Font size
WorksheetsKṛṣṇa Book Practice Quiz (Chapter 43-44)
Total questions: 19
Worksheet time: 50mins
मल्ल्युद्ध की रंगशाला के प्रवेशद्वार पर कृष्ण-बलराम ने किसको पाया? (अध्याय 43)
स्वागतार्थ कंस
रास्ता रोके कुवलयापीड़ नामक विशाल हाथी
कृष्ण ने कुवलयापीड़ का दांत तोड़कर वध करने से पहले किस प्रकार 25 गज तक खींचा व मारा? (अध्याय 43)
जैसे गरुड़ छोटे से सर्प को घसीटता है
जैसे वे बाल्यकाल में किसी बछड़े की पूंछ खींचते थे
हाथी के सम्मुख जाकर उसे जोर का थप्पड़ मारा
हाथी के सामने लेट गए जिससे वह ठोकर खाकर गिर गया
उसकी सूंड पकड़कर नीचे गिरा दिया
कृष्ण-बलराम हाथी दांत उठाये रंगभूमि में प्रविष्ट हुए
स्त्रियों को वो साक्षात यमराज प्रतीत हुए
राजा कंस को प्यारे बालक के रूप में दिखे
मल्लों को अपने सम्बन्धी प्रतीत हुए
उपस्थित योगियों को वे मूर्तिमान कामदेव प्रतीत हुए
कृष्ण-बलराम का रंगशाला में दर्शन करके मथुरा के नागरिकों को कैसा अनुभव हुआ? (अध्याय 43)
जैसे उनके मुखारविंद का मधुपान कर रहे हों
जैसे उनकी देह की सुगंध ले रहे हों
जैसे उनका रसास्वादन कर रहे हों
उनको भुजाओं में बांधकर आलिंगन कर रहे हों
कृष्ण-बलराम को मल्ल्युद्ध के लिए किसने आमंत्रित किया? (अध्याय 43)
चाणूर
मुष्टिक
शल
तोशल
बलराम जी ने किस किस मल्ल का वध किया? (अध्याय 44)
चाणूर
मुष्टिक
कूट
शल
कैसे गोपियाँ विभिन्न भौतिक कार्यकलापों में व्यस्त रहते हुए भी कृष्णभावनामृत में डूबे रहने का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करती हैं? (अध्याय 44)
प्रातः गोदोहन व धान कूटते हुए वे कृष्ण का दर्शन करती हैं
माखन बिलौने तक प्रतिक्षण कृष्ण का चिंतन करती हैं
घरों को झाड़ते-बुहारते वे सर्वदा कृष्ण-चिंतन में लीन रहती हैं
चौबीसों घंटे श्रीकृष्ण का दर्शन व चिंतन करती हैं
श्रीकृष्ण के चाणूर को अपनी मुट्ठी से तीन प्रहार करने पर उसके अंतिम प्रहार कैसे थे? (अध्याय 44)
जैसे एक बाज दूसरे पर झपटता है
कृष्ण जैसे गज के लिए पुष्पहार द्वारा आघात
कृष्ण द्वारा घुमाते ही उसका प्राणांत हो गया
मरणोपरांत वह इंद्र के ध्वज के समान गिर पड़ा
चाणूर और मुष्टिक के मारे जाने पर कूट और शल मल्लों को किसने और कैसे मारा? (अध्याय 44)
कूट को बाएं हाथ से पकड़कर रूखेपन से बलराम ने वध किया
कूट को दाएं हाथ से पकड़कर रूखेपन से बलराम ने वध किया
शल का श्रीकृष्ण ने ठोकर मारकर सिर तोड़ दिया
शल का श्रीकृष्ण ने ठोकर मारकर पैर तोड़ दिया
चाणूर आदि मल्लों के वध पर कंस ने क्या आदेश दिया? (अध्याय 44)
कृष्ण-बलराम का राजकीय सम्मान किया जाए
नन्द आदि गोपों को दुगुनी धन सम्पदा प्रदान की जाये
उदार हृदय वसुदेव का अविलम्ब राजतिलक किया जाए
मेरे शत्रुओं के पक्षधर मेरे पिता उग्रसेन की हत्या कर दी जाय
परमशक्तिमान भगवान् श्रीकृष्ण ने कंस का वध कैसे किया? (अध्याय 44)
कंस के ऊँचे मंच पर कूदकर उन्होंने उसे अत्यंत बलपूर्वक पकड़ लिया
तत्क्षण कंस के शीश पर से राजमुकुट को गिरा दिया
उसके लम्बे केशों को पकड़कर घसीटकर नीचे फेंक दिया
कंस की छाती पर चढ़कर मुष्टि-प्रहार किया
कंस का वध करने के बाद श्रीकृष्ण ने उसे कैसे व क्यों घसीटा? (अध्याय 44)
जैसे सिंह हाथी का वध करने के बाद उसे घसीटता है
अपने माता-पिता को कंस की मृत्यु का विश्वास दिलाने हेतु
कंस को मृत्यु के बाद क्या गति प्राप्त हुई? (अध्याय 44)
चक्रधारी कृष्ण का निरंतर चिंतन करने के कारण उसे सारूप्य मुक्ति मिली
कृष्ण से द्वेष करने के कारण उसे रौरव नर्क में भेजा गया
किस प्रकार से श्री कृष्ण का चिंतन करना अधिक लाभकारी है? (अध्याय 44)
भक्त
शत्रु
कंस के कितने भाई थे? (अध्याय 44)
6
7
8
9
कंस के छोटे, कंक समेत, आठों भाइयों को किसने मारा? (अध्याय 44)
कृष्ण
बलराम
कंस तथा उसके भाइयों की पत्नियों ने कहा - जो परम स्वामी, भोक्ता, सत्ता कृष्ण को स्वीकार नहीं करता __________ (अध्याय 44)
वह कभी सुखी नहीं रह सकता
वह उनके पतियों के समान मृत्यु को प्राप्त होता है
देवकी-वसुदेव ने बंदीगृह से मुक्त होने पर श्रीकृष्ण-बलराम का आलिंगन किया | (अध्याय 44)
सही
गलत
आप अपना अनुभव बता सकते हैं |
