WorksheetsKṛṣṇa Book Practice Quiz (Chapter 41-42)
Total questions: 19
Worksheet time: 50mins
अक्रूर जी कृष्ण बलराम को लेकर मथुरा की सीमा के निकट कब पहुंचे? (अध्याय 41)
सूर्योदय
दोपहर
सूर्यास्त
रात्रि
वृन्दावन के अन्य नागरिक किसके नेतृत्व में कृष्ण-बलराम से पहले ही मथुरा पहुँच चुके थे? (अध्याय 41)
नन्द तथा सुनन्द
नन्द तथा उपनन्द
जय तथा विजय
श्रीदामा तथा सुदामा
मथुरा पहुँचने के बाद अक्रूर सबसे पहले कहाँ गए? (अध्याय 41)
कंस को श्रीकृष्ण के आगमन की जानकारी देने
श्रीकृष्ण को लेकर अपने घर
गंगाजल के विषय में अक्रूर जी ने क्या कहा? (अध्याय 41)
कृष्ण के पादपद्मों से निकला पसीना
उसके सम्पर्क से बलि महाराज ने अंततः मुक्ति प्राप्त की
गंगाजल को शिवजी भी अपने शीश पर धारण करते हैं
भगीरथ के पूर्वज भी इससे पवित्र होकर स्वर्ग सिधारे
नगर दर्शन करते हुए कृष्ण-बलराम ने मथुरा में क्या-क्या देखा? (अध्याय 41)
उच्च कोटि की स्फटिक शिला के प्रवेश द्वार और शुद्ध कंचन के गोपुरम
चारों तरफ फ़ैली हुई नहरें
सुन्दर उपवन व स्वर्ण से अलंकृत चौराहे
एक जैसे प्रतीत होते मूल्यवान रत्नों से सजे घर
लक्ष्मीपति श्रीकृष्ण मथुरा के बाजारों में किस की भांति चल रहे थे? (अध्याय 41)
सर्प
हिरण
गजराज
कछुए
मथुरा की नारियों ने कृष्ण-बलराम का कैसा स्वागत किया? (अध्याय 41)
असीमित भावातिरेक में नेत्रों से प्रत्यक्ष दर्शन किया
दोनों को अपने हृदय में ले जाकर इच्छानुसार आलिंगन किया
उनके मधुर-मुस्कानयुक्त दर्शन से तृप्त हो गयी
महलों की अटारियों पर चढ़कर उनपर पुष्पवर्षा करने लगीं
इनमें से कौन भक्त नहीं था जिनसे भगवान् मथुरा के राजमार्ग पर मिले? (अध्याय 41)
धोबी, दर्जी, माली के प्रसंगों के अनुसार भगवान् तथा भक्तों के विषय में क्या-क्या सही है? (अध्याय 41)
कृष्ण को सर्वश्रेष्ठ वस्तु देने से समस्त सुख-सौभाग्य मिलता है
कृष्णभावनाभावित भक्त इन्द्रियभोगों व भौतिक सुखों से वंचित रहते हैं
जीवन-अंत में भक्त को वैकुण्ठ या गोलोक वृन्दावन में प्रवेश मिलता है
भक्त केवल अपनी प्रगति से संतुष्ट न होकर लोककल्याण कार्य करता है
मथुरा में कृष्ण-बलराम को अपने घर लाकर पुष्पमाला अर्पित करने वाले माली का क्या नाम था? (अध्याय 41)
सुबल
सुदामा
सुघड़
सुनन्द
कुब्जा किसके लिए चन्दन लेप का पात्र लिए जा रही थी? (अध्याय 42)
कृष्ण-बलराम के लिए
कंस के लिए
कंस की रानियों के लिए
कंस के पिता के लिए
मथुरा पहुँचने पर पहले ही दिन कृष्ण-बलराम किसके घर में गए? (अध्याय 41-42)
अक्रूर जी
कुब्जा, कुबड़ी युवती
सुदामा माली
भक्त दर्जी
कृष्णभावनाभावित भक्त द्वारा कृष्ण की दिव्य प्रेमाभक्ति का क्या प्रभाव होता है? (अध्याय 42)
श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने का एकमात्र मार्ग
भक्त को तत्काल सर्वश्रेष्ठ गति प्राप्त होती है
भक्त सभी दैवी गुणों से युक्त हो जाता है
भक्त फटेहाल, दुखी, निर्धन, बदसूरत, भिखारी हो जाता है
कृष्ण ने मथुरा में अपनी पहली रात्रि कहाँ बिताई? (अध्याय 42)
मथुरा नगर के अतिथिगृह में
अक्रूर जी के निवास स्थान पर
वसुदेव - देवकी के साथ
नगर की सीमा पर अन्य ग्वाल-बाल सखाओं के साथ
कंस के धनुर्यज्ञ के निमित्त धनुष कैसा था जिसे कृष्ण ने हाथी द्वारा खेत में गन्ने के समान तोड़ दिया? (अध्याय 42)
छोटा सा
अत्यंत विशाल
आकाश के इंद्रधनुष के समान
उसकी ध्वनि से धरती आकाश गूँज उठे
मथुरा की पहली रात्रि में कृष्ण शांतिपूर्वक विश्राम कर रहे थे तब कंस की क्या स्थिति थी? (अध्याय 42)
निश्चिन्त होकर आराम से सो रहा था
समस्त रात्रि विश्राम न कर सका
अपनी आसन्न मृत्यु के विषय सोचता रहा
अनेकानेक अशुभ लक्षण देखता रहा
कंस ने मृत्यु से पिछली रात्रि में क्या लक्षण नहीं अनुभव किया? (अध्याय 42)
दर्पण में अपना सिर नहीं दिखा
अपनी छाया में छिद्र दिखाई दिए
स्वयं को गधों से खींची जा रही गाड़ी पर देखा
कानों में श्रील प्रभुपाद द्वारा हरे-कृष्ण कीर्तन सुनाई दिया
नन्द आदि ग्वालों को कंस की रंगभूमि में कहाँ आसन दिया गया? (अध्याय 42)
मथुरावासियों के बीच में
विशेषरूप से निर्मित्त मंच पर
राजा के मंच से दूर दूसरी ओर
राजा के मंच के समीप
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