Worksheetsउत्तम संयम धर्म
Total questions: 30
Worksheet time: 15mins
इन्द्रियां हमारी शत्रु क्यों है
आत्मज्ञान में बाधक है
पाप बंध का कारण है
विषयों में उलझाने वाली है
उपर्युक्त सभी
यह जीव स्वयं की हिंसा निरंतर कैसे कर रहा है
मिथ्यात्व भाव से
कषाय भाव से
दोनों से
किसी से नहीं
संयम के भेद कितने हैं
2
4
5
भेद नहीं है
पंच इन्द्रिय मन वश करो का अर्थ क्या है
ज्ञान की बरबादी को रोकना
संयम धारण करना
विषय भोगो में लिप्त न होना
उपर्युक्त सभी
संजम ___ संभाल , विषय चोर बहुत फिरत है।
धर्म
चरित्र
रतन
धन
मनरूपी हाथी को शांत करने के लिए संयम है -
अंकुश के समान
भाले के समान
चाकू के समान
महावत के समान
इन्द्रिय रूपी घोड़ों के लिए संयम है -
लगाम के समान
रस्सी के समान
चने के समान
इनमें से कोई नहीं
अपहृत संयम होता है -
पांच समिति का पालन करने से
पांच महाव्रत का आचरण करने से
पांच अणुव्रत का पालन करने से
गुणव्रत का पालन करने से
संयमी का निवास कितने प्रकार का होता है -
1
2
3
4
साक्षात मोक्ष के कारणभूत संयम के कितने भेद हैं -
4
5
7
6
उत्तम संयम ___ दाता।
उत्तम पुण्य
स्वर्ग पद
शिव पद
उत्कृष्ट भोग
इस दिन हमें क्या करना चाहिए?
व्रत उपवास
विशेष पूजन एवं विधान
तत्त्व निर्णय
छह काय जीवों की रक्षा
पंचेंद्रिय मन वश करो" का अर्थ है
प्रमाद को कम करना
उपर्युक्त सभी
विषय के प्रति आसक्ति घटना
मन शुभ कार्यों में लगाना
पांच इन्द्रिय विषय का भोग पाप रूप क्यों है?
क्योंकि यह आंनद को नहीं देता
तीव्र गृद्धता के कारण
यह सुख का हारता है
कोई भी नहीं
उत्तम संयम किसे प्रगट होता है?
पूजन भजन करने वालो को
तप शील व्यक्ति को
सम्यक दृष्टि को
मंद कषाय वाले व्यक्ति को
संयम धर्म कौन से गुणस्थान से प्रकट होता है
4 थें
5 वें
12
है ही नहीं
संयम की रक्षा किस से करे
विषय चोरों से
प्रमाद रूपी डाकुओं से
क्षार रूपी ठगी से
उपर्युक्त सभी
संयम और तप में संबंध है
कारण - कार्य
पूर्व- अपर
अनिवार्य- वैकल्पिक
व्याप्क - व्याप्य
कर्ण इन्द्रिय के विषय सेवन से कौन मरता है
मीन
गज
हिरण
भौंरा
संयम बिना जीवन कैसा है
बिना पैडल की साइकिल
सूना सूना
बिना ब्रेक की गाड़ी
व्यर्थ है
आचार्यों ने सबसे प्रबल इन्द्रिय किसे कहा
स्पर्श
जननेन्द्रिय
नेत्र
जिव्हा
सर्व आस्रवो के निवारण से क्या तात्पर्य है
मात्र निश्चय से
मात्र व्यवहार से
निश्चय-व्यवहार
इनमे से कोई नहीं
कौन सा आस्रव अच्छा है
पूण्य आस्रव
पाप आस्रव
दोनो ही
कोई भी नही
निश्चय आस्रव क्या है?
कर्मो का आना*
कर्मो का जाना
कर्मो की पूर्णतः समाप्ति
ये सभी
जीव मात्र पर दया का भाव ही संयम है
हाँ
नही*
शायद
यही है
आस्रव के कितने भेद है?
3
4
5
2
अहमिन्द्र कभी हिंसा और विषय सेवन नही करते फिर भी
निश्चय संयम नही है
व्यवहार संयम नही है
दोनो नही है
संयम की प्राप्ति में रुचि आवश्यक है
देवो के संयम नही है क्योंकि
वे इच्छा रौक नही सकते
उनका वैक्रियक शरीर है
उनमे पंचम गुणस्थान नही हो सकता
संयम की रुचि नही है
चौथे गुणस्थान में आचार्यो के अनुसार संयम
हो सकता है पर सभी को नही
नही हो सकता किसी को भी
सभी को नही
मनुष्य तिर्यंच को हो सकता देवो को नही
पूजन में रुख शब्द का क्या अर्थ है
रूखा
खुरदरा
वनस्पति
पेड़-पौधे
