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Worksheetsप्रश्नोत्तरी
Total questions: 20
Worksheet time: 10mins
'ऊहापोह' का समानार्थक शब्द है -
संकोच
अनिश्चय
विचार-विमर्श
दुविधा
महीने भर में मूर्ति बनाकर पटक देने में निहित भाव है-
आत्मविश्वास
दुविधा
व्यंग्य
उपेक्षा
हालदार साहब चौराहे पर पान खाने रुके तो उनके चेहरे पर मुस्कराहट फैल गई -
मूर्ति बहुत आकर्षक थी
मूर्ति को देखकर नेताजी के जीवन की अनेक घटनाएँ याद आने लगती थीं
नेताजी की मूर्ति पूरी नहीं थी
मूर्ति पर लगा चश्मा संगमरमर का न होकर चौड़े काले फ्रेम का असली चश्मा था
कैप्टन को क्या बात आहत करती थी ?
नेताजी की वक्ष तक की मूर्ति
मूर्ति का संगमरमर से बना होना
नेताजी की मूर्ति पर चश्मा न होना
मूर्ति का फौजी वर्दी में होना
पानवाले के लिए मजेदार बात थी -
नेताजी की मूर्ति के चेहरे पर चश्मा न होना
नेताजी की मूर्ति केवल वक्ष तक की होना
नेताजी की मूर्ति फौजी वर्दी में होना
नेताजी की मूर्ति का संगमरमर से निर्मित होना
'देशभक्ति' में प्रयुक्त समास है-
द्वन्द्व समास
तत्पुरुष समास
अव्ययीभाव
कर्मधारय
हालदार साहब दुखी थे-
शहीदों के त्याग-बलिदान की हँसी उड़ाने वाली कौम के भविष्य के बारे में सोचकर
नेताजी की प्रतिमा पर चश्मा न लगा होने से
भारत में बढ़ती हुई अराजकता के बारे में सोचकर
देश में बढ़ती हुई आतंकवादी घटनाओं पर विचार करके
'हृदयस्थली' का अर्थ है -
वक्षस्थल
केन्द्रीय स्थल
प्रसिद्ध बाज़ार
प्रसिद्ध स्थान
'हालदार साहब की आँखे भर आईं' क्योंकि-
उन्होंने मूर्ति की आँखों पर पत्थर का बना चश्मा लगा हुआ देखा
मूर्ति की आँखों पर नया कला चश्मा लगा था
मूर्ति की आँखों पर चश्मा नहीं लगा था
मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा लगा था
रास्ता चलते लोग जीप की ओर देखने लगे, क्योंकि -
जीप की गति बहुत तेज़ थी
जीप अचानक रूक गई थी
ड्राइवर ने तेज़ी से ब्रेक मारे थे
जीप नई और बहुत सुंदर थी
कहानीकार क्या संदेश देते हैं
सत्य का
अच्छाई का
वीरता का
देशभक्ति का
कहानी का नायक कौन है
मास्टर
कैप्टन
पानवाला
हालदार साहब
हालदार साहब निराश क्यों हो गए
मूर्ति पर चश्मा ना देख कर
कैप्टन को ना देखकर
पानवाले को देखकर
कस्बे को देखकर
हालदार साहब उस कस्बे से क्यों गुजरते थे
कंपनी के काम से
बाज़ार के काम से
पान खाने के लिए
चश्मा खरीदने के लिए
कहानी के लेखक नाम
स्वयं प्रकाश
नेताजी सुभाष चंद्र बोस
जवाहर लाल नेहरू
रविंद्रनाथ टैगोर
"यह तुम्हारा नेताजी का चश्मा हर बार बदल कैसे जाता है?" यह किसने कहा
नेताजी ने
हालदार साहब ने
पानवाले ने
नगरपालिका ने
पाठ में खुश मिजाज़ किसे बताया गया है?
पानवाले को
हालदार साहब को
चित्रकार को
मास्टर को
मूर्ति पर चश्मा क्यों नही था?
कप्तान छुट्टी पर था
कप्तान अपने गाँव गया हुआ था
कप्तान मर चुका था
हालदार साहब का ध्यान नहीं था
मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?
कैप्टन चश्मे वाला बस्ती में लोगों के बीच में देशभक्ति का संचार करके गया था
लोगों में देशभक्ति की भावना खत्म नहीं हुई है
लोगों के पास साधनों की कमी हो सकती है, पर देशभक्ति की भावना की नहीं
उपर्युक्त सभी
वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल!”
प्रस्तुत कथन का वक्ता और श्रोता कौन है?
वक्ता हालदार साहब , श्रोता कैप्टन चश्मे वाला
वक्ता कैप्टन चश्मे वाला, श्रोता हालदार साहब
वक्ता पानवाला, श्रोता हालदार साहब
वक्ता हालदार साहब , श्रोता पानवाला
