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WorksheetsKṛṣṇa Book Practice Quiz (Chapter 81-82)
Total questions: 21
Worksheet time: 42mins
भगवान् श्रीकृष्ण को क्या कहा जाता है? (अध्याय 81)
ब्रह्मदेव
ब्राह्मण देव
भ्रमदेव
ब्रह्मण्यदेव
भगवान् श्रीकृष्ण किस भेंट को स्वीकार करते हैं? (अध्याय 81)
जो बहुत बहुमूल्य हो
जो उपेक्ष्य न हो
जो प्रेम भक्ति से सिक्त हो
जो बहुत ऐश्वर्यपूर्ण हो
श्रीकृष्ण को अर्पित वस्तु या श्रीकृष्ण के लिए किये गए कार्य का क्या लाभ होता है? (अध्याय 81)
सम्पूर्ण सृष्टि तुष्ट हो जाती है
सभी के लिए सर्वोच्च कल्याणकारी होता है
श्रीकृष्ण को अर्पित लाभ सभी जीवों में वितरित होता है
भाग्यलक्ष्मी रुक्मिणी व्यक्तिगत रूप से ऐश्वर्य प्रदान करती हैं
स्वयं को एक छदाम (धन) भी न दिए जाने पर भी सुदामा ने श्रीकृष्ण को अपने प्रति दयालु क्यों बताया? (अध्याय 81)
दरिद्र व्यक्ति भौतिक ऐश्वर्य के प्रति पागल होकर भगवान् को भूल जाता है
श्रीकृष्ण अपने नवदीक्षित भक्तों को मांगने पर भी भौतिक ऐश्वर्य प्रदान नहीं करते
जब तक भक्त पूर्णरूपेण निराश्रय नहीं हो जाता श्रीकृष्ण उसे भौतिक ऐश्वर्य प्राप्त नहीं कराते
सुदामा ने अपनी कुटिया के स्थान पर भव्य महल देखकर भगवान् श्रीकृष्ण की उदारता के विषय में क्या कहा? (अध्याय 81)
जैसे बादल कृषक को दिन में व्याकुल किये बिना, उसकी संतुष्टि के लिए रात्रि में भारी वर्षा करते हैं
वे आत्मनिर्भर हैं पर भक्त से प्राप्त किंचित प्रेम को वे महान बहुमूल्य उपहार मानते हैं
भगवान् को अर्पित वस्तु लाखों गुणा होकर वापिस आती है, कोई हानि नहीं उठाता
एक शुभचिंतक पिता अवयस्क पुत्र को अधिक धन न देकर, उसके व्यस्क होने पर सारा खजाना दे देता है
भौतिक ऐश्वर्य कब पदच्युति/पतन का कारण बनता है? (अध्याय 81)
यदि उसका उपयोग भगवान् की सेवा के लिए किया जाता है
यदि उसका उपयोग इन्द्रियतृप्ति के लिए किया जाता है
सुदामा विप्र किस प्रकार के ब्राह्मण थे जो श्रीकृष्ण को अतिप्रिय हैं? (अध्याय 81)
ब्राह्मण पण्डित - जो भौतिक आनंद से अनासक्त, शास्त्रों में विद्वान् गुणी ब्राह्मण हैं
ब्राह्मण वैष्णव - जो गुणी होने के साथ-साथ भगवान् श्रीकृष्ण के भक्त हैं
शुकदेव गोस्वामी के अनुसार सुदामा विप्र व श्रीकृष्ण के इतिहास के श्रवण का क्या परिणाम है? (अध्याय 81)
यह ज्ञात होगा कि श्रीकृष्ण कितने दयालु हैं
श्रोता सुदामा विप्र के समान गुणी बन जाएगा
भगवान् श्रीकृष्ण के वैकुण्ठलोक में स्थानांतरित हो जाएगा
पूर्णसूर्यग्रहण के अवसर पर कुरुक्षेत्र में किस स्थान पर एकत्रित होना निश्चित हुआ? (अध्याय 82)
ज्योतिसर
समन्त-पंचक
ब्रह्मसरोवर
बाण गंगा
जब यदुवंश के सभी सदस्य कुरुक्षेत्र गए तो द्वारका की सुरक्षा के लिए वहां कौन रुके? (अध्याय 82)
अक्रूर एवं वसुदेव
प्रद्युम्न एवं अनिरुद्ध
साम्ब एवं कृतवर्मा
अनिरुद्ध एवं कृतवर्मा
समन्त-पंचक में श्रीपरशुराम ने ____ बार विश्व के क्षत्रियों का वध करके प्रायश्चित हेतु महायज्ञों का सम्पादन किया | (अध्याय 82)
7
14
21
28
शास्त्रीय धार्मिक रीति के अनुसार यदुवंशियों ने सूर्यग्रहण के अवसर पर कुरुक्षेत्र में क्या किया? (अध्याय 82)
पूजनीय तीर्थ समन्त-पंचक की पांच भव्य झीलों में स्नान
पापफल नष्ट करने के लिए सम्पूर्ण ग्रहण काल में उपवास
ग्रहणसमय ब्राह्मणों को हजारों स्वर्णालंकृत गायों का दान
ब्राह्मणों को मक्खन में बना उत्तम भोजन
इनमें से कौन सा पक्का भोजन है? (अध्याय 82)
दाल-चपाती
चावल-सामान्य तरकारी
फल-सलाद
कचौरी-समोसा
यदुवंशी भी कर्मकाण्डियों के समान औपचारिक कार्यों में लगे थे, फिर दोनों में अंतर क्या है? (अध्याय 82)
कर्मियों की आकांक्षा इन्द्रियतृप्ति की होती है - अच्छी स्थिति, पत्नी, घर, बच्चे व धन
यदुवंशी केवल कृष्ण-भक्ति के विषय में ही सोचते थे, अन्य कुछ नहीं
श्रील रूप गोस्वामी के अनुसार युक्त वैराग्य अथवा ज्ञान एवं वैराग्य का क्या अर्थ है? (अध्याय 82)
नीरस चिंतन
कार्यों का त्याग
केवल कृष्ण के सम्बन्ध में सुनना व कार्य करना
श्रीकृष्ण की वृन्दावन, मथुरा, द्वारका सभी लीलाओं का दर्शन करने का सौभाग्य किन्हें प्राप्त हुआ? (अध्याय 82)
यशोदा
देवकी
रोहिणी
कुंतीदेवी अपने किस भाई से दीर्घकाल के बाद कुरुक्षेत्र में मिलीं? (अध्याय 82)
कुन्तिभोज
वसुदेव
उग्रसेन
श्रीकृष्ण
श्रीकृष्ण द्वारा कुरुक्षेत्र में गोपियों को दिए गए उपदेश को किस आधार पर समझा जा सकता है? (अध्याय 82)
अचिन्त्य भेदाभेद
मायावाद
वह कृष्णभावना क्या है जिसमें हम कभी भी श्रीकृष्ण से अलग नहीं होते हैं? (अध्याय 82)
विराटजगत श्रीकृष्ण की शक्ति के प्रदर्शन के बाहर है
शक्तिमान से शक्ति स्वतंत्र नहीं है
भौतिक शक्ति तो जीव के भोग के लिए है
भौतिक शक्ति जीवात्मा की इच्छानुसार कार्य करती है
कैसी चेतना में व्यक्ति "जीवकोश" (मिथ्या अहंकार) के बंधन से मुक्त होकर सदैव कृष्णभावना में बने रह सकता है? (अध्याय 82)
स्वयं को भौतिक जगत का भोक्ता मानकर
प्रत्येक वस्तु का उपयोग कृष्ण सेवा में करते हुए
क्या आप हर कार्य, हर वस्तु को कृष्ण से सम्बंधित देखते हुए गोपियों की तरह क्या हमेशा कृष्ण का संग प्राप्त करना चाहेंगे?
हां
नहीं
