wayground logo

Free Printable Worksheets

Font size

S
M
L
XL
Worksheets

Bhagavad Gita As It Is DAY-19 (4.20-29)

Total questions: 20

Worksheet time: 2hrs 50mins

Name
Class
Date
1.

सभी प्रकार के कार्यों में व्यस्त रहकर भी शुभ-अशुभ कर्मफलों से मुक्त रहना कैसे संभव है? (4.20)

a)

भगवान् के शुद्ध प्रेमवश होकर हर कार्य कृष्ण के लिए करे

b)

जब उसे कर्मफलों के प्रति कोई आकर्षण नहीं रहता

c)

अपने शरीर-निर्वाह के प्रति भी कोई आकर्षण नहीं रहता

d)

वह अपनी पूर्ण सामर्थ्य से अपना कर्तव्य करता है

e)

वह पूर्णतया कृष्ण पर आश्रित रहता है

2.

विकर्म का क्या असली रूप है? (4.20)

a)

कृष्णभावनामृत से रहित कोई भी कार्य

b)

व्यक्ति न तो किसी वस्तु को प्राप्त करना चाहता है

c)

व्यक्ति न अपनी वस्तुओं की रक्षा करना चाहता है

d)

हर कार्य कर्ता पर बन्धनस्वरूप होता है

e)

व्यक्ति शुभ-अशुभ कर्मफलों से मुक्त रहता है

3.

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति किस प्रकार कर्म करता है? (4.21)

a)

पूर्णरूप से असंयमित मन तथा बुद्धि से कार्य करता है

b)

अपनी सम्पत्ति के सारे स्वामित्व को त्याग देता है

c)

केवल शरीर के सतत आनंद के लिए कर्म करता है

d)

भगवदिच्छा की परवाह नहीं करता

e)

अपने प्रयासों के फलों के प्रति उत्सुक रहता है

4.

कैसा व्यक्ति कर्म करता हुआ भी कभी बँधता नहीं? (4.22)

a)

जो स्वतः होने वाले लाभ से संतुष्ट रहता है

b)

शरीर-निर्वाह के लिए भी अधिक प्रयास नहीं करता

c)

जो द्वन्द्व से मुक्त है और ईर्ष्या नहीं करता

d)

वह न तो माँगता है, न उधार लेता है

e)

कृष्ण के लिए कोई भी कर्म करने से झिझकता नहीं

5.

पूर्णरूपेण कृष्णभावनाभावित मनुष्य समस्त द्वन्द्वों और भौतिक गुणों के कल्मष से कैसे मुक्त हो जाता है? (4.23)

a)

वह कृष्ण के साथ अपने सम्बन्ध की स्वाभाविक स्थिति को जानता है, फलस्वरूप उसका चित्त कृष्णभावनामृत से विचलित नहीं होता

b)

वह जो कुछ भी करता है, वह आदिविष्णु कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए होता है

c)

यज्ञमय कर्म का फल निश्चय ही ब्रह्म में विलीन हो जाता है और मनुष्य को कोई भौतिक फल नहीं भोगना पड़ता है

6.

इनमें से गलत चुनें | (4.24)

a)

माया द्वारा आच्छादित परमसत्य = पदार्थ

b)

यज्ञ = कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए किये गये कार्य

c)

ब्रह्म = भौतिक

d)

भगवान् के दिव्य शरीर की किरणें = ब्रह्मज्योति

e)

कृष्णभावनामृत में पूरी तरह निमग्न मन = समाधि

7.

भगवद्गीता के चतुर्थ अध्याय का नाम क्या है?

a)

कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण

b)

गीता का सार

c)

कर्मयोग

d)

दिव्य ज्ञान

8.

सकामकर्मी इनमें से कौनसा यज्ञ करते हैं? (4.25)

a)

भौतिकसुख के लिए अपनी भौतिक सम्पत्ति का यजन करते हैं

b)

परब्रह्म में लीन होने के लिए अपनी भौतिक उपाधियों का यजन करते हैं

c)

कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए सर्वस्व अर्पित कर देता है

9.

मानव जीवन के चारों आश्रमों में से कौन पूर्णयोगी बनने के निमित्त हैं? (4.26)

a)

ब्रह्मचारी

b)

गृहस्थ

c)

वानप्रस्थ

d)

संन्यासी

10.

विशुद्ध ब्रह्मचारी श्रवणादि क्रियाओं तथा इन्द्रियों को मन की नियन्त्रण रूपी अग्नि में किस प्रकार स्वाहा कर देते हैं? (4.26)

a)

प्रामाणिक गुरु की देखरेख में इन्द्रियतृप्ति से दूर रहकर मन को वश में करते हैं

b)

सदैव हरेर्नामानुकीर्तनम् अर्थात् भगवान् के यश के कीर्तन तथा श्रवण में ही लगा रहता है

c)

सांसारिक शब्द-ध्वनियों से दूर रहता है और श्रवणेन्द्रिय हरे कृष्ण की आध्यात्मिक ध्वनि को सुनने में ही रहती है

11.

नियमित गृहस्थ इन्द्रियविषयों को इन्द्रियों की अग्नि में किस प्रकार स्वाहा कर देते हैं? (4.26)

a)

यौन जीवन तथा अन्य इन्द्रियतृप्ति के कार्यों में अनियन्त्रित रूप से प्रवृत्त होता है

b)

संयमित अनासक्त यौन जीवन के यज्ञ में, उच्चतर दिव्य जीवन के लिए, अपनी इन्द्रियतृप्ति की प्रवृत्ति की आहुति कर देता है

12.

योगसूत्र किसकी कृति है? (4.27)

a)

कणाद

b)

गौतम

c)

पतञ्जलि

d)

जैमिनी

13.

योगपद्धति के अनुसार प्रत्यगात्मा ही चरम उद्देश्य है - यह जीवात्मा की कौन सी अवस्था है? (4.27)

a)

जब तक जीवात्मा इन्द्रियभोग में आसक्त रहता है

b)

जब वह इन्द्रियभोग से विरत हो जाता है

14.

जीवात्मा के शरीर में कितने प्रकार की वायु कार्यशील रहती हैं जो तकनीकी उपाय से नियन्त्रित किये जाने पर आत्मा को भौतिक आसक्ति से शुद्ध करने में सहायक बन जाती हैं? (4.27)

a)

2

b)

4

c)

6

d)

8

e)

10

15.

इन्द्रियों की इन्द्रियविषयों से प्रतिक्रिया ; यथा कान सुनने के लिए, आँख देखने के लिए, नाक सूँघने के लिए, जीभ स्वाद के लिए तथा हाथ स्पर्श के लिए - किस वायु की क्रियाएं हैं? (4.27)

a)

अपान वायु

b)

व्यान वायु

c)

समान वायु

d)

उदान वायु

e)

प्राणवायु

16.

इनमें से कौन से अनुष्ठान योग-यज्ञ कहलाते हैं? (4.28)

a)

बूढों के लिए आश्रम तथा गरीबों को भोजन

b)

चान्द्रायण तथा चातुर्मास्य जैसे विविध तप

c)

वेदान्तसूत्र या सांख्यादर्शन का अध्ययन

d)

समस्त तीर्थस्थानों की यात्रा

e)

ब्रह्म में तदाकार होने के लिए पतंजलि पद्धति

17.

किस योग के अभ्यास से योगी जीवन अवधि को अनेक वर्षों के लिए बढ़ा सकता है? (4.29)

a)

निम्नगामी अपानवायु और उर्ध्वगामी प्राणवायु को विपरीत श्वास के द्वारा उदासीन करने वाला "पूरक"

b)

अपान वायु को प्राणवायु में अर्पित करने वाला "रेचक"

c)

प्राण तथा अपान वायुओं को पूर्णतया रोक "कुम्भक"

18.

हठयोग के विविध आसनों और श्वास को रोकने की योगविधि प्राणायाम का क्या उद्देश्य है? (4.29)

a)

सुन्दर दिखना

b)

इन्द्रियों को वश में करना

c)

शरीर की अतिरिक्त चर्बी को हटाना

d)

आत्म-साक्षात्कार की प्रगति

19.

कृष्णभावनाभावित मनुष्य को आसन-प्राणायाम की योगपद्धति का पालन करने की आवश्यकता क्यों नहीं है? (4.29)

a)

उसकी इन्द्रियाँ कृष्ण की सेवा में तत्पर रहने के कारण अन्य किसी कार्य में प्रवृत्त होने का अवसर ही नहीं पातीं

b)

कृष्ण प्रसादम् को खाते रहने में स्वतः कम खाने की आदत पड़ जाती है

c)

जीवन के अन्त में उसे स्वतः भगवान् कृष्ण के दिव्य पद पर स्थानान्तरित कर दिया जाता है

20.

कृष्णभावनामृत में पूर्णज्ञान से युक्त भक्त के कौन से एक व्यवहार का आप अभ्यास करना चाहेंगे जिससे कार्य करते हुए भी आप कर्मफलों से प्रभावित न हों?

4 lines