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Bhagavad Gita As It Is DAY-12 (2.65-72, 3.1-2)

Total questions: 22

Worksheet time: 2hrs 0mins

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1.

श्लोक पहचानें - जो पुरुष समुद्र में निरन्तर प्रवेश करती रहने वाली नदियों के समान इच्छाओं के निरन्तर प्रवाह से विचलित नहीं होता और जो सदैव स्थिर रहता है, वही शान्ति प्राप्त कर सकता है, वह नहीं, जो ऐसी इच्छाओं को तुष्ट करने की चेष्ठा करता हो |

a)

इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते |

तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि || 2.67 ||

b)

या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी |

यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः || 2.69 ||

c)

आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् |

तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे स शान्तिमाप्नोति न कामकामी || 2.70 ||

d)

विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्र्चरति निःस्पृहः |

निर्ममो निरहङकारः स शान्तिमधिगच्छति || 2.71 ||

2.

"अहैतुकी भगवत्कृपा की प्राप्ति" किसका अर्थ है? (2.65)

a)

प्रसादे

b)

सर्वदुःखानां

c)

प्रसन्नचेतसो

d)

पर्यवतिष्ठते

3.

कैसे व्यक्ति की बुद्धि शीघ्र ही स्थिर हो जाती है और संसार के तीनों ताप नष्ट हो जाते हैं? (2.65)

a)

कृष्णभावनामृत में तुष्ट व्यक्ति

b)

कृष्णभावनामृत से असंतुष्ट व्यक्ति

4.

जो कृष्णभावनाभावित नहीं है, उसके विषय में क्या सही है? (2.66)

a)

उसकी बुद्धि दिव्य होती है

b)

उसका मन स्थिर होता है

c)

उसके मन का कोई अन्तिम लक्ष्य नहीं होता

d)

वह निश्चय ही सदा दुखी और अशान्त रहेगा

e)

वह शान्तिमयी अवस्था में है

5.

मन की चंचलता का एकमात्र कारण अन्तिम लक्ष्य का ________ है |(2.66)

a)

भाव

b)

महाभाव

c)

अभाव

d)

अनुभाव

6.

जिस पर मन केंद्रित है, ऐसी विचरणशील इन्द्रिय बुद्धि को किस प्रकार हर लेती है? (2.67)

a)

जैसे शेर कुत्तों के झुण्ड को खदेड़ता है

b)

जैसे प्रचंड वायु नाव को बहा ले जाती है

c)

जैसे एक वायरस शहर को खाली कर देता है

d)

जैसे वैक्यूम क्लीनर कूड़ा खींचता है

7.

भक्ति के प्रगति-पथ से विपथ करने के लिए कितनी इन्द्रियों को अपनी तृप्ति में लगे रहने की आवश्यकता है? (2.67)

a)

समस्त

b)

कम से कम एक

c)

एक से अधिक

8.

मन को वश में करने की क्या सही एवं सरल विधि है? (2.67)

a)

किसी भी एक इन्द्रिय को कृष्णभावनामृत में लगा रहना चाहिए

b)

कम से कम दो इन्द्रियों को कृष्णभावनामृत में लगा रहना चाहिए

c)

समस्त इन्द्रियों को कृष्णभावनामृत में लगा रहना चाहिए

9.

सारी इन्द्रियों को भगवान् की दिव्य प्रेमभक्ति में लगाकर इन्द्रियतृप्ति की बलवती शक्तियों को दमित करने की तुलना किससे की गयी है? (2.68)

a)

प्रचंड वायु और पानी में तैरती नाव

b)

शत्रुओं का दमन श्रेष्ठ सेना द्वारा

c)

दिन में सोना, रात्रि में जागना

d)

एक विचलित घोड़े का रथ को विपथ करना

10.

साधक किसे कहते हैं? (2.68)

a)

जो व्यक्ति यह हृदयंगम कर लेता है कि कृष्णभावनामृत के द्वारा बुद्धि स्थिर होती है

b)

जो प्रमाणिक गुरु के पथ-प्रदर्शन में अभ्यास करता है

c)

जो मोक्ष का योग्य पात्र है

11.

आत्मनिरीक्षक मुनि के विषय में क्या सही है? (2.69)

a)

इन्द्रियतृप्ति के लिए भौतिक कार्य करने में निपुण होते हैं

b)

आत्म-साक्षात्कार के अनुशीलन के लिए जागते हैं

c)

भौतिक सुख तथा दुख के प्रति अन्यमनस्क रहता है

d)

अविचलित रहकर आत्म-साक्षात्कार के कार्यों में लगा रहता है

12.

भौतिकतावादी व्यक्ति के लिए क्या रात्रि के समान है, कि वे सोये रहते हैं? (2.69)

a)

आत्म-साक्षात्कार के अनुशीलन के लिए प्रयास

b)

अनेक प्रकार के इन्द्रियसुखों की चेष्टा

13.

शान्ति प्राप्त करने के लिए क्या आवश्यकता है? (2.70)

a)

इच्छाओं को तुष्ट करने की चेष्ठा करे

b)

इच्छाओं के निरन्तर प्रवाह से विचलित नहीं हो

14.

जब तक मनुष्य शरीर है, तब तक इन्द्रियतृप्ति के लिए शरीर की माँगे बनी रहेंगी| फिर भी कृष्णभावनाभावित व्यक्ति को किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं होती, कैसे? (2.70)

a)

अपनी पूर्णता के कारण ऐसी इच्छाओं से विचलित नहीं होता

b)

क्योंकि भगवान् उसकी सारी आवश्यकताएँ पूरी करते रहते हैं

c)

इच्छाओं के होते हुए भी कभी इन्द्रियतृप्ति के लिए उन्मुख नहीं होता

d)

चूँकि वह भगवान् की दिव्य प्रेमाभक्ति में तुष्ट रहता है

e)

भक्तों की कोई भौतिक इच्छा नहीं रहती

15.

कृष्णभावनाभावित पुरुष भगवत्सेवा में सुखी रहता है किन्तु वे कौन कामी हैं जो अपनी अपूर्ण इच्छाओं के कारण दुखी रहते हैं? (2.70)

a)

कर्मी

b)

मुमुक्षु

c)

योगसिद्धि के कामी

d)

कृष्णभक्त

16.

इनमें से क्या सही नहीं है? (2.71)

a)

निस्पृह होने का अर्थ है – इन्द्रियतृप्ति के लिए कुछ भी इच्छा न करना

b)

कृष्णभावनाभावित होने की इच्छा ही इच्छाशून्यता या निस्पृहता है

c)

वास्तविक इच्छाशून्यता कृष्ण-तुष्टि के लिए इच्छा है

d)

अर्जुन को अपने लिए युद्ध करने की कोई इच्छा न थी, किन्तु वह कृष्ण के लिए लड़ा

e)

श्रीकृष्ण को अपने नित्य दास के रूप में जान लेना कृष्णभावनामृत की सिद्ध अवस्था है

17.

ब्राह्मी-स्थिति, ब्रह्म-निर्वाण अवस्था या भगवद्धाम को प्राप्त करना क्या है? (2.72)

a)

भौतिक कार्यों के पद पर न होना

b)

भौतिक बन्धन से मुक्ति

c)

भौतिकतावादी जीवन शैली का अन्त

d)

भगवान् की दिव्य प्रेमीभक्ति में व्यस्त रहना

e)

इन्द्रियतृप्ति छोड़कर कृष्णभावनामृत विषयक कार्यों को स्वीकारना

18.

भगवद्गीता यथारूप के दूसरे अध्याय का क्या नाम है? (2.72)

a)

कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण

b)

गीता का सार

c)

कर्मयोग

d)

दिव्य ज्ञान

19.

अर्जुन ने कृष्णभावनामृत को भूल से क्या समझ लिया? (3.1)

a)

जड़ता

b)

प्रशिक्षित हुए बिना एकान्त स्थान में कृष्ण नाम-जप

c)

सक्रिय जीवन से संन्यास लेकर एकान्त स्थान में तपस्या का अभ्यास

20.

एकनिष्ठ शिष्य के नाते अर्जुन ने दो विरोधास्पद बातों - सकाम कर्म से बुद्धियोग की श्रेष्ठता और युद्ध जैसे घोर कर्म करने की आज्ञा - से उबरने के लिये क्या किया? (3.1)

a)

नया गुरु ढूंढने का प्रण लिया

b)

मनमानी करने का निर्णय किया

c)

यह बात अपने गुरु के समक्ष रखी

d)

कृष्ण से सर्वोत्तम कार्य-विधि के विषय में प्रश्न किया

21.

दूसरे अध्याय में भगवान् ने किन-किन मार्गों का वर्णन किया? (3.2)

a)

सांख्ययोग

b)

बुद्धियोग

c)

बुद्धि द्वारा इन्द्रियनिग्रह

d)

निष्काम कर्मयोग

e)

नवदीक्षित की स्थिति

22.

आपको क्या लगता है कि अपने जीवन में शान्ति व अंततः सुख लाने के लिए और बनाये रखने के लिए आपको क्या व्यवहारिक कदम उठाना होगा?

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