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WorksheetsBhagavad Gita As It Is DAY-52 (13.23-32)
Total questions: 20
Worksheet time: 2hrs 50mins
किस शब्द से भगवान् बताते हैं कि परमात्मा हमारे कार्यों के साक्षी होते हैं? (13.23)
उपद्रष्टानुमन्ता च
भर्ता भोक्ता महेश्वरः
परमात्मेति चाप्युक्तो
देहेऽस्मिन्पुरुषः परः
परमेश्वर के आदेश को अस्वीकार करने और प्रकृति पर प्रभुत्व जताकर स्वतन्त्रतापूर्वक कर्म करने की प्रवृत्ति के कारण जीव परमेश्वर की कौन सी शक्ति कहलाता है? (13.23)
कूटस्था
तटस्था
कायस्था
राजस्था
कब तक परमेश्वर मित्र रूप में परमात्मा की तरह जीव के भीतर रहते हैं? (13. 23)
जब तक वह भौतिक शक्ति द्वारा बद्ध रहता है
सदैव, भौतिक और आध्यात्मिक दोनों जगतों में
जब तक जीव आध्यात्मिक जगत से बाहर न जाए
अद्वैतवादी चिंतकों को आत्मा-परमात्मा का अंतर कैसे बताएँगे? (13.23)
श्लोक में उनका नाम परमात्मा है, आत्मा नहीं
परमात्मा साक्षी, अनुमतिदाता तथा परम भोक्ता है
जीव भुक्त है और भगवान् भोक्ता या पालक हैं
वे जीवात्मा से भिन्न हैं, वे पर हैं, दिव्य हैं
इनमें से क्या सही नहीं है? (13.23)
अल्प स्वतन्त्रता के कारण जीव निरन्तर आध्यात्मिक प्रकाश की संगति ठुकराता है
स्वतन्त्रता का दुरोपयोग ही बद्ध प्रकृति में जीव के भौतिक संघर्ष का कारण है
भगवान् जीव को आध्यात्मिक शक्ति में वापस बिल्कुल नहीं ले जाना चाहते
प्रकृति, परमात्मा, आत्मा तथा इनके अन्तःसम्बन्ध की स्पष्ट जानकारी हो जाने पर मनुष्य को क्या लाभ प्राप्त होता है? (13.24)
मुक्त होने का अधिकारी बनता है
संसार में आ गिरता है
पुनर्जन्म निश्चित होगा
संसार में फिर कभी नहीं आने व सच्चिदानन्दमय जीवन बिताने के लिए वैकुण्ठ-लोक भेजे जाने के लिए व्यक्ति को क्या करना होता है? (13.24)
उसे प्रामाणिक व्यक्तियों, साधु-पुरुषों तथा गुरु की संगति में निजी प्रयास द्वारा अपनी स्थिति समझनी है
जिस रूप में भगवान् ने भगवद्गीता कही है, उसे समझ कर आध्यात्मिक चेतना या कृष्णभावनामृत को प्राप्त करना है
इनमें से कौन कौन आध्यात्मिक ज्ञान से विहीन हैं? (13.25)
नास्तिक
अज्ञेयवाादी
संशयवादी
अद्वैतवादी
भगवद्भक्त
सांख्य दार्शनिक इस भौतिक जगत का विश्लेषण 24 तत्त्वों में करते हुए किसे पच्चीसवाँ तत्त्व मानते हैं? (13.25)
महत्तत्व
प्रधान
आत्मा
भगवान्
इनमें से कौन क्रमशः कृष्णभावनामृत की भक्ति के स्तर तक पहुँच जाते हैं? (13.25)
जो सांख्य दार्शनिक आत्मा को भौतिक से परे समझते हैं
जो लोग निष्काम भाव से कर्म करते हैं
जो ध्यान द्वारा परमात्मा अपने अन्दर खोज लेते हैं
जो सदैव अद्वैतवाद की स्थापना करना चाहते हैं
भगवान् किन शब्दों में कहते हैं कि प्रामाणिक पुरुषों से श्रवण करने की मनोवृत्ति वाले लोग जन्म तथा मृत्यु पथ को पार कर जाते हैं? (13.26)
अन्ये त्वेवमजानन्त:
श्रुत्वान्येभ्य उपासते
तेऽपि चातितरन्त्येव
मृत्युं श्रुतिपरायणा:
किस प्रकार एक भाग्यशाली सामान्य व्यक्ति को भी क्रमशः शुद्ध भक्त का पद प्राप्त हो जाता है? (13.26)
शुद्ध भक्त की शरण मिल सके
शुद्ध भक्त से आत्म-साक्षात्कार के विषय में श्रवण करे
शुद्ध भक्त के पदचिन्हों पर चल सके
इनमें से कौन ब्रह्माण्ड की सृष्टि के भी पूर्व से अस्तित्व में है? (13.27)
भौतिक अपरा प्रकृति
परा प्रकृति अर्थात् जीव
परा तथा अपरा प्रकृतियों के नियामक परमेश्वर
आध्यात्मिक विषयों के वास्तविक ज्ञाता की संगति के अभाव में अज्ञानी व्यक्ति की क्या समझ होती है? (13.28)
शरीर ही सबकुछ है और जब यह शरीर विनष्ट हो जाता है, तो समझो सब कुछ नष्ट हो गया
शरीर के विनष्ट होने पर आत्मा तथा परमात्मा का अस्तित्व बना रहता है
मन की कैसी अवस्था में व्यक्ति क्रमशः वैकुण्ठ-लोक की ओर बढ़ता जाता है? (13.29)
यदि वह भगवान् की उपस्थिति प्रत्येक वस्तु में देखता है
यदि मन इन्द्रियतृप्तिकारी कार्यों में लीन रहता है
इनमें से क्या गलत है? (13.30)
इच्छाओं के कारण ही मनुष्य दुख भोगता है या सुख पाता है
शरीर परमात्मा के निर्देशानुसार प्रकृति द्वारा बनाया गया है
शरीर मनुष्य के पूर्व इच्छाओं के अनुसार प्राप्त होता है
आत्मा एक यंत्र है जिसे परमेश्वर ने निर्मित किया है
किसी को देवता, किसी को मनुष्य, कुत्ता, बिल्ली आदि के रूप में देखना किस कारण से है? (13.31)
देहात्मबुद्धि
अध्यात्मबुद्धि
आत्मा द्वारा विभिन्न प्रकार के शरीर प्राप्त करने का क्या कारण है? (13.31)
जीव की विभिन्न इच्छाओं के कारण
भौतिक प्रकृति के सम्पर्क से
जीव (आत्मा) और शरीर के विषय में क्या सही है? (13.32)
जीव उत्पन्न होता है
भौतिक शरीर का जन्म होता है
शरीर दिव्य है, वह विनष्ट नहीं किया जा सकता
शरीर किसी भौतिक कार्य में प्रवृत्त नहीं होता
शरीर, जीवात्मा और परमात्मा के विषय में आपकी क्या समझ है?
