Worksheetsउत्तम आकिंचन्य भक्ति || Jain Quiz || Jainism Think
Total questions: 20
Worksheet time: 10mins
हम किस परिग्रह का कभी परिमाण नहीं कर सकते?
बाह्य परिग्रह
पैसा
मिथ्यात्व
आरंभ परिग्रह
तत्वार्थ सूत्र के किस अध्याय में 10 प्रकार के बाह्य परिग्रह कहें है
9 वें
8 वें
7 वें
6 वें
हम किस परिग्रह का कभी परिमाण नहीं कर सकते?
आरंभ परिग्रह
बाह्य परिग्रह
पैसा
मिथ्यात्व
पैसे को बाह्य परिग्रह में नहीं रखने का कारण
पैसा उस ज़माने में चलता नहीं था
पैसे की value घटती बढ़ती है
पैसे तो हाथ का मैल है
उपर्युक्त सभी
बाह्य परिग्रह में चौथा भेद क्या है ?
धन
दासी
धन्य
कुप्य
कुप्य शब्द का क्या अर्थ है ?
कपड़े
कपड़े और बर्तन
बर्तन
अल्प आरम्भ रखने से ______होगा
मनुष्य गति
सुख
परिग्रह परिमाण व्रत
पूण्य
ज्ञानी को परिग्रह के प्रति क्या भाव है ?
मुझे परिग्रह से क्या? में तो स्वयं चिंतामणि हूँ
मैं स्वयं देव हूँ मुझे परिग्रह नहीं रखना चाहिए
मेरे किसी भी प्रयोजन की सिद्धि परिग्रह से नहीं होगी
उपर्युक्त सभी
बाह्य परिग्रह को ही अपना मान लेने से क्या होगा ?
भिकारी भी आकिंचन्य धर्मधारी हो जाएगा
लोग परिग्रह छोड़ने में ही व्यस्त हो जाएंगे
उपर्युक्त सभी
आकिंचन्य का शब्दार्थ है-
न में किंचन इति अकिंचन:
कांचन रहित
नास्ति किंचन:
समाजवाद से क्या आशय है ?
अपरिग्रह धर्म
समाज से आधार पर बटवारा करना
कोई गरीब अमीर का भेद नहीं रखना
सबको एक जैसा समाज में रखना
"चाह लंगोटी की दुख भले" का अर्थ-
लंगोटी नहीं पहनना चाहिए
लंगोटी भी परिग्रह है
लंगोटी की चाह नहीं रखो
लअंगोती की चाह भी दुख देती है
आकिंचन्य सबसे बड़ा धर्म क्यों है ?
क्योंकि परिग्रह सबसे बड़ा पाप है
क्योंकि ये सभी मे सार है
क्योंकि इसी में जैन धर्म की पहिचान है
उपर्युक्त सभी
एक सिक्के के दो पहलू कौन है
त्याग - आकिंचन
संयम - अकिंचन
अकिंचन - ब्रह्मचर्य
तप - आकिंचन
मूर्च्छा क्या है
एकत्व
ममत्व
दोनों
कोई नहीं
परिग्रह के मुख्यतः कितने भेद है
25
2
12
5
द्यानतराय जी की पूजा में मुनिराज को कितने परिग्रह का त्यागी बताया है
14
10
24
25
छवि वीतरागी नग्न मुद्रा द्रष्टि नासा पर धरें। इस पंक्ति के रचयिता कौन है
भागचंद जी
भूधरदास जी
दौलतराम जी
बुधजन जी
तत्वार्थ सूत्र के किस अध्याय में 10 प्रकार के बाह्य परिग्रह कहें है
8 वें
6 वें
9 वें
7 वें *
छवि वीतरागी नग्न मुद्रा द्रष्टि नासा पर धरें। इस पंक्ति के रचयिता कौन है
बुधजन जी
दौलतराम जी
भूधरदास जी
भागचंद जी
