NEW
Font size
Worksheetsश्रम विभाजन और जाति प्रथा (१२ )
Total questions: 20
Worksheet time: 10mins
'श्रम विभाजन और जाति प्रथा' पाठ के लेखक हैं -
गजानन माधव मुक्तिबोध
हरिवंश राय बच्चन
भीम राव आंबेडकर
फणीश्वर नाथ रेणु
विडम्बना की बात की है -
मनुष्यों को जीवन भर एक ही पेशे में बांध दिया जाता है |
श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन किया जाता है |
इस युग में भी जातिवाद के पोषकों की कमी नहीं है |
जाति प्रथा गंभीर दोषों से युक्त है |
आर्थिक पहलू से भी जाति प्रथा हानिकारक है क्योंकि -
यह मनुष्य की स्वाभाविक प्रेरणा रूचि व आत्म - शक्ति को दबा कर उन्हें निष्क्रिय बना देती है |
जीवन और शारीरिक सुरक्षा की स्वतंत्रता नहीं देती |
नीच जाति के लोगों के साथ अस्पृश्यता का व्यवहार करती है |
समता का विरोध करती है |
बाबा साहेब का आदर्श समाज आधारित होगा -
शिक्षा , समता और स्वतंत्रता पर |
स्वतंत्रता , समानता और समता पर |
स्वतंत्रता , समता और भ्रातृता पर |
समानता ,शिक्षा और भ्रातृता पर |
समता शब्द विवाद रहा है -
अमेरिकन क्रांति के नारे में |
फ्रांसिसी क्रांति के नारे में |
जर्मन क्रांति के नारे में |
इटली की क्रांति के नारे में |
...........केवल कानूनी पराधीनता को ही नहीं कहा जा सकता |
जाति प्रथा
श्रम विभाजन
दासता
भ्रातृता
भाईचारे का वास्तविक रूप है -
पानी और चीनी का मिश्रण
पानी और दूध का मिश्रण
दूध और शक्कर का मिश्रण
दूध और तेल का मिश्रण
मनुष्य की क्षमता कितनी बातों पर निर्भर करती है -
दो बातों पर
तीन बातों पर
चार बातों पर
पांच बातों पर
वास्तव में निष्पक्ष निर्णय नहीं कहा जा सकता -
असमानता का दृष्टिकोण अपनाना |
जाति प्रथा का पालन करना |
पूर्ण सुविधा संपन्नों को ही उत्तम व्यवहार का हकदार मानना |
असमान व्यवहार को उचित मानना |
भुखमरी और बेरोजगारी का कारण है -
जाति प्रथा के अस्वाभाविक नियम
जाति प्रथा की प्रतिकूल परिस्थितियाँ
जाति प्रथा पर श्रम विभाजन
जाति प्रथा और पैतृक पेशा
'विडंबना' शब्द का अर्थ है -
असमानता
दोषपूर्ण
शोषण
दुर्भाग्य
श्रम विभाजन निश्चय ही सभ्य समाज की .......है |
निष्क्रियता
अपव्ययता
आवश्यकता
मजबूरी है
डॉ ० आम्बेडकर के इस भाषण का शीर्षक क्या है -
ट्रिस्ट विद डेस्टिनी
माय लाइफ इज माय मैसेज
आई हैव अ ड्रीम
एनिहिलेशन ऑफ़ कास्ट
डॉ ० आम्बेडकर के अनुसार आर्थिक पहलू से भी जाति - प्रथा हानिकारक क्यों है -
अस्वाभाविक नियमों में जकड़कर मनुष्य को निष्क्रिय कर देना |
स्वाभाविक नियम अवनति का कारण
परस्पर सहयोग मानव उन्नति में बाधक
नियमों को बनाने में संगठनों का ह्रास
जाति - प्रथा के श्रम विभाजन का आधार है -
मनुष्य की इच्छा
व्यक्तिगत रूचि
पूर्व - निर्धारित
व्यक्तिगत भावना
डॉ ० आम्बेडकर के अनुसार भारत में बेरोजगारी का प्रमुख कारण है -
रोजगार का न होना
पेशा परिवर्तन की अनुमति का न होना
रोजगार का आधिक्य
जाति - प्रथा में पेशे का निर्धारण कब हो जाता है -
मृत्यु के पश्चात्
गर्भधारण के समय
प्रशिक्षण के पश्चात्
वयस्क होने पर
पैतृक पेशे से क्या अभिप्राय है ?
सही रोजगार का चुनाव करना |
मनुष्य का पेशा माता - पिता के अनुसार होना |
श्रम विभाजन अपनी रूचि पर न होना
श्रम विभाजन और जाति प्रथा
श्रम विभाजन व्यक्तिगत रूचि पर आधारित न होने पर क्या दुष्परिणाम होते हैं -
व्यक्ति काम के लिए मारा - मारी करेगा |
व्यक्ति कार्य को अरुचिपूर्वक केवल विवशता पूर्वक करेगा |
दिल और दिमाग लगने के कारण कार्य कुशलता की प्राप्ति होगी |
दुर्भावना से ग्रस्त होकर टालू काम नहीं करेगा |
डॉ ० आम्बेडकर के भाषण का हिंदी रूपांतरण किया -
लालू प्रसाद यादव द्वारा
लल्लन सिंह द्वारा
ललई सिंह यादव द्वारा
डॉ ० भीम राव द्वारा
