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Worksheetsछहढाला Quizz-01 on 2-May-2021
Total questions: 25
Worksheet time: 6mins
छहढाला किस विद्वान के द्वारा नहीं लिखी गई।
द्यानतराय जी
बुधजन राय जी
दौलत राम जी
टोडरमल जी
छहढाला जी ग्रंथ की तुलना किस ग्रंथ से की गई है।
नियमसार
गोमटसार
मोक्षमार्ग प्रकाशक
तत्वार्थ सूत्र
"लघु समयसार" और “गागर में सागर“ की उपमा किस ग्रंथ को दी गई।
नाटक समयसार
समयसार
छहढाला
जिनेंद्र अर्चना
पहली ढाल में वर्णन नहीं है।
निगोद गति के दुख का
मनुष्य गति के दुख का
नरक गति के दुखों का
मोक्ष के दुःखो का
अंबरीष जाति के देव कौन से नरक तक जाते हैं।
प्रथम
द्वितीय
तृतीय
चतुर्थ
निम्न में से कौन सा मेल गलत है।
भवनवासी - 10
व्यंतर - 8
ज्योतिषी - 4
वैमानिक - 2
प्रथम नरक की उत्कृष्ट आयु कितनी है।
33 सागर
22 सागर
1 सागर
3 सागर
त्रस के भेद कौन-कौन से हैं। सभी सही उत्तरो को सेलेक्ट करो
दो इंद्रिय
चार इंद्रिय
तीन इंद्रिय
जलकाय स्थावर
मनुष्य जीवन की तीन अवस्थाएं हैं। । सभी सही उत्तरो को सेलेक्ट करो
बुढ़ापा
बचपन
जवानी
मरण
ज्योतिषी देव का भेद नहीं है।
ग्रह
नक्षत्र
सूर्य
अग्नि
चारों गतियों में दुखदायक गतियां हैं । सभी सही उत्तरो को सेलेक्ट करो
निगोद गति
मनुष्य गति
देव गति
नरक गति
वैमानिक देवों के दो भेद नहीं हैं। सभी सही उत्तरो को सेलेक्ट करो
भूमंडल
तारागढ़
कल्पोतपन्न
कल्पातीत
मिथ्यात्व के भेद नहीं होते हैं।
2
3
5
4
सम्यकदर्शन का वर्णन कौन सी ढाल में है।
तीसरी ढाल
चौथी ढाल
पांचवी ढाल
छठवी ढाल
लींख,खटमल,बिच्छू,जू कौन से इंद्रिय जीव के उदाहरण हैं।
दो इंद्रिय
तीन इंद्रिय
चार इंद्रिय
पंच इंद्रिय
निम्न में से त्रस नहीं है।
चींटी
शंख
पतंगा
वायु
जो देव नाना प्रकार के देशों में निवास करते हैं।
भवनवासी
ज्योतिषी
वैमानिक
व्यंतर
7 नहीं होते हैं।
व्यसन
नरक
तत्व
लेश्या
देव के प्रकार हैं। सभी सही उत्तरो को सेलेक्ट करो
अदेव
कुदेव
सदेव
नदेव
स्थावर जीव के भेद है। सभी सही उत्तरो को सेलेक्ट करो
जलकाय
पृथ्वीकाय
वनस्पतिकाय
मूलकाय
सबसे अधिक दुखदायक अवस्था किस गति में होती है।
नरक गति अवस्था
त्रियंच गति अवस्था
निगोद अवस्था
देव गति अवस्था
संसार परिभ्रमण का कारण एकमात्र है।
कषाय
पाप
व्यसन
मिथ्यात्व
निम्न में से मेल (संबंधित) सही नहीं है।
मनुष्य गति - 9 माह
देव गति - 6 माह
निगोद अवस्था - 18 बार
नरक गति - 1 वर्ष
मिथ्यात्व का भेद नहीं है।
विनय
अज्ञान
एकांत
चोरी
भगवान नहीं होते हैं।
वीतरागी
सर्वज्ञ
18 दोषों से रहित
सबका भला करने वाले
