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Bhagavad Gita As It Is DAY-05 (1.41-46, 2.1-4)

Total questions: 24

Worksheet time: 1hrs 6mins

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Class
Date
1.

कुल के पितरों को समय समय पर जल तथा पिण्डदान दिए जाने का क्या लाभ है? (1.41)

a)

पिण्डदान के दौरान विष्णु को अर्पित भोजन के उच्छिष्ट प्रसाद खाने से सारे पापकर्मों से उद्धार हो जाता है

b)

प्रेतयोनि या अन्य प्रकार के दुखमय जीवन से उद्धार होता है

2.

भक्ति का जीवन-यापन करने वालों को पिण्डदान आदि अनुष्ठान करने आवश्यकता क्यों नहीं होती? (1.41)

a)

केवल भक्ति करने से मनुष्य सैकड़ों, हजारों पितरों को उबार सकता है

b)

श्रीभगवान् की सेवा करने से ऐसे दायित्व अपने आप पूरे हो जाते हैं

c)

16 माला, 4 नियम, भागवत श्रवण, स्वाध्याय और फिर क्विज़ के बाद समय ही कहाँ बचता है

3.

सनातन वर्णाश्रम धर्म द्वारा निर्धारित चारों वर्णों के लिए नियोजित सामुदायिक योजनाओं और परिवार कल्याण कार्यक्रमों का क्या मुख्य उद्देश्य है? (1.42)

a)

चर्म तुष्टि

b)

औद्योगिक विकास

c)

सबको आवास, सर्वत्र विद्युत् प्रकाश

d)

चरम मोक्ष की प्राप्ति

4.

जीवन का वास्तविक उद्देश्य/स्वार्थ क्या है? (1.42)

a)

धन

b)

यश

c)

बल

d)

सौंदर्य

e)

विष्णु/कृष्ण

5.

वास्तविक ज्ञान प्राप्त करने की क्या विधि है? (1.43)

a)

इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश

b)

परीक्षक से पहचान

c)

जिस व्यक्ति ने पहले से ज्ञान प्राप्त कर रखा है उस व्यक्ति द्वारा सहायता

6.

कैसे व्यक्ति को निश्चित रूप से नरक भेजा जायेगा? (1.43)

a)

जो लोग कुल-धर्म का विनाश करते हैं

b)

जो मृत्यु के पूर्व पापकर्मों के लिए प्रायश्चित नहीं करते

c)

जो भगवद्गीता घर में रखते तो हैं पर पढ़ते नहीं

7.

अर्जुन क्यों अपने सम्बन्धियों को नहीं मारना चाहता? (1.44)

a)

राज्यसुख भोगने की इच्छा से प्रेरित ऐसा कार्य जघन्य पापकर्म है

b)

साधु भक्त होने के कारण अर्जुन सदाचार के प्रति जागरूक है

8.

क्षत्रियों के युद्ध नियमों की क्या प्रथा है? (1.45)

a)

शत्रु कहीं भी व कैसी भी स्थिति में हो, देखते ही मार दो

b)

अपने से शक्तिशाली शत्रु को देखते ही भाग जाओ

c)

निहत्थे तथा विमुख शत्रु पर आक्रमण न करो

9.

दूसरा दल युद्ध के लिए कितना उद्यत है, इस पर विचार किये बिना बल्कि उनकी हत्या करने को जघन्य पाप देखने वाली अर्जुन की दयार्द्रता (हृदय की कोमलता) का क्या कारण है? (1.45)

a)

वह भावी विनाश/रक्तपात से डर रहा है

b)

विशाल शत्रुसेना को देखकर वह कांप रहा है

c)

वह भगवान् का महान भक्त है

10.

अर्जुन ने कौरवों के लिए क्या शब्द का प्रयोग किया? (1.45)

a)

कौरव

b)

भारत

c)

धार्तराष्ट्रा

d)

आजमीढय

11.

अर्जुन के आत्मज्ञान प्राप्त करने की क्या योग्यता बताई गयी है? (1.46)

a)

दयालु तथा कोमलहृदय व्यक्ति

b)

भगवान् की सेवा में रत

c)

शोक से संतप्त

d)

धनुष-बाण एक ओर रख कर रथ पर आसीन

12.

कृष्ण को मधुसूदन अर्थात मधु नामक असुर का वध करने वाले कहने का क्या कारण है? (2.1)

a)

ताकि वे कौरव रूपी असुरों का भी वध करें

b)

ताकि वे कर्तव्य से विमुख करने वाले अज्ञान रूपी असुर का वध करें

13.

इनमें से क्या गलत है? (2.1)

a)

भौतिक पदार्थ के प्रति करुणा, शोक करने वाला शूद्र है

b)

शाश्वत आत्मा के प्रति करुणा ही आत्मसाक्षात्कार है

c)

डूबते हुए मनुष्य के वस्त्रों के लिए करुणा बुद्धिमानी है

d)

भगवद्गीता का उपदेश शोक विनष्ट करता है

14.

भगवान् भगवद्गीता के अपने पहले ही शब्दों में अर्जुन को क्या कहते हैं? (2.2)

a)

अर्जुन के बुद्धिमतापूर्ण तर्कों के लिए बधाई देते हैं

b)

सेवा के अवसर के लिए धन्यवाद देते हैं

c)

अर्जुन के संताप को अनार्य, अस्वर्ग्यं, अकीर्ति-करं कहकर भर्तस्ना करते हैं

15.

परम सत्य का बोध ज्ञान की जिन तीन अवस्थाओं में होता है, उनमें से कौन बाकी दोनों का उद्गम है? (2.2)

a)

ब्रह्म या निर्विशेष सर्वव्यापी चेतना

b)

परमात्मा या भगवान् का अन्तर्यामी रूप जो समस्त जीवों के हृदय में है

c)

भगवान् या श्रीभगवान् कृष्ण

16.

ब्रह्म, परमात्मा तथा भगवान् के विषय में समझाने के लिए यहां किसका दृष्टांत प्रस्तुत किया गया है? (2.2)

a)

ट्रेन का ड्राइवर व यात्री, ट्रेन के डब्बे, ट्रेन के इंजन से निकले वाला प्रकाश

b)

सूर्यलोक, सूर्यसतह, सूर्यप्रकाश

c)

पहाड़ों में पेड़ व मकान, भूरा पहाड़, धुंधला बादलनुमा पहाड़

17.

भगवान् शब्द की व्याख्या छह ऐश्वर्यों से युक्त वाले के रूप में करने वाले पराशर मुनि किसके पिता हैं? (2.2)

a)

ब्रह्माजी

b)

नारदमुनि

c)

व्यासदेव जी

d)

वशिष्ठमुनि

18.

श्रीकृष्ण को स्वयं भगवान् के रूप में स्वीकार करने वाला ब्रह्म-संहिता का श्लोक कौन सा है? (2.2)

a)

वदन्ति तत्तत्त्वविदस्तत्त्वं यज्यानमद्वयम् |

ब्रह्मेति परमात्मेतिभगवानिति शब्द्यते ||

b)

ईश्र्वरः परमः कृष्णः सच्चिदानन्द विग्रहः |

अनादिरादिर्गोविन्दः सर्वकारणकारणम् ||

c)

एते चांशकलाः पुंसः कृष्णस्तु भगवान् स्वयम् |

इन्द्रारिव्याकुलं लोकं मृडयन्ति युगे युगे ||

19.

अनार्य कौन कहलाते हैं? (2.2)

a)

जो जीवन के मूल्य को जानते हैं

b)

जिनकी सभ्यता आत्म-साक्षात्कार पर निर्भर करती है

c)

जिनके जीवन का उद्देश्य परम सत्य, विष्णु या भगवान् का साक्षात्कार है

d)

जिन पुरुषों को भौतिक बन्धन से मुक्ति का कोई ज्ञान नहीं होता

20.

कर्तव्य-पथ से विचलित करने वाली करुणा से क्या होता है? (2.2)

a)

आध्यात्मिक जीवन की प्रगति करने में सहायक

b)

संसार में ख्याति प्राप्त की जा सकती है

c)

कृष्ण इस प्रकार की करुणा का अनुमोदन नहीं करते

21.

किस शब्द के द्वारा भगवान् अर्जुन को नपुंसकता को प्राप्त कहते हुए झकझोर रहे हैं? (2.3)

a)

क्लैब्यं

b)

पार्थ

c)

क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं

d)

परन्तप

22.

अर्जुन किन्हें पूजनीय कहकर बाण चलाने से झिझक रहा है? (2.4)

a)

भीष्म तथा द्रोण

b)

दुर्योधन तथा दुःशासन

23.

सम्मानीय व्यक्तियों के प्रति क्या शिष्टाचार है? (2.4)

a)

यदि वे आक्रमण भी करें तो उन पर उलट कर आक्रमण नहीं करना चाहिए

b)

उनसे वाग्युद्ध भी न किया जाय

c)

ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए

24.

आप अर्जुन की भाँति किन-किन अवस्थाओं में भौतिक पदार्थों के प्रति करुणा के कारण कर्तव्य-पथ से विचलित हो जाते हैं, जिससे बचने के लिए आप मधुसूदन कृष्ण से प्रार्थना करना चाहेंगे?

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