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WorksheetsKṛṣṇa Book Practice Quiz (Chapter 65-66)
Total questions: 20
Worksheet time: 53mins
जब बलराम जी यशोदा व नन्द महाराज के दर्शन करने वृन्दावन आये, तब वे स्वयं कहाँ रह रहे थे? (अध्याय 65)
मथुरा
द्वारका
गोपियाँ बलराम जी के सामने श्रीकृष्ण के मीठे, छलने वाले शब्दों को याद करती हैं - "प्रिय गोपियों ! चिंता मत करो | तुमने मेरी जो सेवा की है, उसका मूल्य चुकाना मेरे लिए ____________ |" (अध्याय 65)
बाएं हाथ का खेल है
असंभव है
गोपियाँ श्रीकृष्ण के विषय में निरंतर तीव्रतर होती भावनाओं में क्या-क्या अनुभव कर रही थीं? (अध्याय 65)
श्रीकृष्ण की मुस्कान
श्रीकृष्ण के प्रेमपूर्ण शब्द
श्रीकृष्ण की आकर्षक आकृति
श्रीकृष्ण के आलिंगन
जब श्रीबलराम जी ने निरंतर दो मास चैत्र-वैशाख में वृन्दावन में निवास किया, तब कौन सी ऋतु का समय था? (अध्याय 65)
शरद
शीत
वसंत
शिशिर
पतझड़
गोपियों के सान्निध्य में बलराम जी ने जिस वारुणी का आस्वादन किया, वो क्या है? (अध्याय 65)
इंद्र देव की पुत्री
एक प्रकार का रासायनिक विष
वृक्षों से स्रावित मधुपर्क
दुर्गन्धयुक्त बेस्वाद मदिरा
यमुना ने किस भ्रमवश भगवान् श्रीबलराम जी के आदेश की उपेक्षा की? (अध्याय 65)
उन्हें मदोन्मत्त मानकर
उनके यशस्वी और श्रेष्ठ पद को भूलने के कारण
उनकी सर्वशक्तिमत्ता को भूलने के कारण
स्वयं को बलराम जी की तुच्छ सेविका मानने के कारण
यमुना के जल से बाहर आने पर बलराम जी को श्रीदेवी ने क्या-क्या भेंट किया जिससे वे राजा इंद्र के श्वेत हाथी के समान सुशोभित दिखाई दिए? (अध्याय 65)
उत्तम पीताम्बर
उत्तम नीलाम्बर
स्वर्णनिर्मित मूल्यवान कण्ठहार
पुष्प निर्मित मूल्यवान कण्ठहार
भगवान् श्रीकृष्ण को चुनौती देने वाले, स्वयं को वास्तविक वासुदेव कहने वाले, करूष प्रदेश के राजा का क्या नाम था? (अध्याय 66)
मेंड्रेक
सुदक्षिण
पौण्ड्रक
उग्रसेन
जब पौंड्रक का दूत श्रीकृष्ण के लिए पौंड्रक की शरण में जाने का सन्देश लेकर द्वारका के राजदरबार में आया, तब बलराम जी क्या कर रहे थे? (अध्याय 66)
वृन्दावन में गोपों, गोपियों इत्यादि को आनंद प्रदान कर रहे थे
दूत की बात सुनकर पेट पकड़करउच्च स्वर में हंस रहे थे
ऐसे अपराधपूर्ण सन्देश को सुनकर दूत का वध करने के लिए उद्यत हो गए
श्रीकृष्ण और पौण्ड्रक के मध्य युद्ध कहाँ हुआ? (अध्याय 66)
द्वारका
करूष प्रदेश
काशी
राजा पौंड्रक ने जब श्रीकृष्ण के आक्रमण के विषय में सुना, तो उसके पक्ष से और किसने युद्ध किया? (अध्याय 66)
काशीराज
मगधराज जरासंध
चेदिराज शिशुपाल
अंगराज कर्ण
युद्धक्षेत्र में पौंड्रक को पहली बार देखकर श्रीकृष्ण अपनी हंसी नहीं रोक पाए, उसके सभी अनुकरण कैसे दिखाई देते थे? (अध्याय 66)
एकदम असली, पहचानना मुश्किल था कि वास्तविक वासुदेव कृष्ण कौन हैं
एकदम नकली, जैसे झूठा वेश धारण करके मंच पर वासुदेव का अभिनय करने वाला कोई सस्ता अभिनेता
श्रीकृष्ण ने किस प्रकार पौण्ड्रक और उसके मित्र काशीराज का वध किया? (अध्याय 66)
विद्याधर तलवार से पौण्ड्रक का शीश उसके शरीर से अलग कर दिया
सुदर्शन चक्र से पौण्ड्रक के रथ को छिन्न-भिन्न कर दिया जैसे इंद्र का वज्र पर्वत के शिखर काटता है
शार्ङ्ग धनुष से काशीराज का सिर काशी नगरी में फेंक दिया जैसे झंझावात एक कमलपत्र को इधर-उधर उड़ा ले जाता है
पौण्ड्रक का इस प्रकार उद्धार करने पर उसे क्या लाभ प्राप्त हुआ? (अध्याय 66)
सायुज्य मुक्ति
सारूप्य मुक्ति
सामीप्य मुक्ति
सार्ष्टि मुक्ति
सालोक्य मुक्ति
काशीराज के पुत्र का क्या नाम था जिसने शिवजी की कृपा से प्राप्त दक्षिणाग्नि नामक विशाल नग्न आग्नेय दैत्य को श्रीकृष्ण का वध करने द्वारका भेजा? (अध्याय 66)
सुलक्षण
सुभक्षण
सुदक्षिण
सुलोचन
शिवजी की सूचना के अनुसार वह दक्षिणाग्नि नामक दुष्टात्मा किसका वध करने में असमर्थ है? (अध्याय 66)
योग्य ब्राह्मण
शक्तिशाली राक्षस
राजपुत्र
यज्ञकर्ता पुरोहित
अपने प्रेत साथियों सहित आते विशाल आग्नेय दैत्य से, दावाग्नि में फंसे पशुओं के सामान भयभीत होते, द्वारकावासियों की रक्षा के लिए प्रार्थना के समय श्रीकृष्ण क्या कर रहे थे? (अध्याय 66)
अपने कक्ष में शयन कर रहे थे
रुक्मिणी के साथ वार्तालाप में व्यस्त थे
अपने मंत्रियों के साथ गहन चिंतन में डूबे थे
राजसभा भवन में चौपड़ खेलने में व्यस्त थे
आग्नेय अस्त्र को द्वारका के विनाश के प्रयास में किसने विफल किया जिसके कारण उसने वापस जाकर अपने निर्माताओं का वध किया और विफलकर्ता ने काशी में विनाश किया? (अध्याय 66)
स्वयं श्रीकृष्ण ने
श्रीकृष्ण की कौमुदकी गदा
श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र
श्रीकृष्ण की विद्याधर तलवार
श्रीकृष्ण का शार्ङ्ग धनुष
श्रील शुकदेव गोस्वामी के अनुसार श्रीकृष्ण के अस्त्र द्वारा अत्यंत ऐश्वर्यपूर्ण वाराणसी के विनाश की कथा सुनने, कहने वाले का क्या परिणाम होता है? (अध्याय 66)
वह समस्त रजो-तमोगुण से भर जाता है
वह समस्त पापफलों से मुक्त हो जाता है
वह असीमित भौतिक ऐश्वर्य प्राप्त करता है
उसे अत्यंत सुन्दर पत्नी प्राप्त होती है
जिस प्रकार भगवान् श्रीकृष्ण ने पौण्ड्रक के भेजे दूत के सन्देश को तुरंत अस्वीकार करके पौण्ड्रक पर आक्रमण किया, वैसे ही यदि कोई अयोग्य व्यक्ति स्वयं को भगवान् या उनका अवतार घोषित करे तो क्या करना चाहिए?
