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Worksheetsखानपान की बदलती तस्वीर
Total questions: 10
Worksheet time: 20mins
खानपान की बदलती तसवीर’ नामक पाठ के लेखक के नाम बताएँ।
रामचंद्र शुक्ल
शिवप्रसाद सिंह
प्रयाग शुक्ल
विजय तेंदुलकर।
खानपान की संस्कृति में बड़ा बदलाव कब से आया?
(a) पाँच-सात वर्षों में
(b) आठ-दस वर्षों में
(c) दस-पंद्रह वर्षों में
(d) पंद्रह-बीस वर्षों में
युवा पीढ़ी इनमें से किसके बारे में बहुत अधिक जानती है?
(a) स्थानीय व्यंजन
(b) खानपान की संस्कृति
(c) नए व्यंजन
(d) इनमें से कोई नहीं।
ढाबा संस्कृति कहाँ तक फैल चुकी है?
(a) दक्षिण भारत
b) उत्तर भारत तक
(c) पूरे देश में
(d) कहीं नहीं।
पाव-भाजी किस प्रांत का स्थानीय व्यंजन है?
(a) राजस्थान
(b) महाराष्ट्र
(c) गुजरात
(d) मध्य प्रदेश
किसी स्थान का खान-पान भिन्न क्यों होता है?
(a) मौसम के अनुसार, मिलने वाले खाद्य पदार्थ
(b) रुचि के आधार पर
(c) आसानी से वस्तुओं की उपलब्धता
(d) उपर्युक्त सभी
इनमें से किसे फास्ट फूड के नाम से जाना जाता है।
(a) सेव
(b) रोटी
(c) दाल
(d) बर्गर
पिछले दस-पंद्रह वर्षों से हमारी खानपान की संस्कृति में एक बड़ा बदलाव आया है। इडली-डोसा-बड़ा-साँभर-रसम अब केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं हैं। ये उत्तर भारत के भी हर शहर में उपलब्ध हैं और अब तो उत्तर भारत की ‘ढाबा’ संस्कृति लगभग पूरे देश में फैल चुकी है। अब आप कहीं भी हों, उत्तर भारतीय रोटी-दाल-साग आपको मिल ही जाएँगे। ‘फ़ास्ट फूड’ (तुरंत भोजन) का चलन भी बड़े शहरों में खूब बढ़ा है। इस ‘फ़ास्ट फ़ूड’ में बर्गर, नूडल्स जैसी कई चीजें शामिल हैं। एक ज़माने में कुछ ही लोगों तक सीमित ‘चाइनीज़ नूडल्स’ अब संभवतः किसी के लिए अजनबी नहीं रहें।
Question 1.
किस बात में बदलाव आया है?
(a) वेशभूषा में
(b) सोचने-विचारने में
(c) खानपान की संस्कृति में
(d) उपर्युक्त सभी
स्थानीय व्यंजन भी तो अब घटकर कुछ ही चीज़ों तक सीमित रह गए हैं। बंबई की पाव-भाजी और दिल्ली के छोले-कुलचों की दुनिया पहले की तुलना में बढ़ी ज़रूर है, पर अन्य स्थानीय व्यंजनों की दुनिया में छोटी हुई है। जानकार ये भी बताते हैं कि मथुरा के पेड़ों और आगरा के पेठे-नमकीन में अब वह बात कहाँ रही! यानी जो चीजें बची भी हुई हैं, उनकी गुणवत्ता में फ़र्क पड़ा है। फिर मौसम और ऋतुओं के अनुसार फलों-खाद्यान्नों से जो व्यंजन और पकवान बना करते थे, उन्हें बनाने की फुरसत भी अब कितने लोगों को रह गई है। अब गृहिणियों या कामकाजी महिलाओं के लिए खरबूजे के बीज सुखाना-छीलना और फिर उनसे व्यंजन तैयार करना सचमुच दुस्साध्य है?
Question 9
नई पीढ़ी को स्थानीय व्यंजनों से किस प्रकार ज्ञान का प्राप्त था?
(a) रुचि के साथ खाने का
(b) उन्हें गहराई तक जानती समझती है
(c) बहुत कम जानकारी है
(d) जानने की जिज्ञासा नहीं है।
हम खानपान से भी एक-दूसरे को जानते हैं। इस दृष्टि से देखें तो खानपान की नई संस्कृति में हमें राष्ट्रीय एकता के लिए नए बीज भी मिल सकते हैं। बीज भलीभाँति अंकुरित होंगे जब हम खानपान से जुड़ी हुई दूसरी चीजों की ओर भी ध्यान देंगे। मसलन हम उस बोली-बानी, भाषा-भूषा आदि को भी किसी-न-किसी रूप में ज्यादा जानेंगे, जो किसी खानपान-विशेष से जुड़ी हुई है। इसी के साथ ध्यान देने की बात यह है कि ‘स्थानीय’ व्यंजनों का पुनरुद्धार भी ज़रूरी है जिन्हें अब ‘एथनिक’ कहकर पुकारने का चलन है। ऐसे स्थानीय व्यंजन केवल पाँच सितारा होटलों के प्रचारार्थ नहीं छोड़ दिए जाने चाहिए। पाँच सितारा होटलों में वे कभीकभार मिलते रहें, पर घरों-बाज़ारों से गायब हो जाएँ तो यह एक दुर्भाग्य ही होगा। अच्छी तरह बनाई-पकाई गई पूड़ियाँ-कचौड़ियाँजलेबियाँ भी अब बाज़ारों से गायब हो रही हैं। मौसमी सब्जियों से भरे हुए समोसे भी अब कहाँ मिलते हैं ? उत्तर भारत में उपलब्ध व्यंजनों की भी दुर्गति हो रही है?
Question 1.
खानपान की नई संस्कृति का सबसे अधिक प्रभाव किस पर पड़ता है?
(a) सांस्कृतिक एकजुटता पर
(b) राष्ट्रीय एकता पर
(c) खानपान का नया स्वरूप
(d) इनमें से कोई नहीं
