संलग्न रहें
उनके शरीर सदैव श्रीकृष्ण को प्रणाम करते रहें
कहीं भी जन्म लें पर केवल कृष्णभावनामृत में संलग्न रहें
कुब्जा बेशर्मी से कृष्ण को अपने शयन कक्ष में ले गयी
श्रीकृष्ण ने स्नेहपूर्वक स्त्रीसुलभ लज्जा से पूर्ण कुब्जा को पास खींचा
पहले ही चन्दन अर्पित करने मात्र से वह सभी पापों से मुक्त हो गयी थी
उनके चरणकमलों की सुगंध से तत्काल सभी वासनाओं से मुक्त हो गई
महाजनों के अनुसार कुब्जा श्रीकृष्ण की किस शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं? (अध्याय 48)
भू
चित
इनमें से कौन अक्रूर जी के घर तो गए पर कुब्जा के घर नहीं गए? (अध्याय 48)
श्रीकृष्ण
बलराम जी
उद्धव जी
अक्रूर जी ने कहा - "आप ही शरीर में व्यष्टि आत्मा व स्वतंत्र परमात्मा के रूप में प्रवेश करते हैं |" ठीक मिलाएं | (अध्याय 48)
आत्मा-विभिन्न अंश; परमात्मा-अन्तर्यामी प्रतिनिधि
परमात्मा-विभिन्न अंश; आत्मा-अन्तर्यामी प्रतिनिधि
भगवान् तथा जीवों में क्या अंतर हैं? (अध्याय 48)
भगवान् के विभिन्न अंश होने के नाते जीव भौतिक गुणों की क्रिया-प्रतिक्रिया से प्रभावित हो जाते हैं
कृष्ण अच्युत हैं किन्तु जीव उनके विभिन्न सूक्ष्म अंश/अग्नि के कण के रूप में अपनी आध्यात्मिक पहचान भूलने की प्रवृत्ति रखते हैं
अक्रूर जी ने भगवान् कृष्ण, बलराम जी और उद्धव जी का किस प्रकार स्वागत किया? (अध्याय 48)
भगवान् कृष्ण व बलराम जी को गले लगाया
उद्धव जी को सादर प्रणाम किया
सबको उचित आसन पर बैठाकर चरण पखारे
धीरे-धीरे श्रीकृष्ण का सिर दबाने लगे
श्रीकृष्ण ने अक्रूर जी को देवताओं, तीर्थस्थानों व स्वयं से भी श्रेष्ठ क्यों कहा? (अध्याय 48)
