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Worksheetsउत्तम आर्जव धर्म क्विज़
Total questions: 10
Worksheet time: 5mins
उत्तम आर्जव धर्म किस कषाय के अभाव में प्रगट होता है ?
क्रोध
मान
माया
लोभ
उत्तम आर्जव धर्म का एक शब्द में स्वरुप है -
सरलता
कोमलता
सम्यकता
चारित्रता
माया कषाय के अभाव में ही अआर्जाव धर्म की उत्पत्ति मानने पर क्या समस्या है ?
सिद्धों में भी माया कषाय मानना पड़ेगी
जिनके मन और वाणी नहीं है ऐसे एकेंद्रियादि जीवों के माया कषाय मानना संभव न होगा |
संसार के सभी जीवों में उत्तम आर्जव धर्म प्रगट हो जाएगा |
सभी जीव मुनि बनकर मोक्ष चले जायेंगे
निम्न कथनों में से सही कथन है -
मन वचन काय की एकता से माया कषाय का अभाव किया जा सकता है जिससे उत्तम आर्जव धर्म प्रगट होगा अन्य प्रकार से नहीं
आर्जव धर्म और माया कषाय ये दोनों जीव के भाव हैं एवं मन-वचन-काय पुद्गल के गुण हैं |
आर्जव धर्म जीव की अवस्था है और माया कषाय पुद्गल की अवस्था है |
आर्जव धर्म और माया कषाय ये दोनों जीव के भाव हैं एवं मन-वचन-काय पुद्गल की अवस्थाएं हैं |
माया कषाय की उपस्थिति के लिए मन वचन काय की उपस्थिति आवश्यक नहीं है क्यों ?
क्योंकि सिद्ध भगवान् की काया नहीं है | फिर भी माया का अभाव है
क्योंकि एकेंद्रिय के अकेली काया है | फिर भी मान कषाय है
क्योंकि माया कषाय पुद्गल की पर्याय है
उक्त तीनों कथन
"मन में होय सो वचन उचारिये, वचन होय सो .....................| उक्त कथन की पूर्ती निम्न में क्या है -
मन सों करिए
तन सों करिए
धन सों करिए
धर्म आचारिये
हमें मन-वचन-काय की एक रूपता लाने के लिए मन के साथ क्या करना होगा ?
मन को इतना पवित्र बनाना होगा कि उसमें कभी कोई खोटा भाव उत्पन्न ही न हो |
मन में सदैव पञ्च प्रभु का स्मरण करना होगा |
मन में प्णरतिक्मोषण कार मन्त्र का जाप करना होगा |
मन से आर्जव धर्म प्रगट करना होगा
वास्तव में दशलक्षण धर्मों की चर्चा किनके लिए है -
श्रावक के लिए
आर्यिका के लिए
भगवान् के लिए
मुनिराज के लिए
सम्यकदृष्टि के कौन सी माया का अभाव होता है -
अनंतानुबंधी माया का
अप्रत्याख्यान माया का
प्रत्याख्यान माया का
संज्वलन माया का
क्या प्राप्त किये बिना अनंतानुबंधी माया का अभाव नहीं किया जा सकता ?
स्वाध्याय
सम्यक दर्शन
उत्तम आर्जव
दश धर्म
