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Worksheetsदुख का अधिकार
Total questions: 18
Worksheet time: 3mins
हमारा दर्जा कौन निश्चित करता है ?
लोग
समाज
पोशाक
परिवार
बुढ़िया कहाँ बैठ कर रो रही थी ?
घर में
दुकान में
मंदिर में
फुटपाथ पर
दुख का अधिकार कहानी के लेखक कौन है ?
यशपाल
महादेवी वर्मा
निराला
पंत
किसी व्यक्ति की पोशाक देखकर हमें क्या पता चलता है ?
सामाजिक स्थिति और अधिकार
कुछ भी नहीं
अवस्था
भगवाना अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था ?
तरबूजे बेचकर
कछियारी करके
आम बेचकर
बुढिया को देख्कर लेखक को किसकी याद आ गई ?
माताजी की
दादीजी की
संभ्रात महिला की
किसी की नहीं
बेटे को साप काट्ने पर बुढिया ने क्या किया ?
डाक्टर को बुलायी
खुद इलाज किया
बहू को बुलायी
ओझा को बुला लाई
दादी ने पोतो को खाने के लिए क्या दिया ?
संतरा
अनाज
खरबूज़े
अंगूर
बुढिया के घर का धन कैसे समाप्त हो गया ?
भगवाना की विदाई में , ओझा को देकर
गरीबो को देकर
डाक्टर को देखकर
बुढिया को कोई उधार क्योन नहीं देता ?
बहुत गरीब थी
वह अनाथ थी
एकमात्र कमाउ पुत्र मर चुका था
बुढ़िया का हाल जानने में लेखक के सामने क्या बाधा थी ?
जाति
पोशाक
भाषा
धर्म
लेखक के अनुसार सबको किसका अधिकार होना चाहिए ?
खुशी का
आनंद का
दुख मनाने का
अमीर होने का
भगवाना के अतिरिक्त सौदा लेकर बाज़ार में कौन जाता था
उसकी पत्नी
उसका बेटा
उसकी बेटी
उसकी माँ
खरबूज़ों के समीप कौन बैठी थी ? और वह क्या कर रही थी ?
एक जवान औरत और वह गाना गा रही थी ।
एक छोटी लड़की और वह खेल रही थी ।
एक अधेड़ उम्र की औरत और वह रो रही थी ।
बुढ़िया की बहूऔर वह सो रही थी ।
लड़का सुबह मुँह-अँधेरे बेलों में से क्या चुन रहा था ?
पके हुए करेले
पके हुए तरबूज़
पके हुए खरबूज़े
पके हुए अंगूर
बाज़ार में खड़े लोग स्त्री के बारे में किस भाव से बात कर रहे थे ?
बड़े प्यार भाव से
बड़े शांत भाव से
बड़े गुस्से भाव से
बड़ी घृणा भाव से
बुढ़िया का बेटा कितने बरस का था ? और उसका क्या नाम था ?
बाईस बरस का और नाम भगवाना था ।
बाईस बरस का और नाम भगवान था ।
तेईस बरस का और नाम भगवान था ।
तेईस बरस का और नाम भगवाना था ।
" अरे इन लोगों का है ? ये कमीने लोग रोटी के टुकड़े के लिए जान देते हैं। " ये वाक्य किसने कहे ?
फुटपाथ पर खड़े एक आदमी ने
परचून की दुकान पर बैठे लाला जी ने
दाढ़ी खुजाते एक आदमी ने
उपर्युक्त में से कोई नहीं
