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WorksheetsKṛṣṇa Book Practice Quiz (Chapter 77-78)
Total questions: 22
Worksheet time: 57mins
युद्धभूमि में पुनः पहुंचकर श्रीप्रद्युम्न ने कितने बाणों की वर्षा करके शाल्व के सेनापति द्युमान के घोड़े, सारथी, धनुष, झंडे और सिर के टुकड़े कर दिए? (अध्याय 77)
1
4
8
16
जब शाल्व के साथ भयंकर युद्ध 27 दिनों तक अनवरत चल रहा था, उस समय श्रीकृष्ण कहाँ थे? (अध्याय 77)
द्वारका में रुक्मिणी के महल में विश्राम कर रहे थे
इंद्रप्रस्थ में पांडवों के साथ रह रहे थे
शाल्व के डर से छिपे हुए थे
शाल्व ने भयंकर आक्रमण करते हुए भगवान् के हाथ से कौन सा अस्त्र गिरा दिया, जिससे देवतागण भी अत्यधिक उद्विग्न हो उठे? (अध्याय 77)
विद्याधर तलवार
सुदर्शन चक्र
कौमुदकी गदा
शारंग धनुष
शाल्व ने मयासुर से सीखी हुई विद्या द्वारा श्रीकृष्ण के सामने क्या-क्या कारनामे कर दिखाए? (अध्याय 77)
श्रीकृष्ण के दूसरे गदा प्रहार से पहले ही अदृश्य हो गया
रहस्य्मयी अज्ञात दूत बनकर वसुदेव के बंदी बनाये जाने की सूचना दी
श्रीकृष्ण के सामने नकली वसुदेव का सिर काट डाला
अपने भ्रमित होने के ऐश्वर्य का प्रदर्शन करने के बाद अंततः श्रीकृष्ण ने किस अस्त्र से शाल्व का उद्धार किया? (अध्याय 77)
कौमुदकी गदा
विद्याधर तलवार
शारंग धनुष
सुदर्शन चक्र
शाल्व के वध की तुलना किससे की गयी है? (अध्याय 77)
भगवान् नृसिंह द्वारा हिरण्यकशिपु का उद्धार
भगवान् वराह द्वारा हिरण्याक्ष का उद्धार
कर्ण द्वारा घटोत्कच का वध
इंद्र द्वारा वृत्रासुर का वध
भीम द्वारा जरासंध का वध
शाल्व की मृत्यु का बदला लेने के लिए अत्यंत क्रोधित होकर घटनास्थल पर कौन प्रकट हुआ? (अध्याय 77)
शिशुपाल
जरासंध
कंस
दन्तवक्र
दन्तवक्र क्या अस्त्र लाया था, अतः भगवान् ने भी उसी अस्त्र के द्वारा उसका संहार किया? (अध्याय 78)
गदा
धनुष
तलवार
अस्त्र-शस्त्र रहित
दन्तवक्र और शिशुपाल की मृत्यु में क्या समान था? (अध्याय 78)
दोनों का वध श्रीकृष्ण की कौमुदकी गदा के द्वारा हुआ
दोनों का वध श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र के द्वारा हुआ
दोनों के शरीर से दिव्य ज्योति का सूक्ष्म कण श्रीकृष्ण के शरीर में समा गया
दन्तवक्र के भाई का क्या नाम था जिसका श्रीकृष्ण ने अविलम्ब सुदर्शन चक्र से सिर काट डाला? (अध्याय 78)
विदूषक
चित्ररथ
दशरथ
विदूरथ
कुरुवंशियों के युद्ध से विमुख होकर तीर्थयात्रा पर निकले बलराम जी सर्वप्रथम किस पवित्र स्थल पर गए? (अध्याय 78)
नैमिषारण्य
चक्रतीर्थ
प्रभासक्षेत्र
बिन्दुसर
बलराम जी किन-किन नदियों के तट पर स्थित पवित्र स्थानों पर होते हुए अंततः नैमिषारण्य पहुंचे? (अध्याय 78)
गंगा
यमुना
नील
सरस्वती
जब बलराम जी नैमिषारण्य में पहुंचे तो वहां आध्यात्मवादियों की सभा में कितने वर्षों तक चलने वाला भव्य यज्ञ संपन्न हो रहा था? (अध्याय 78)
1
10
100
1000
बलराम जी के आगमन पर अन्य सभी तपस्वी, ब्राह्मण तथा विद्वान उनके सम्मान के लिए खड़े हुए | एकमात्र न खड़े होने वाले व्यासासन पर विराजमान रोमहर्षण किसके शिष्य थे? (अध्याय 78)
सूत गोस्वामी
शुकदेव गोस्वामी
व्यासदेव
नारद मुनि
अन्य सबों के सम्मानपूर्वक उठने के बावज़ूद रोमहर्षण क्यों अपने स्थान से नहीं उठा और न ही बलराम जी की वन्दना की?(अध्याय 78)
क्योंकि व्यासासन पर विराजमान होने के कारण उसने मूर्खतापूर्वक स्वयं को श्रीभगवान से भी श्रेष्ठ सोचा
क्योंकि व्यासासन पर विराजमान होने वाले को श्रीकृष्ण के अतिरिक्त किसी अन्य (विस्तार, अवतार, प्रतिनिधि इत्यादि) की परवाह की आवश्यकता नहीं है
रोमहर्षण सूत का जन्म ब्राह्मण परिवार में न होकर प्रतिलोम परिवार में हुआ था | प्रतिलोम विवाह क्या होता है? (अध्याय 78)
पुरुष का अपने से निम्न जाति की कन्या के साथ विवाह
पुरुष का अपने से उच्च जाति की कन्या के साथ विवाह
किसको ब्राह्मण की स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता? (अध्याय 78)
जिसका जन्म प्रतिलोम परिवार में हुआ हो
जिसमें वास्तविक अनुभूति का अभाव हो
जो सम्पूर्ण वैदिक ज्ञान प्राप्त करके विनम्र है
जो श्रीव्यासदेव का शिष्य हो
जब व्यक्ति भौतिक लाभ से फूला नहीं समाता और विनम्र नहीं बनता, तब उसका समस्त ज्ञान किसके समान हो जाता है? (अध्याय 78)
सर्प के फण को सुसज्जित करने वाला बहुमूल्य रत्न
एक बाहरी वस्त्र
मंच पर नृत्य करने वाला नट कलाकार
श्रीबलराम जी ने धार्मिक सिद्धांतों की स्थापना के लिए रोमहर्षण का वध कैसे किया? (अध्याय 78)
हल से
मूषल से
गदा से
थप्पड़ से
कुश घास के तिनके से
ब्राह्मणों और ऋषियों के विरोधपरक प्रार्थना और उनके दिए दीर्घायु के वर को पूरा करने के लिए, व्यासासन पर बिठाये गए रोमहर्षण सूत के पुत्र का क्या नाम है? (अध्याय 78)
रोम सूत
रोमपाद
उग्रसेन सूत
उग्रश्रवा सूत
रोमहर्षण के वध के प्रायश्चित के रूप में ब्राह्मणों ने बलराम जी को क्या दो आदेश दिए? (अध्याय 78)
बल्वल के पुत्र इल्वल नामक असुर का वध
इल्वल के पुत्र बल्वल नामक असुर का वध
पवित्र स्थानों की 12 महीनों तक तीर्थयात्रा
पवित्र स्थानों की 12 सालों तक तीर्थयात्रा
शास्त्रज्ञ & व्यासशिष्य, रोमहर्षण सूत भगवान् श्रीबलराम जी को प्रसन्न नहीं कर सका | इससे आप क्या सीख ले सकते हैं?
