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Bhagavad Gita As It Is DAY-22 (5.8-17)

Total questions: 20

Worksheet time: 2hrs 50mins

Name
Class
Date
1.

कोई भी कार्य किन निकट व दूरस्थ कारणों पर निर्भर है? (5.8-9)

a)

कर्ता

b)

कर्म

c)

अधिष्ठान

d)

प्रयास

e)

भाग्य

2.

चलना, बोलना, मल त्यागना आदि किस के कार्य हैं? (5.8-9)

a)

ज्ञानेन्द्रियों के

b)

कर्मेन्द्रियों के

3.

इनमें से क्या सही है? (5.8-9)

a)

भौतिक चेतना में इन्द्रियाँ कृष्ण की इन्द्रियों की तुष्टि में लगी रहती हैं

b)

कृष्णभावनामृत में इन्द्रियाँ इन्द्रियतृप्ति में लगी रहती हैं

c)

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति कभी भी इन्द्रियों के कार्यों से प्रभावित नहीं होता

4.

कर्मफलों को कृष्ण को समर्पित करके, आसक्ति रहित होकर कर्म करने वाले की, पाप से अप्रभावित स्थिति की, किससे तुलना की गयी है? (5.10)

a)

जैसे जिव्हा दांतों के मध्य रहती है

b)

जिस प्रकार कमलपत्र जल से अस्पृश्य रहता है

c)

जैसे हाथी कुत्तों के बीच घूमता है

d)

जैसे गुलाब काँटों के बीच खिलता है

5.

प्रकृति के तीन गुणों की समग्र अभिव्यक्ति को क्या कहा जाता है? (5.10)

a)

अपान

b)

महान

c)

समान

d)

प्रधान

e)

व्यान

6.

कृष्णभावनामृत-विहीन पुरुष एवं कृष्णभावनाभावित व्यक्ति के कार्य करने में क्या अंतर है? (5.10)

a)

कृष्णभावनामृत-विहीन पुरुष शरीर एवं इन्द्रियों को अपना स्वरूप समझ कर कर्म करता है, अतः इन्द्रियतृप्ति में रत रहता है

b)

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति यह समझ कर कर्म करता है कि वह देह कृष्ण की सम्पत्ति है, अतः इसे कृष्ण की सेवा में प्रवृत्त होना चाहिए

7.

कृष्णभावनामृत की पूर्णावस्था में कर्म करता हुआ जीवन्मुक्त व्यक्ति क्या सोचता है? (5.11)

a)

वह भौतिक शरीर है अथवा यह शरीर उसका है

b)

वह यह शरीर नहीं है और न यह शरीर ही उसका है

c)

वह स्वयं कृष्ण का है

d)

उसका यह शरीर कृष्ण की सम्पत्ति है

8.

भागवत के अनुसार किसी कर्म के फल की चिन्ता का कारण क्या है? (5.12)

a)

परमसत्य के ज्ञान का अभाव

b)

द्वैतभाव में रहकर कर्म करना

c)

कृष्ण के प्रति आसक्ति

d)

इन्द्रियतृप्ति के लिए लोभ

e)

कर्मों के प्रति आसक्ति

9.

देहधारी जीवात्मा ____ द्वारों वाले नगर (भौतिक शरीर) में वास करता है | (5.13)

a)

5

b)

7

c)

9

d)

11

e)

13

10.

श्वेताश्वतर उपनिषद के अनुसार बद्धावस्था में जीव स्वयं को शरीर मानता है जिसके द्वार हैं - _____ | (5.13)

a)

दो आँखे

b)

दो नथुने

c)

दो कान

d)

एक मुँह

e)

गुदा और उपस्थ

11.

पदार्थ, जो जीव से भिन्न है, भगवान् की _____ प्रकृति है | (5.14)

a)

अपरा

b)

परा

12.

मनुष्य की समस्त अशान्ति से रक्षा कैसे हो सकती है? (5.14)

a)

भवसागर के बीच जीवन-संघर्ष में जी-जान से लड़े

b)

सागर की लहरों पर अपने पौरुष से बाँध बना ले

c)

अपने आपको शरीर मानकर भोग करता रहे

d)

दिव्य कृष्णभावनामृत द्वारा समुद्र के बाहर आए

13.

विभुः शब्द का क्या अर्थ है? (5.15)

a)

सर्वज्ञ परमेश्वर जो असीम ज्ञान, धन, बल, यश, सौन्दर्य तथा त्याग से युक्त है

b)

जीव जो परा प्रकृति के कारण ज्ञान से पूर्ण है तो भी वह अपनी सीमित शक्ति के कारण अज्ञान के वशीभूत हो जाता है

14.

जीव परा प्रकृति का होने पर भी कैसे भौतिक इच्छाओं के कारण उलझ जाता है? (5.15)

a)

जीव अपनी इच्छाओं से मोहग्रस्त हो जाता है

b)

इच्छा जीव को बद्ध करने के लिए सूक्ष्म बन्धन है

c)

इच्छाओं को पूरा करने में जीव सर्वशक्तिमान है

d)

अज्ञान से मोहित होकर कर्म व फल की श्रृंखला शुरू करता है

15.

भगवान् जीव की इच्छा को पूरा क्यों नहीं करते या उसे रोकते क्यों नहीं, ऐसा तो नहीं कि उन्हें कुछ पता ही नहीं? (5.15)

a)

वे निष्पक्ष होने के कारण स्वतन्त्र अणुजीवों की इच्छाओं में व्यवधान नहीं डालते

b)

भगवान् मनुष्य की योग्यता के अनुसार उसकी इच्छा को पूरा करते हैं – आपन सोची होत नहिं प्रभु सोची तत्काल

c)

वे प्रत्येक जीव की इच्छाओं को उसी तरह समझते हैं जिस तरह फूल के निकट रहने वाला फूल की सुगन्ध को

16.

मैं शरीर नहीं हूँ, यह जानने पर भी लोग आत्मा-परमात्मा का अंतर नहीं जान पाते | उनका क्या उपाय है? (5.16)

a)

रात्रि के समय अंधकार में हमें प्रत्येक वस्तु एक सी दिखती है, किन्तु दिन में सूर्य के उदय पर सारी वस्तुएँ अपने-अपने वास्तविक स्वरूप में दिखती हैं

b)

ईश्वर के प्रतिनिधि, पूर्ण प्रामाणिक कृष्णभावनाभावित गुरु, की शरण ग्रहण करने पर ही ईश्वर तथा ईश्वर के साथ अपने सम्बन्ध को सही-सही जाना जा सकता है

17.

क्या ईश्वर का प्रतिनिधि, पूर्ण प्रामाणिक कृष्णभावनाभावित गुरु, ईश्वर ही होता है? (5.16)

a)

ईश्वर का प्रतिनिधि कभी भी अपने आपको ईश्वर नहीं कहता

b)

उसका सम्मान ईश्वर की ही भाँति किया जाता है, क्योंकि उसे ईश्वर का ज्ञान होता है

c)

कम से कम वह तो अपने को ईश्वर मानने लगता है

18.

इनमें से क्या सही नहीं है? (5.16)

a)

आध्यात्मिक जीवन में व्यष्टि की पहचान ही वास्तविक ज्ञान है

b)

प्रत्येक जीव व्यष्टि है पर भगवान् व्यष्टि नहीं हैं

c)

सब भविष्य में मुक्त होने पर भी व्यष्टि बने रहेंगे

19.

पूर्णतया कृष्णभावनाभावित होने के लिए क्या-क्या भगवान् में स्थिर करने की आवश्यकता है? (5.17)

a)

तद्बुद्धयः - बुद्धि

b)

तदात्मानः - मन

c)

तन्निष्ठाः - श्रद्धा

d)

तत्परायणाः - शरण

20.

अपने जीवन की अशांति और चिंताओं से बाहर निकलने के लिए आप क्या पहला कदम लेने वाले हैं?

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