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Bhagavad Gita As It Is DAY-44 (11.18-27)

Total questions: 15

Worksheet time: 1hrs 21mins

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1.

अर्जुन किस प्रकार भगवान् का गुणगान करता है? (11.18)

a)

आप परम आद्य ज्ञेय वस्तु हैं

b)

आप इस ब्रह्माण्ड के परम आधार (आश्रय) हैं

c)

आप अव्यय तथा पुराण पुरुष हैं

d)

आप सनातन धर्म के पालक भगवान् हैं

2.

अर्जुन 16वें श्लोक में "अनेक बाहु" और 19वें श्लोक में फिर से "अनंत बाहु" कहकर पुनरुक्ति क्यों कर रहे हैं? (11.19)

a)

ऐसी पुनरुक्ति साहित्यिक दोष है

b)

कृष्ण की महिमाकी पुनरुक्ति कोई साहित्यिक दोष नहीं है

c)

मोहग्रस्त होने या परमआह्लाद के समय या आश्चर्य होने पर कथनों की पुनरुक्ति हुआ करती है

3.

अर्जुन किसे भगवान् की आँखों के रूप में देख रहा था? (11.19)

a)

शशिसूर्यनेत्रम् - सूर्य, चंद्र

b)

जय-विजय

c)

अश्विनी कुमार

d)

दिन-रात्रि

4.

कहीं अर्जुन द्वारा विश्वरूप का दर्शन स्वप्न तो नहीं था? (11.20)

a)

शायद हो सकता है, क्योंकि और तो किसी ने विश्वरूप का दर्शन किया नहीं

b)

बिलकुल नहीं, व्यासदेव की कृपा से संजय व साथ-साथ ही अन्य लोकों के निवासी भी, जिन्हें दिव्यदृष्टि प्रदान की गयी थी, विश्वरूप को देख पाए थे

5.

अर्जुन ने किन-किनको विश्वरूप से भयभीत होते हुए, हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हुए, भगवान् की शरण लेते हुए और उनकी स्तुति करते हुए देखा?(11.21)

a)

सुरसङघा - समस्त लोकों के देवता

b)

महर्षिसिद्धसङघाः - महर्षियों तथा सिद्धों के समूह

6.

महर्षियों तथा सिद्धों के समूह ने "कल्याण हो" कहने के लिए क्या शब्द बोले? (11.21)

a)

स्वस्ति

b)

कल्याणमस्तु

c)

शुभमस्तु

d)

7.

विश्वरूप को आश्चर्य से देखने वालों में "पितृगण" को किस शब्द से सूचित किया गया है? (11.22)

a)

विश्वे

b)

वसवः

c)

साध्याः

d)

उष्म-पाः

e)

आदित्याः

8.

अर्जुन किन शब्दों में कहते हैं कि भगवान् के भयानक दाँतों वाले विराट रूप को देखकर देवतागण सहित सभी लोक अत्यन्त विचलित हैं और उन्हीं की तरह मैं भी हूँ? (11.23)

a)

रूपं महत्ते बहुवक्‍त्रनेत्रं

b)

महाबाहो बहुबाहूरुपादम्

c)

बहूदरं बहुदंष्ट्राकरालं

d)

दृष्ट्वा लोका: प्रव्यथितास्तथाहम्

9.

नाना ज्योर्तिमय रंगों से युक्त भगवान् के विराटरूप को आकाश का स्पर्श करते, मुख फैलाये तथा बड़ी-बड़ी चमकती आँखें निकाले देखकर अर्जुन की क्या स्थिति है? (11.24)

a)

वह निर्भय है

b)

उसका मन विचलित है

c)

वह धैर्य धारण कर पा रहा है

d)

वह पूरे मानसिक संतुलन में है

10.

अर्जुन विराटरूप के प्रल्याग्नि स्वरूप मुखों को तथा विकराल दाँतों को देखकर भगवान् को कैसे सम्बोधित करके प्रार्थना करता है? (11.25)

a)

देवेश

b)

जगन्निवास

c)

देवेन्द्र

d)

जगन्नाथ

11.

अर्जुन भगवान् के विकराल रूप को देखकर क्या कहता है? (11.25)

a)

मैं सब ओर से मोहग्रस्त हो रहा हूँ

b)

मुझे हंसी आ रही है

c)

मैं अपना सन्तुलन नहीं रख पा रहा

d)

आप मुझ पर प्रसन्न हों

12.

विराटरूप के विकराल मुख में प्रवेश करते हुए दुर्योधन आदि भाइयों को अर्जुन ने कैसे सम्बोधित किया? (11.26-27)

a)

धृतराष्ट्रस्य पुत्रा:

b)

कौरवाः

c)

भ्राताः

d)

बन्धुः

13.

अर्जुन ने कर्ण को किस प्रकार सम्बोधित किया? (11.26-27)

a)

सूत-पुत्रः

b)

कर्ण

c)

अंगराजः

d)

अग्रजः

14.

भीष्म-द्रोण व स्वयं के भी प्रमुख योद्धाओं को अर्जुन किस प्रकार विनष्ट होता हुआ देख रहे हैं? (11.26-27)

a)

दाँतों के बीच चूर्णित हुआ

b)

प्रलयाग्नि से राख होता हुआ

c)

गले में निगला जाता हुआ

d)

हथियारों से काटा जाता हुआ

15.

अर्जुन को दिखाया गए विराटरूप का वर्णन पढ़-सुनकर आप कैसा अनुभव कर रहे हैं?

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