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WorksheetsBhagavad Gita As It Is DAY-59 (16.11-20)
Total questions: 18
Worksheet time: 2hrs 40mins
आसुरी प्रवृत्ति वालों के लिए जीवन का चरमलक्ष्य और मानव सभ्यता की मूल आवश्यकता क्या है? (16.11-12)
इन्द्रियों की तुष्टि
इन्द्रियों के द्वारा इन्द्रियों के स्वामी की सेवा
इन्द्रियों का भोग
इन्द्रियों का संयमन
केवल इन्द्रियतृप्ति
कौन से शब्द सूचित करते हैं कि आसुरी लोग सदा काम और क्रोध में लीन रहते हैं? (16.11-12)
कामोपभोगपरमा
कामक्रोधपरायणाः
कामभोगार्थम
आशापाशशतैर्बद्धाः
अन्यायेनार्थसञ्चयान्
आसुरी व्यक्ति के विषय में क्या सही है? (16.11-12)
मृत्यु के बाद जीवन में विश्वास नहीं करते
एक के बाद एक जीवन के लिए योजना बनाते हैं
वैदिकशास्त्र का न तो ज्ञान है, न कोई श्रद्धा है
अन्तर में स्थित परमात्मा में श्रद्धा नहीं रखता
इन्द्रियभोग के लिए अपने को स्वतन्त्र मानता है
अज्ञान से विमोहित हुआ आसुरी व्यक्ति क्या सोचता है? (16.13-15)
आढ्योऽभिजनवानस्मि - मैं कुलीन सम्बन्धियों से घिरा सबसे धनी हूँ
मैं सभी वस्तुओं का स्वामी, भोक्ता, सिद्ध, शक्तिमान् तथा सुखी हूँ
यक्ष्ये दास्यामि मोदिष्य - मैं यज्ञ-दान करूँगा और आनन्द मनाऊँगा
आज मेरे पास इतना धन है और अपनी योजनाओं से मैं और कमाऊँगा
इस समय इतना है किन्तु भविष्य में यह बढ़कर और अधिक हो जायेगा
आसुरी व्यक्ति का अंततः पतन्ति नरकेऽशुचौ - नरक में गिरने से पहले क्या-क्या होता है? (16.16)
अनेकचित्तविभ्रान्ता - अनेक चिन्ताओं से उद्विग्न
मोहजालसमावृताः - मोहजाल में बद्ध
प्रसक्ताः कामभोगेषु - इन्द्रियभोग में अत्यधिक रत
आसुरी व्यक्ति अपने ऐश्वर्य, बल के पीछे पूर्व जन्म के पुण्य कार्यों का फल और विभिन्न प्रकार के लोगों, सुन्दरता तथा शिक्षा के पीछे किसी प्रकार की योजना (व्यवस्था) को न देखते हुए क्या मानता है? (16.16)
सारी सम्पत्ति उसके निजी उद्योग से है
बाहु-बल पर विश्वास करता है, कर्मफल पर नहीं
ये चीजें आकस्मिक हैं
सबकुछ भगवान् की कृपा के रूप में देखता है
आधुनिक आसुरी उपदेशक अपने अनुयायियों से क्या कहता है? (16.16)
तुम लोग ईश्वर को अन्यत्र क्यों ढूँढ रहे हो?
तुम स्वयं अपने ईश्वर हो
तुम जो चाहो कर सकते हो
ईश्वर पर विश्वास मत करो
ईश्वर को दूर करो, ईश्वर मृत है
स्वर्ग तक सीढ़ी की योजना बनाने वाला रावण और यान्त्रिक विधि से उच्चतर लोकों तक पहुँचने का प्रयास कर रहे आधुनिक युग के आसुरी लोगों के विषय में क्या सही है?(16.16)
उच्च लोकों में जाने हेतु यज्ञ विधि में विश्वास करते हैं
बिना जाने हुए वे नरक की ओर बढ़ते जाते हैं
मछली की भाँति मोह रूपी जाल में फँस कर निकल नहीं पाते
आसुरी लोग किस प्रकार धार्मिक या याज्ञिक अनुष्ठान करते हैं? (16.17)
अपने को सबका दास मानते हुए
प्रतिबंधों और विधि-विधानों की परवाह न करते हुए
नाम मात्र के लिए बड़े ही गर्व के साथ
सम्पत्ति तथा मिथ्या प्रतिष्ठा से मोहमुक्त होकर
आसुरी लोग ऐसा क्यों सोचते हैं कि जो भी मार्ग बना लिया जाय, वही अपना मार्ग है और आदर्श मार्ग जैसी कोई वस्तु नहीं? (16.17)
अज्ञान
मोह
भ्रम
सद्गुण
प्रामाणिक शास्त्रों में श्रद्धा
आसुरी व्यक्ति क्या जानता/मानता है? (16.18)
वर्तमान जीवन अगले जीवन की तैयारी है
भगवान् परम नियन्त्रण कर्ता हैं
प्रत्येक कार्य में अपने को स्वतन्त्र तथा शक्तिमान
वह चाहे जैसे कर्म करे, उसे कोई रोक नहीं सकता
भगवान् का अस्तित्व और शास्त्रीय प्रमाण
मिथ्या अहंकार, बल, दर्प, काम तथा क्रोध से मोहित होकर आसुरी व्यक्ति कैसा आचरण करता है? (16.18)
अपने तथा अन्यों के शरीर में स्थित भगवान् से प्रेम
वास्तविक धर्म की निन्दा और शास्त्रों में अविश्वास
अपने प्रति तथा अन्यों के प्रति भी द्वेष व हिंसा
किन को भगवान् कृष्ण निरन्तर विभिन्न आसुरी योनियों में, भवसागर में डालते हैं? (16.19)
सदैव प्रेम से पूरित
सदैव उग्र, घृणास्पद तथा अपवित्र
जंगलों के अनेक शिकारी मनुष्य
ईर्ष्यालु तथा क्रूर
नरोत्तम
अगले जन्म में किसी विशेष जीव को किस शरीर में रखना है, यह विशेषाधिकार किसे प्राप्त है? (16.19)
हर जीव स्वेच्छा से अपना अगला शरीर चुन सकता है
यह भगवान् के निर्णय पर निर्भर करेगा
यह सब तो अकस्मात् है, बस अपने आप ही कुछ भी मिल जाएगा
किन पर भगवान् कभी भी दया नहीं करते और जो कभी भी उनकी कृपा का भाजन नहीं बन पाते? (16.20)
भक्त
असुर
आसुरी लोगों को जन्म जन्मान्तर तक उनके समान असुरों के गर्भ में रखे जाने पर अधःपतन होने पर अंततः कौन सा शरीर प्राप्त होता है? (16.20)
कुत्तों, बिल्लियों तथा सूकरों जैसा कूकर-सूकर शरीर
ऐश्वर्यशाली देवताओं का शरीर
पृथ्वीलोक में भारतवर्ष में मनुष्य शरीर
यदि ईश्वर असुरों पर कृपालु नहीं हैं तो उन्हें सर्व कृपालु क्यों कहा जाता है? (16.20)
वेदान्तसूत्र से पता चलता है कि परमेश्वर किसी से घृणा नहीं करते, असुरों को निम्नतम योनि में रखना उनकी कृपा की अन्य विशेषता है
वैदिक साहित्य से पता चलता है कि जिस किसी का वध परमेश्वर द्वारा होता है, उसको मुक्ति मिल जाती है यथा रावण, कंस, हिरण्यकशिपु
अपने अंदर की सारी आसुरी प्रवृत्तियों/गुणों को लिखें, जितने लिखेंगे वे सारे के सारे भगवान् आज ही सदा के लिए बाहर निकाल देंगे | प्रयोग कर के देखिये |
